मुक्तक

08 अगस्त 2016   |  कुमार रोहित राज   (88 बार पढ़ा जा चुका है)

मुक्तक

मुसकुरा कर फूल को ,यार पागल कर दिया 

प्यार ने अपना जिगर ,नाम तेरे कर दिया 

आस से ना प्यास से ,दूर से ना पास से 

आँख तुमसे जब मिली ,बात पूरी कर दिया 

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