कवि

24 अप्रैल 2018   |  मानसी राठौड़   (119 बार पढ़ा जा चुका है)

जो और कोई कह ना पाए कर ना पाए और कोई

ऐसा जज्बा लिए संग में चलता है अकेला कोई।

उसके पास अनूठी क्षमता और अनोखा ज्ञान है

सदा ही कागज पर अपने रचता अलग जहाँ है।

अनोखा अंदाज उसका लिखता जागृत देश बनाने

लिखी हुई उसकी पंक्ति को बड़े बड़े गुरुवर है माने।

उसकी तो दो ही ताकत इक कागज दूजी कलम

पर इसके लिखे हुए का यारों करते हैं भई सभी मनन।

क से तुम कभी न डरना वि से न विचलित होना

देता है हमको संदेशा ताकि पथ पर बढते रहना।

वाक्चातुर्य तर्कक्षमता और सोच टेढी हम इसमें पाएँ

इस लिए हम सबके लिए यह है यारों कवि कहलाए।

By-

मानसी राठौड़ D/O रविन्द्र सिंह

राठौड

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अपने रचनाकारों को जो सम्मान दिया उसके लिए आपकः बहुत आभार।

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