कभी न भूलने वाली रेल यात्रा

16 जून 2021   |  शोभा भारद्वाज   (412 बार पढ़ा जा चुका है)

कभी न भूलने वाली रेल यात्रा

कभी न भूलने वाली रेल यात्रा

डॉ शोभा भारद्वाज

कपूरथला ,पंजाब में मामा जी के बेटे की बहू मेरी भाभी की मृत्यू हो गयी उनकी तेरही में हमे जाना था अपने घर से मैं .माँ के घर मेरी छोटी बहन का प्रोग्राम बना . हमें सुबह शाने पंजाब गाड़ीकी टिकट मिल गयीं आराम से सफर कटा इस गाड़ी में एक परेशानी है रास्ते में किन्नर चढ़ते हैं मुहँ मांगी रकम मांगते हैं जैसे 100 रूपये से शुरू करते हैं 50 रुपये पर समझौता हो जाता है. कैसे लौटना है ? हमने सोचा वहाँ से तत्काल में टिकट मिल जायेगी या बस से लौट आयेंगे .शाने पंजाब ने जालन्धर स्टेशन पर ढाई बजे उतार दिया आगे कपूरथला के लिए स्टेशन से डब्बा चलता है बस आधे घंटे का रास्ता है.

कपूरथला पहुंचे अगले दिन तेरही थी पूरा दिन हवन आदि में निकल गया उसके बाद रस्म पगड़ी .जालन्धर में रहने वाले रिश्तेदारों नें हमे जालन्धर स्टेशन पर कार से पहुंचा दिया . यहाँ से कई गाड़ियां दिल्ली और लंबी दूरी की मिलती हैं .सुपर फास्ट गाड़ी के तत्काल में दो टिकट थ्री टायर के मिल गये दोनों बहने बहुत खुश हुई आराम से सुबह चार बजे नई दिल्ली स्टेशन पर पहुंच जायेंगे वह भी सस्ते में .

9 बजे गाड़ी स्टेशन पर आ गयी हमने दो बोतल रेल नीर ले लिया रात का खाना साथ में था सोचा गाड़ी में खा कर तुरंत सो जायेंगे .गाड़ी में चढ़े हैरानी हुई हमारी रिजर्ब बर्थ पर लोग बैठे थे पूरा कम्पार्टमेंट पूरी तरह भरा था हमारे सामने नीचे की बर्थ पर भलेमानस सज्जन बैठे थे उन्होंने समझाया आप घबरायें नहीं एडजेस्ट कर ले यह सब डेली पेसेंजर है फगवाड़ा आने पर सब उतर जाते हैं उसके बाद ट्रेन लुधियाना रूकती है फिर सुपर फ़ास्ट अपनी स्पीड दिखाती है .गाड़ी हर छोटे बड़े स्टेशन पर रूकती रही लोग उतरते गये फगवाड़ा स्टेशन पर वही रह गये जनका रिजर्वेशन था हम आराम से सीट पर बैठ गये सोचा पहले खाना खा ले मेरी नीचे की बर्थ थी बीच की बर्थ मेरी बहन की, हाथ पैर फैलाए दोनों बहनों ने मुहँ हाथ धोये बर्थ पर लौटे अभी खाने की इच्छा नहीं थी मौत पर गये थे सभी रिश्तेदार मिले उनकी बाते करते – करते लुधियाना आ गया .

अचानक धक्के मारते ढेर सामान लिए जिनमे प्लास्टिक की कुर्सियां ,ट्रंक .गठरी में बंधे कम्बल और कई बैग लेकर दम्पत्ति चढ़े साथ में छह बच्चे हमारे सामने वाली बर्थ के ऊपर दो की बर्थ अभी खाली थीं नीचे वाली बर्थ पर सज्जन लेटे थे सबसे ऊपर वाली बर्थ पर दम्पत्ति ने जनरल डिब्बा समझ कर कुर्सिया टिका थी बीच की बर्थ पर पूरा सामान फैला दिया छोटे बच्चे मेरी और सज्जन की खिड़की पर बैठ गये छोटा गोद का बच्चा श्रीमती ने मेरी सीट पर लिटा दिया मैं हैरान परेशान इतने में तीन व्यक्ति आये उन्होंने कहा अरे यह हमारी सीटें हैं महिला आगे आ कर बोली आपका नाम लिखा है और भी खाली बर्थ है वहाँ बैठ जाओ वह टीटी को बुला लाये उन्होंने दम्पत्ति से कहा टिकट दिखाओ उनके पास केवल एक टिकट का रिजर्वेशन था बाकि पत्नी की टिकट और तीन बच्चों की आधी टिकट थी .उनका यह कम्पार्टमेंट भी नहीं था बड़ी मुश्किल से कुर्सियाँ सीटों के नीचे रखी सामान भी किसी तरह सीटों के नीचे समेटा वह अपने कम्पार्टमेंट में जाने के लिए किसी तरह तैयार नहीं हुये जबकि अंदर ही अंदर जा सकते थे टीटी ने जिनका रिजर्वेशन था उनमें एक को समझाया आपको दिल्ली तक जाना इनकी वहाँ की एक सीट आप ले लेना यह आपकी सीट ले लेंगें साथ में बच्चे हैं .

इनको वार्निंग दे दी रात का समय है क्या कहूँ तुम्हारा लम्बा सफर है दिल्ली में काफी देर तक गाड़ी रूकती है , जरनल डिब्बे में चले जाना एक बच्चे की आधी टिकट और लेना यहाँ से तीसरे डिब्बे में 33 नम्बर की तुम्हारे आदमी की बर्थ है . हमारे सबसे ऊपर वाली बर्थ उसको दे दी मैने अचानक पूछ लिया यह सब बच्चे आपके है दम्पत्ति की उम्र इतनी नहीं थी कि उनके छह बच्चे होगे , महिला ने आँख तरेरते हुए कहा जिनके बच्चे नहीं होते या मर जाते हैं वह ही दूसरों के बच्चों को नजर लगाती है .मैं सहम गयी मेरे पास बैठी लड़की से उसका भाई लड़ने लगा मुझे खिड़की पर बैठना है मेरी बहन की बीच की बर्थ थी वह लेट गयी मेरे लिए बैठना मुश्किल हो गया सिर निकाल कर बहुत मुश्किल से बैठी थी गर्दन दुखने लगी .महिला जमीन पर बैठ कर बच्चे को दूध पिलाने लगी .

मेरे सामने वाली सीट पर बैठे बुजुर्ग बोले बच्चे का इंतजाम करो मुझे सोना है महिला ने गुर्रा कर कहा बाबा जरा सब्र कर लो देखते नहीं हो बच्चा दूध पी रहा है मेंरी तो हिम्मत ही नहीं पड़ी मुझे दादी कह कर डांट देगी अभी परदादी बना देगी महिला ने बड़ा सा डिब्बा खोला उसमे से रोटियाँ निकाली बड़े बच्चों को दो रोटियाँ उन पर आम के अचार की फांक रख कर हाथ पर रख दी बाकी सबको भी खाना दे दिया मेरे पास बैठी लड़की की उंगलियाँ पर तेल लग गया मेरी काटन की कलफ लगी हल्के रंग की धोती से पोंछने को तैयार थी मेरा हौसला जबाब दे गया मैं खड़ी हो गयी . ठंडी पानी की बोतल पर महिला की नजर पड़ी उसे उठा कर पहले तृप्ति से स्वयं पानी पिया बाकी थोडा - थोड़ा बच्चों को पिला दिया मेरी बहन ने अपनी बोतल छिपा ली अब वह नीचे वाली बर्थ पर बैठे सज्जन से बोली बाबा जल्दी –जल्दी में पानी लेना भूल गये पानी होगा उन्होंने बहाना बनाया जरा सा पानी है मुझे दवाई खानी है मुझे खड़ा देख कर भी महिला ने इत्मिनान से रास्ते में चद्दर बिछा दी उनमें बच्चों को लिटा दिया एक इंच भी जगह नहीं छोड़ी कोई निकल नहीं सकता था हमारी चप्पलों का अता पता नहीं था बीच रास्ते पर भी चादर बिछा कर स्वयं और बच्चों को लिटा दिया .

सीट पर बैठ कर मैने अपनी बहन से पूछा खाना निकालूं वह गुस्से में भुनभुनाती हुई बोली कहा था सुबह बस से चलेंगे या शाने पंजाब से तुम्हे घर जाने की जल्दी रहती है मुझे नहीं खाना पानी भी नहीं दूंगी .मैं बर्थ पर लेट गयी भूख मर गयी थी बड़ी मुश्किल से आँख लगी .सोनीपत का स्टेशन आया कुछ लोग अपना सामान समेटने लगे उनमें से एक दबंग अधेड़ महिला आई उसने गुस्से में महिला से कहा अपना ताम झाम समेत ले एक मिनट के लिए बवाना स्टेशन पर गाड़ी रुकेगी वहाँ बहुत से पसेंजर उतरेंगे पूरा रास्ता रोक कर पड़ी हो कोई रात भर निकल नहीं सका ,रास्ता खाली करो अब तक वह सम्भल गयी अब पाला पढ़े लिखों से नहीं था ऊंघते बच्चों को उठाया कुछ को मेरी सीट पर बिठा दिया ऊंघते बच्चे मुझ पर लटकने लगे रास्ता खाली किया टीटी पहले वार्निंग दे गये थे . अब वह उठ गयी और चादरें समेटने लगी मैने झुक कर बड़ी मुश्किल से चप्पलें निकाली .नई दिल्ली स्टेशन पर गाड़ी चार बजे पहुंच गयी हमारे पास सामान के नाम पर एक बैग था गाड़ी से उतर कर चैन की सांस ली .आगे उनका क्या हुआ ? कुछ नहीं होगा उनके पास साहब हम गरीब आदमी है की तोप है . दिल्ली में इस तोप के आगे सभी चित हैं .

दो बहने यात्रा के लिए गयीं

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