कविता

कविता से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

काले मेघा जल्दी से आ

काले मेघा जल्दी से आ, भूरे मेघा जल्दी से आ ||घाम ये कैसा चहक रहा है, अँगारे सा दहक रहा है |लुका छिपी फिर अब ये कैसी, मान मनुव्वल अब ये कैसी ||कितने आँधी तूफाँ आते, धूल धूसरित वे कर जाते पल भर में धरती पर अपना ताण्डव नृत्य दिखावे जाते |तेरी घोर गर्जना से सब आँधी तूफाँ हैं



दिल जब से टूट गया

दिल जब से टूट गया हम पे से मोहब्त का सुरूर उतर गया दिल जब से टूट गया , लगता है यू चाँद के पास का सितारा टूट गया वो कल आए रास्ते मे नज़र, तो यू लगा ज़िन्दगी



कविता

निरंतर लगातार सांसो का तना बना इसमें थोड़ा तन और थोड़ा मन का खजाना है हंसती,रोती सूरत दोनों का मुक़्क़मल ज़माना है दोस्तों ,हम सब के पास यही इक तराना है तुम कहि दूर रहते हो, हम कही दूर फिर भी,किस्से कहानी एक दूसरे को सुना ही लेत



राही

विरह मिलन की धूप छाँव में सुख दुःख के डगभरने वालाऔर चढ़ाई उतराई में सदा अथक ही चलने वाला |एक बूँद वाले जलघट में अगम सिन्धु भरने का चाहीधूल धूसरित भूखा प्यासा, कहाँ तेरी मंज़िल ओराही ||सुरभित वन उपवन गिरि कानन, जल खग कूजित झीलोंवालीसमझ रहा जिसको तू मंज़िल, शिलाखण्ड वह मीलो



उलझन

स्वयं में ही उलझी हुई , खोई -खोई सी रहती हूँ ,एकांत और बिलकुल चुपचाप ,नजर कहीं दूर जाके टिक जाती है , आँखों से ओझल ,अनंत पर ा मस्तक में कुछ ,धुंधले तस्वीर आते हैं ,कोई ख्याल बनके ,स्मरण होने लगता है ,कुछ टिश बनके चुभने लगता है ा कहीं



हालात-ए-ज़िन्दगी

मिल जाए जो तेरा साथ, हालात-ए ज़िन्दगी में। वरना ज़नाज़े अक्सर यहाँ, हर पल निकलते हैं1 शख़्सियत में जो लोग, सराबोर हैं तेरे। वो हर शख़्स मिलने की, तमन्ना दिल में रखता है।।2 वफ़ा का नाम लेते हो,सफ़ा न मुँह से कहते हो। तुम तो ऐसे वन्दे हो,जो फ़िजूल बदनाम करते हो।।3मर रहे हैं जो



शक्ति-हींन राम

कल शाम सीता का पति राम गंदी गलियों से गुज़रता चला आया रावण के पास और बोला-- हे रावण !सीता का हाथ थाम और कर मेरे कुछ खाने का इंतज़ाम ........हे रावण ! ऋषि-मुनि भी हमें अब सताते हैं



एकांक मन

हर तरफ सन्नाटा है , कहीं दूर,शायद जंगलो में , एक चुप्पी चीख रही है ,रात अमावश की है ,हर तरफ अँधेरा कायम है ा बादल की आगोश में सितारे भी ,गहरी निद्रा में सो गया है ा पेड़ के नीचे सूखे पत्तों में ,एक अजीब सी सरसराहट है,उसे कोई जगाने क



बलि प्रथा ये ख़त्म हो

रात का है घना अँधेराआँखों में बेचैनी हैनींद गायब हो गयी है लगता जैसे पतझड़ हैदुःख आया जीवन में कैसाहल ना कोई सूझ रहाबुरी यादो ने घेर लिया हैजैसे हो शैतान का डेरापछतावा होता है बहुतअपने किये पापो पेबलि दी थी बकरो की कभीइन हत्यारे हाथो नेनहीं



जल रहा है दीप अबतक

जल रहा है दीप अबतक, जिसको जलाया था कभी तुम ,कपकपाते हाथ तेरे ,जब मुझको छुआ पहली दफा ,बिजली सी मन में कौंध गयी ,जो दर्द छिपा था ह्रदय में ,आँसू बनके वो बह गया ा धुआँ-धुआँ मेरा मन था ,एक चिंगारी तेरे अंदर ,



तुम्हारी मोहबत मे दम कम है

ना कोई कविता है ना कोई ग़ज़ल है भुल गए है जबसे वो हमको दुनियाँ कि भीड़ मे अकेले हम है देखता हु उनको तो यु लगता है ख़ुदा है या आँखों का भरम है लेकिन उनसे अब कैसे मिलु दूर



मेरी बर्बादी

मेरी बर्बादी देख कर हँस रहे थे वो, और उनकी हसीं देख कर बर्बाद हो रहे थे हम.



हम दुर्गा कैसे बने ?

मैं गुड़िया तुम्हारे आँगन की , मैं टुकड़ा तुम्हारे कलेजे की ,पिंजरे में कैद कर मुझको ,दुनिया की सारी खुशियाँ दी ा रक्षक बनाकर पायल को ,मेरे पांव में तुमने बाँधी ,छन -छन पायल की छनकार ,मेरे कानों में शोर मचाती रही ा दहलीज कभी न लांघने दी ,



कहां की नारियों का देवता यशगान करते हैं ?

जगत् में वो जगह है कौन जिसे अभिराम कहते हैं, कहां पर सृष्टि के विज्ञान के सिद्धान्त पलते हैं। बताओ उस जगह को तुम जहां भगवान रहते हैं, कहां की नारियों का देवता यशगान करते हैं।। वो घर होता है घर जिसमें अतिथि सम्मान पाते हैं , जहां पर गाय वायस श्वान भी



मुझे मार के फिर से जिन्दा ना कर

ए ज़िन्दगी और सब कर मगर मुझे और शर्मिन्दा मत कर फरेब कि इस दुनियाँ मे मुझे मार कर , फिर से ज़िन्दा ना कर ना दे कोई ईनाम दे, ना दे कोई दुआ मगर मेरे गम से मेरा दिल हल्का तो क



कचरे में लिपटा बचपन

तिनका -2 ढेर से चुन , झोली में वह डाल रहा ा उस तिनके में है स्वपन स्वर्णिम ,जो धूल धूसरित बालक देख रहा ा हाथ उसके कलम नहीं है लौह -चुम्बक लिए वह घूम रहा ा तिनका -2 ढेर से चुन ,झोली में वह डाल रहा ा भूख से विकल आत्मा ,नयन बसे करुण



वक़्त

एक वक़्त की लहर थी , कुछ इस तरह से आके चला गया ,कभी दामन में खुशियां समेट लाया ,कभी आँसुओं का सैलाब दे चला गया ा मौसम की तरह करवट बदलता है ,कभी बनके वो पतझड़ ,शाख को तन्हा कर जाता है ,कभी खुद ही बादल बन , धरती की प्यास को बुझाता है



महबूब से प्यार शुरू करे

दिल कि धड़कनो ने कहा वो आ जाए तो चलना शुरू करे रात हो जाए , चाँद निकल आए दिल के आसमा पे तो महबूब से प्यार शुरू करे दिल कि हसरतो का मज़मा लगा है



गर्मी और पेड़

धूप तो धूप है इसकी शिकायत कैसी, अबकी बरसात मे कुछ पेड़ लगाना साहब.#निदा फ़ाज़ली की कलम से



प्यार



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