क्षण क्या है ??????

04 जुलाई 2018   |  गौरीगन गुप्ता   (91 बार पढ़ा जा चुका है)

एक बार पलक झपकने भर का समय ..... , पल - प्रति पल घटते क्षण मे, क्षणिक पल अद्वितीय अद्भुत बेशुमार होते, स्मृति बन जेहन मे उभर आआए वो बीते पल, बचपन का गलियारा, बेसिर पैर भागते जाते थे, ऐसा लगता था , जैसे समय हमारा गुलाम हो, उधेड़बुन की दुनियां मे सरपट भागता, समय फिर भी हाह ना आता बात समझ जब आई जब जीवन मे कुछ पीछे छूट गया, संभावना होती प्रतिक्षण मे ....., पलभर मे सपनों के महल खंडहर हो गये या, निराश भरे क्षणों मे आशा की किरणे बिखर गई या, म्लान पर्तों पर संवेदना अअपना रस उडेल गगई अच्छे-बुरे कर्म ही बनाते समय को भला बुरा क्षण भंगुर जीजीवन पल मे खुशी या गम से भरा, वक्त रहते बात समझ आई, समयप्रतीक्षारत नही किसी का, समय सीख देता, निरंतरता, नियमितता, बचनवद्ध ता की, पहचान, परख, समझ, समय को जीवन उन्नत बना, अतीत से सीख, वर्तमाम सुधार, भविष्य को उज्ज्वल बना, 'समय' जीवन का अनमोल धन है, कुदरत का दिया तोहफा, समान बटवारा, समान हहक सबका, 'सतत समय का मान कर ले', वरना हाथ मलते रह जाओगे।

अगला लेख: सदा,बिखरी रहे हँसी। ....



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
09 जुलाई 2018
भ्
कैसे- कैसे भ्रम पाल रखे हैं. .... सोते से जाग उठी ख्याली पुलाव पकाती उलझनों में घिरी मृतप्राय जिन्दगी में दुख का कुहासा छटेगा जीने की राह मिलेगी बोझ की गठरी हल्की होगी जीवन का अल्पविराम मिटेगा हस्तरेखा की दरारें भरेगी विधि का विधान बदलेगा उम्मीद के सहारे नैय्या पार लग जायेगी बचनों मे विवशता का पुल
09 जुलाई 2018
06 जुलाई 2018
जी
व्यक्ति क्या चाहता है, सिर्फ दो पल की खुशी और दफन होने के लिए दो गज जमीन, बस... इसी के सहारे सारी जिन्दगी कट जाती है। तमन्नाएं तो बहुत होती है, पर इंसान को जीने के लिए कुछ चन्द शुभ चिन्तक की, उनकी दुआओं की जरूरत होती है।आज सभी के पास सब कुछ है मग
06 जुलाई 2018
05 जुलाई 2018
हा
हास्य , जीवन की एक पूंजी......, कुदरत की सबसे बडी नेमत हैं हंसी... , ईश्वरीय प्रदत वरदान है हंसी ..., मानव मे समभाव रखती हैं हंसी..., जिन्दगी को पूरा स्वाद देती हैं हंसी......, बिना माल के मालामाल करने वाली पूूंजीहै हंसी...., मायूसी छायी जीवन मे जादू सा काम करती
05 जुलाई 2018
17 जुलाई 2018
या
समय समय की बात यातना का जरिया बदला आमने सामने से ना लेते देते अब व्हाटसअप, फेसबुक से मिलती। जमाना वो था असफल होने पर बेटे ने बाप की लताड से सीख अव्वल आकर बाप का फक्र से सीना चौडा करता, पर अब तो, लाश का बोझ कंधे पर डाल दुनियां से ही अलविदा हो चला। सासूमां का बहू को सताना सुधार का सबक होता था नखरे
17 जुलाई 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x