महान गुण है धैर्य :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

08 मार्च 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (28 बार पढ़ा जा चुका है)

महान गुण है धैर्य :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*अपने संपूर्ण जीवन काल में मनुष्य में अनेक गुणों का प्रादुर्भाव होता है | अपने गुणों के माध्यम से ही मनुष्य समाज में सम्मान या अपमान अर्जित करता है | यदि मनुष्य के गुणों की बात की जाए तो धैर्य मानव जीवन में एक ऐसा गुण है जिसके गर्भ से शेष सभी गुण प्रस्फुटित होते हैं | यदि किसी में धैर्य नहीं है तो वह चाहे जितना शक्तिसंपन्न हो उसकी संपन्नता दुर्बलता में बदल जाती है | धैर्य के बिना मनुष्य के किए गए किसी भी कार्य का समुचित परिणाम नहीं प्राप्त हो पाता | हमारे महापुरुषों ने कहा है कि जिसके पास धैर्य है समझो उसने काल को भी पक्ष में कर लिया है | यदि आपमें धैर्य है तो आप के विरोधी ही नहीं बल्कि आपके दुश्मन भी आप का लोहा मानने के लिए बाध्य हो जाएंगे | मनुष्य को जीवन की विषमताओं में प्रतिकूलताओं में अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए , यदि धैर्य डगमगा जाता है तो मनुष्य नकारात्मक हो जाता है और नकारात्मक मनुष्य जीवन के अंधेरों में खोता चला जाता है | अतः प्रत्येक मनुष्य को धैर्य का त्याग कभी नहीं करना चाहिये | कर्म करना मनुष्य का कर्तव्य है परंतु कर्म करने के बाद उसके फल की प्रतीक्षा करने में धैर्य की आवश्यकता भी होती है | यदि खेत में बीज डाला गया है तो धैर्य धारण करके फल आने की प्रतीक्षा भी करनी पड़ेगी | यहीं पर यदि किसान का धैर्य खो जाए तो विचार कीजिए कि उसको कैसी फसल प्राप्त होगी ? धैर्यवान मनुष्य कोई भी कार्य समय को अनुकूल पा करके ही करते है यह अलग विषय है ऐसे लोगों को कुछ लोग कमजोर व डरपोक कहने लगते हैं | जबकि ऐसा व्यक्तित्व ना तो कमजोर होता है ना ही डरपोक होता है बल्कि वह धैर्य धारण करके उचित समय की प्रतीक्षा किया करता है |* *आज मनुष्य प्रत्येक कार्य करके उसका परिणाम त्वरित गति से प्राप्त करना चाहता है | कोई भी कार्य करने के बाद धैर्य धारण करके प्रतीक्षा करना आज के मनुष्य के लिए मुश्किल कार्य लग रहा है | यही कारण है कि अधिकतर लोग सफलता के किनारे पहुंचने के बाद भी असफल हो जाते हैं | यह सत्य है कि एक धैर्यवान मनुष्य अपने चारों ओर से स्वयं के ऊपर होने वाले कटाक्षों से व्यथित न होकरके धैर्य धारण किये रहता है और उसका समुचित उत्तर उचित समय आने पर ही देता है | जबकि कुछ लोग विरोधियों के इन कृत्यों से धैर्य खो देते हैं और उनके कदम अपने कर्म पथ से डगमगा जाते है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" इतना ही कहना चाहूंगा कि धैर्य जीवन का एक ऐसा गुण है जिसको धारण कर हम बाहरी जीवन में परिपूर्ण सफलता प्राप्त कर सकते हैं साथ ही आंतरिक जीवन में शांति के अधिकारी भी बन सकते हैं | वर्तमान समय में धैर्य का महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि आज तुरंत सफलता , बुलंदी , नाम व वैभव की अंधी दौड़ प्रचलन में आ चुकी है , आज मनुष्य के व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन से शान्ति , स्थिरता अंतर्ध्यान हो चुकी है और मनुष्य असंतुलित सा हो गया है |* *धैर्य एक महान गुण है कुसमय में यही वह सच्चा मित्र होता है जो मनुष्य को बचाये रखकर पुन: अच्छे समय की प्रतीक्षा करने में सहायता करके पुनर्जीवन देता है |*

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