काव्य की विधाएँ

03 सितम्बर 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (6635 बार पढ़ा जा चुका है)

@@@@@@@@@@@@@@@@@@काव्य की विधाएँ विविध,है अलग सबकी पसन्द |गीत,गजल,दोहा,भजन, कविता शेर और छन्द ||कविता शेर और छन्द, नवरस के रंग बरसाए ,कुण्डी खोल दिल -द्वार की , मार्ग सही दिखाएँ ||@@@@@@@@@@@@@@@@@@

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@@@@@@ हाँ रे मिनख जाग जा @@@@@@*********************************************************हाँ रे मिनख जाग जा ,क डूबण रो खतरों नेड़े आग्यो रे |क मिनख जाग जा |नेता लुटे अफसर लुटे,मिलकर सारा लूटे रे |(2)क अंग्रेजां री लूटपाट ,अब फीकी पड़गी रे ||क मिनख जाग जा |हाँ रे मिनख जाग जा ,क डूबण रो खतरों नेड़े आग्यो
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