होंठ मुस्कुरा रहे हैं

27 मई 2017   |  Karan Singh Sagar ( डा. करन सिंह सागर)   (114 बार पढ़ा जा चुका है)

होंठ मुस्कुरा रहे हैं

आँखें मगर रिस रही हैं

तुझे भूल गया हूँ

फिर भी तू याद है

परछाईं में अपनी

तेरा अक़्स ढूँढता हूँ

किया बहुत कुछ हासिल

मुफ़लिसी फिर भी छाई है

पूरे किए सपने सभी

ज़िंदगी मगर अधूरी है

होंठ हँस रहे हैं मगर


२६ मई २०१७

जिनेवा

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bahu achcha hai

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