कच्चे खिलाड़ी थे हम

13 जून 2017   |  Karan Singh Sagar ( डा. करन सिंह सागर)   (201 बार पढ़ा जा चुका है)

कच्चे खिलाड़ी थे हम

मोहब्बत के खेल में

अपनी हार पर भी ख़ुश हुए

क्योंकि उसमें ख़ुशी थी तेरी

नज़रें मिलाई ना चुराई तुमने

बस इनमे कुछ ख़्वाब सज़ा के चले गए

कुछ कहा, बहुत कुछ बोला नहीं तुमने

बस हमें हमारे ख़यालों के सहारे छोड़ चले गए

दिल दिया, ना तोड़ा तुमने

बस उम्र भर इन्तेज़ार देकर चले गए

कच्चे खिलाड़ी थे हम


४ जून २०१७

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