ओरांग उटांग !!!! - सूरज बडत्या

27 अक्तूबर 2016   |  डॉ हरेश परमार   (150 बार पढ़ा जा चुका है)

ओरांग उटांग !!!!

परम आदरणीय आंबेडकर विरोधियों !!!

आपकी महिमा अपरम्पार हो !!! जय जय कार हो !!

आपकी सारी बहस को मैंने बेहद बारीकी के साथ सतर्क निगाह से पढ़ा , और मैं अब इस नतीजे पर पहुंचा हूँ की आपके विचारों को मैं पूरी तरह से खारिज कर सकूँ !!!

इसे अपने पूर्वज से असहमति दर्ज करना और उनकी सीमाएं दीखाना नहीं कहते इसे कुछ और कहते हैं शायद वो शब्द मैं नहीं कह पाउँगा ... आप खुद ही समझे ??? आपको इतिहास की और समाज वि ज्ञान के अध्ययन की तहजीब नहीं, तमीज नहीं और न ही सलीका , बिना संधर्भ के कहीं से भी किन्हीं विचारों को उठाके कहीं भी उड़ेल देना इसे साहब लोगों --- vomiting of words..... कहा जाता है सर | हमें आज़ादी हैं किसी की सीमाओं को बताके उससे असहमति दर्ज करने की , उस आज़ादी का फायदा आप भी उठावें करें विरोध बाबा भीम का ... कौन रोकता है ???.... महानताओं के गुणगान का और महिमामंडन का मैं विरोधी हूँ.. घोर विरोधी .. ये भी एक पाखण्ड सा है .....पर महानता के सकारात्मक कदमों- संघर्षों और उसके योगदानों को साज़िश बताना नाशुक्रापन और सत्यानाशीपण की जद मैं आयेगा सर .. आपने कहा मैंने पढ़ा .... ऐसे कुतर्कों में उलझकर मैं अपनी उर्जा नष्ट नहीं करता .... उम्मीद है आप आगे से ऐसी पोस्ट पढने का आग्रह नहीं करेंगे... असहमतियों और आलोचनाओं का स्वागत किया जाएगा ... पर जो आप कर रहें उसे सचेतन साजिशन चलाया जाने वाला अभियान कहते हैं ... . आप करें लिखे .. इसमें भी आपका स्वागत है .. लोकतंत्र है भाई साहब ... आप के पास यही करने को है पर मैं मरने से पहले अपनी नस्ल और पीढ़ी को सहेजने-संवारने लायक कुछ ..... ज्यादा कुछ नहीं भी तो सुन्दर सपने और उमीदे ही दे पाऊं तो वही सार्थक होगा महानुभावों.....

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