हरिप्रबोधिनी एकादशी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

08 नवम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (446 बार पढ़ा जा चुका है)

हरिप्रबोधिनी एकादशी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में चातुर्मास्य का विशेष महत्त्व है | चार महीने चलने वाला यह विशेष समय भगवत्भक्ति प्राप्त करने वाले साधकों के लिए महत्त्वपूर्ण होता है | आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी अर्थात हरिशयनी एकादशी को जब भगवान सूर्य मिथुन राशि पर जाते हैं तो चातुर्मास्य प्रारम्भ हो जाता है | हरिशयनी का अर्थ होता है कि भगवान श्री हरि विष्णु चार महीने के लिए निद्रा के वशीभूत होकर निद्रा में चले जाते हैं | आषाढ शुक्लपक्ष की एकादशी को निद्रा में लीन हुए भगवान आज अर्थात कार्तिक शुक्ल एकादशी को निद्रा का त्याग करके जाते हैं | आज के दिन को "देवोत्थानी या "देव उठनी" एकादशी कहा जाता है | आषाढ़ शुक्लपक्ष से लेकर कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी तक विवाह , यज्ञोपवीत , दीक्षाग्रहण , गृहप्रवेश , प्रतिष्ठा आदि शुभकार्य वर्जित माने गये हैं | क्योंकि जगत के साक्षीभूत एकमात्र नारायण हैं और जब वही निद्रा में लीन होते हैं तो किसको साक्षी मानकर कोई शुभकार्य किया जा सकता है | इन चार महीनों में जो भी पौराणिक विधि के अनुसार चातुर्मास्य व्रत का पालन कर लेता है वह भगवान श्रीहरि के धाम का उत्तराधिकारी हो जाता है | आज कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की "हरि प्रबोधिनी" एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि निद्रा का त्याग करते हैं और पुन: समस्त शुभकार्य प्रारम्भ हो जाते हैं | आज के ही दिन साधकों के द्वारा चातुर्मास्य व्रत का समापन किया जाता है | आज भगवत्भक्तों को श्रीहरि के मन्दिर में हरिविग्रह के समक्ष रहना चाहिए क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि देव देवेश श्री हरि जब निद्रा का त्याग करके अपने नेत्रों का उन्मीलन करते हैं तो उस समय जिसके ऊपर उनकी दृष्टि पड़ जाती है उसे मोक्ष प्राप्त हो जाता है | ऐसी मान्यता है कि आज के दिन मनुष्य जो भी भगवान को अर्पण करता है स्वर्ग में वही वस्तु उसको उपभोग करने के लिए प्राप्त होती है | सनातन के समस्त विधि विधान इसीलिए अलौकिक हैं क्योंकि यहाँ मृत्यु के बाद भी जीवन को समाप्त नहीं माना जाता और मृत्योपरांत भी जीव को सद्गति मिले ऐसी व्यवस्था की जाती है |*


*आज के समाज में चारों ओर दुख ही दुख दिखाई पड़ता है , कोई भी सुखी नहीं दिखाई पड़ता , किसी न किसी प्रकार का दुख सबको ही है | इसका प्रमुख कारण है कि आज का मनुष्य विशेषकर सनातनधर्मी अपने धर्म - कर्म से विमुख होते हुए सनातन धर्म की मान्यताओं एवं परंपराओं को ना मान करके मनमाने कार्य करने में तत्पर है | जहां एक ओर हमारे धर्म ग्रंथ एवं बुजुर्ग बताते हैं कि चातुर्मास्य में प्रत्येक शुभ कार्य वर्जित होता है वहीं आज का मनुष्य सारे कार्य मनमाने ढंग से करने के लिए तैयार दिखाई पड़ रहा है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" देख रहा हूं कि आज समाज में विद्वानों की बात को दरकिनार करते हुए योग गृह प्रतिष्ठा , गृहारम्भ तो कर ही रहे हैं साथ ही विवाह संस्कार भी चातुर्मास्य में संपन्न कर रहे हैं | इसीलिए आज प्रत्येक गृहस्थाश्रम में किसी न किसी प्रकार की विपन्नता एवं अराजकता का साम्राज्य दिखाई पड़ता है | विचार कीजिए कि हमारे पूर्वजों ने या हमारे सनातन के पुराधाओं ने यदि कोई नियम बनाया है तो उसका कोई कारण रहा होगा , यदि किसी कार्य की वर्जना की गयी है तो उसका भी विशेष कारण रहा होगा , परंतु आज का मनुष्य अधिक शिक्षित होने के अहंकार में सनातन ग्रंथों की तो बात ही छोड़ो अपने ही घर में उपस्थित अपने बुजुर्गों की बात भी नहीं मानना चाहता है | स्वयं को शिक्षित कहने वाला मनुष्य बड़े ही अहंकार से अपने ही बुजुर्गों को अशिक्षित और जाहिल तक कह देता है , जबकि यह सत्य है कि अपने पूर्वजो का अपमान करके मनुष्य आज सुखी तो नहीं है बल्कि समाज को दिखाने के लिए सिर्फ खोखली हंसी हंस रहा है | आज समाज में स्वयं को सनातन का पुरोधा कहने वाले भी सनातन के नियमों को मानते हुए नहीं दिखाई पड़ते हैं | यही कारण है कि आज समाज में उच्च पदों पर बैठे हुए महान पुरुषों का कोई महत्व नहीं रह गया है क्योंकि वे स्वयं तेजहीन हो गए हैं तो समाज को क्या दिशा देंगे ? |*


*सनातन धर्म की समस्त मान्यताएं वैज्ञानिकता से ओतप्रोत है | यदि युगों पहले कोई मान्यता बनाई गई है तो उसका कारण रहा होगा | इसलिए प्रत्येक मनुष्य को आधुनिकता के साथ साथ अपनी सनातन मान्यताओं को भी मानते रहना चाहिए |*

अगला लेख: मन की पवित्रता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
05 नवम्बर 2019
🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼🌳 *"अक्षयनवमी / परिक्रमा" पर विशेष* 🌳🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻 *सनातन धर्म में कार्तिक मास का बहुत ही महत्व है , इसे दामोदर मास भी कहा जाता है | कार्तिक मास में महीने भर स्नान एवं दीपदान का
05 नवम्बर 2019
08 नवम्बर 2019
*पंचतत्त्वों से बने मनुष्य को इस धरा धाम पर जीवन जीने के लिए मनुष्य को पंचतत्वों की आवश्यकता होती है | रहने के लिए धरती , ताप के लिए अग्नि , पीने के लिए पानी , सर ढकने के लिए आसमान , एवं जीवित रहने के लिए वायु की आवश्यकता होती है | मनुष्य प्रत्येक श्वांस में वायु ग्रहण करता है | श्वांस लेने के लिए
08 नवम्बर 2019
16 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य येन - केन प्रकारेण ईश्वर प्राप्ति का उपाय किया करता है | ईश्वर का प्रेम पिराप्त करने के लिए मनुष्य पूजा , अनुष्ठान , मन्दिरों में देवदर्शन तथा अनेक तीर्थों का भ्रमण किया करता है जबकि भगवान को कहीं भी ढूंढ़ने की आवश्यकता नहीं है मानव हृदय में तो ईश्वर का वास है ह
16 नवम्बर 2019
31 अक्तूबर 2019
*मनुष्य इस धरा धाम पर जन्म लेकर के जीवन भर अनेकों कृत्य करते हुए अपनी जीवन यात्रा पूर्ण करता है | इस जीवन अनेक बार ऐसी स्थितियां प्रकट हो जाती है मनुष्य किसी वस्तु , विषय या किसी व्यक्ति के प्रति इतना आकर्षित लगने लगता है कि उस वस्तु विशेष के लिए कई बार संसार को भी ठुकराने का संकल्प ले लेता है | आखि
31 अक्तूबर 2019
23 नवम्बर 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <o:OfficeDocumentSettings> <o:RelyOnVML/> <o:AllowPNG/> </o:OfficeDocumentSettings></xml><![endif]--><!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKer
23 नवम्बर 2019
16 नवम्बर 2019
*परमात्मा की बनाई यह सृष्टि निरन्तर क्षरणशील है | एक दिन सबका ही अन्त निश्चित है | सृष्टि का विकास हुआ तो एक दिन महाप्रलय के रूप में इसका विनाश भी हो जाना है , सूर्य प्रात:काल उदय होता है तो एक निश्चित समय पर अस्त भी हो जाता है | उसी प्रकार इस सृष्टि में जितने भी जड़
16 नवम्बर 2019
21 नवम्बर 2019
*परमात्मा के द्वारा मैथुनी सृष्टि का विस्तार करके इसे गतिशील किया गया | मानव जीवन में बताये गये सोलह संस्कारों में प्रमुख है विवाह संस्कार | विवाह संस्कार सम्पन्न होने के बाद पति - पत्नी एक नया जीवन प्रारम्भ करके सृष्टि में अपना योगदान करते हैं | सनातन धर्ण के सभी संस्कार स्वयं में अद्भुत व दिव्य रह
21 नवम्बर 2019
05 नवम्बर 2019
*सनातन धर्म में मनुष्य को मोक्ष प्रदान करने वाली दिव्य सप्तपुरियों का उल्लेख मिलता है | यथा :- अयोध्या - मथुरा माया काशी कांचीत्वन्तिका ! पुरी द्वारावतीचैव सप्तैते मोक्षदायिकाः !! अर्थात :- अयोध्या , मथुरा , माया (हरिद्वार) काशी , कांची (कांचीपुरम्) अवन्तिका (उज्जैन) एवं द्वारिका यह सात ऐसे स्थान है
05 नवम्बर 2019
04 नवम्बर 2019
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !!आदिकाल से भारतीय परंपरा में सनातन के अनुयायियों के द्वारा अपने धर्म ग्रंथों का दिशा निर्देश प्राप्त करके भांति भांति के पर्व त्यौहार एवं व्रत का विधान करके मानव जीवन को सफल बनाने का प्रयास किया गया है | सनातन धर्म का मानना है ईश्वर कण - कण में व्याप्त है इसी मान्यता को आधार
04 नवम्बर 2019
28 अक्तूबर 2019
*कार्तिक माह में चल रहे "पंच महापर्वों" के चौथे दिन आज अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा | भारतीय सनातन त्योहारों की यह दिव्यता रही है कि उसमें प्राकृतिक , वैज्ञानिक कारण भी रहते हैं | प्रकृति के वातावरण को स्वयं में समेटे हुए सनातन धर्म के त्योहार आम जनमानस पर अपना अमिट प्रभाव छोड़ते हैं
28 अक्तूबर 2019
07 नवम्बर 2019
🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻 *हमारे देश में हिंदू संस्कृति में बताए गए बारहों महीने में कार्तिक मास का विशेष महत्व है , इसे दामोदर मास अर्थात भगवान विष्णु के प्रति समर्पित बताया गया है | कार्तिक मास का क्या महत्व है इसका वर
07 नवम्बर 2019
31 अक्तूबर 2019
..... इंसानियत ही सबसे पहले धर्म है, इसके बाद ही पन्ना खोलो गीता और कुरान का......"जय हिन्द"
31 अक्तूबर 2019
07 नवम्बर 2019
🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻 *हमारे देश में हिंदू संस्कृति में बताए गए बारहों महीने में कार्तिक मास का विशेष महत्व है , इसे दामोदर मास अर्थात भगवान विष्णु के प्रति समर्पित बताया गया है | कार्तिक मास का क्या महत्व है इसका वर
07 नवम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x