अक्षय नवमी एवं परिक्रमा :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

05 नवम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (2355 बार पढ़ा जा चुका है)

अक्षय नवमी एवं परिक्रमा :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

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‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼


🌳 *"अक्षयनवमी / परिक्रमा" पर विशेष* 🌳


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*सनातन धर्म में कार्तिक मास का बहुत ही महत्व है , इसे दामोदर मास भी कहा जाता है | कार्तिक मास में महीने भर स्नान एवं दीपदान का विधान बताया गया है | वैसे तो कार्तिक माह में त्यौहार ही त्यौहार मनाए जाते हैं परंतु इन्हीं त्योहारों में कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को "अक्षय नवमी" कहा जाता है | अक्षय का अर्थ होता है जो कभी समाप्त न हो | आज के दिन किया गया पुण्य - धर्म कभी क्षय नहीं होता | ऐसा माना जाता है कि कार्तिक मास में भगवान श्री हरि विष्णु आंवले के वृक्ष के नीचे निवास करते हैं इसलिए अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष के नीचे भगवान श्री हरि विष्णु का पूजन करके वही भोजन बनाकर करने की मान्यता है | वर्ष भर जितने भी पुण्य धर्म किए जाते हैं उसकी अपेक्षा अक्षय नवमी के दिन किया गया पुण्य एवं व्रत - पूजन अक्षय फल प्रदान करता है | आज के ही दिन पावन द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था | सनातन धर्म मे जो महत्त्व अक्षय तृतीया का है उससे कहीं अधिक महत्त्व अक्षय नवमी का बताया गया है | आज के दिन भगवान विष्णु के दो मुख्य अवतारों श्री राम एवं श्री कृष्ण के नगरी की परिक्रमा का भी विधान है | परिक्रमा के विषय में बताया गया है कि :- यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च ! तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिण पदे पदे !! अर्थात जो भी पाप जन्म जन्मांतर में किए गए हैं वह सभी पाप परिक्रमा करने से नष्ट हो जाते हैं | पावन धाम अयोध्या में मुख्य रूप से तीन परिक्रमा की जाती है | चौरासीकोसी , चौदहकोसी एवं पंचकोसी | इसका रहस्य है कि चौरासीकोसी परिक्रमा में पूरा अवध क्षेत्र आता है , समाज के कल्याण एवं चौरासी लाख योनियों से मुक्ति पाने के लिए संतसमाज यह परिक्रमा करता है | चौजह कोसी परिक्रमा में पूरा अयोध्या नगर एवं पंचकोसी परिक्रमा में रामकोट की परिक्रमा की जाती है | आज अक्षय नवमी के दिन भगवान के नगर की परिक्रमा करके उनके प्रति श्रद्धा भक्ति के साथ मनुष्य कृतज्ञता प्रकट करता है | जो व्यक्ति चौरासीकोसी एवं चौदह कोसी परिक्रमा नहीं कर सकता वह रामकोट की परिक्रमा अर्थात पंचकोसी परिक्रमा कर ले | यदि यह भी संभव ना हो सके तो मात्र कनक भवन की परिक्रमा करने से उसको पूरी परिक्रमा का फल प्राप्त हो सकता है | कभी-कभी ऐसी परिस्थिति आ जाती है कि मनुष्य जाने में असमर्थ हो जाता है ऐसी स्थिति में मनुष्य को अपने माता-पिता एवं गुरू को बैठा करके उनकी सात परिक्रमा कर लेनी चाहिए इससे समस्त सृष्टि की परिक्रमा का फल प्राप्त हो सकता है | आवश्यकता है श्रद्धा एवं विश्वास की , क्योंकि बिना श्रद्धा और विश्वास के कुछ भी प्राप्त नहीं हो पाता |*


*आज प्रातः काल जैसे ही अक्षय नवमी लगेगी भगवान के पावन नगरी मथुरा एवं पावन धाम अयोध्या की परिक्रमा भक्तजन प्रारंभ कर देंगे | "जय श्री राम" के उच्त उद्घोष के साथ देश से ही नहीं वरन विदेशों से भी आए हुए श्रद्धालु भगवान के नगरी की परिक्रमा प्रारंभ कर देते हैं | पहले की अपेक्षा आज साधन - संसाधन बढ़ गए हैं , जहां लोग पहले सुदूर क्षेत्रों से पैदल चलकर अयोध्या पहुँच करके परिक्रमा करके पुनः पैदल जाते थे वहीं आज अनेक प्रकार के साधनों का प्रयोग करके श्रद्धालु परिक्रमा करने पहुंचते हैं | पहले जहां परिक्रमा भक्ति भाव के साथ की जाती थी वही आज इसका भी स्वरूप बदल गया है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" समय के साथ बदले हुए इस धार्मिक कार्य का स्वरूप देख कर कह सकता हूं कि आज चौदहकोसी परिक्रमा युवाओं के लिए मनोरंजन का साधन हो गया है | जहां परिक्रमा का विधान है कि एक पैर से दूसरा पैर नहीं लगना चाहिए वही आज बिल्कुल विपरीत स्थिति है | शासन प्रशासन की कड़ी निगरानी में आज परिक्रमा संपन्न हो रही जिसका कारण कहीं ना कहीं से मनुष्य की मानसिकता एवं उतावलापन ही कहा जा सकता है | देश ही नहीं वरन विदेशों से भी अनेकों श्रद्धालु भगवान राम की पावन नगरी में पधारकर सरयू मैया की गोद में स्नान करके हनुमंत लाल का दर्शन एवं रामलला का पूजन करके परिक्रमा प्रारंभ करते हैं वैसे तो परिक्रमा का अक्षय फल प्राप्त होता है परंतु आज जिस प्रकार की परिक्रमा की जा रही है उससे क्या प्राप्त होगा यह मनुष्य की मानसिकता पर निर्भर करता है | मेरा मानना है कि उसका परिक्रमा करना व्यर्थ है जिसके माता-पिता एवं गुरू उससे असंतुष्ट हैं | आज अनेकों लोग अपने माता पिता को तिरस्कृत करके एवं गुरु के साथ छल करके प्रेम से परिक्रमा करने चले आते हैं कि हमें परिक्रमा का फल मिलेगा , उन्हें किलना फल प्राप्त होगा यह तो परमात्मा ही जाने | यदि परिक्रमा का फल लेना है तो सर्वप्रथम जन्मदाता माता-पिता को संतुष्ट करके एवं गुरु भगवान को निश्चल भाव से समर्पित होने के बाद ही परिक्रमा या किसी भी व्रत का फल प्राप्त हो सकता है |*


*कोई भी परिक्रमा करने के पहले विघ्नविनाशक भगवान गणेश की तरह अपने माता-पिता की परिक्रमा करने से समस्त सृष्टि की परिक्रमा का फल प्राप्त हो जाता है | इसलिए प्रत्येक मनुष्य को अक्षय नवमी के दिन अपने माता-पिता एवं गुरु की परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए |*


🌺💥🌺 *जय श्री हरि* 🌺💥🌺



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आचार्य अर्जुन तिवारी

प्रवक्ता

श्रीमद्भागवत/श्रीरामकथा

संरक्षक

संकटमोचन हनुमानमंदिर

बड़ागाँव श्रीअयोध्याजी

(उत्तर-प्रदेश)

9935328830


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