आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x

कविता

कविता से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

दर्पण

बोले टूटकर बिखरा दर्पण, कितना किया कितनों को अर्पण,बेरंगों में रंग बिखेरा, गुनहगारों को किया समर्पण।देखा जैसा, उसको वैसा, उसका रूप दिखाया,रूप-कुरूप बने छैल-छवीले, सबको मैंने सिखाया,घर आया, दीवार सजाया, पर विधना की माया,पड़ूँ फर्श पर टुकड़े होकर, किस्मत में ये लिखाया।चलती है सबकी मनमानी, जिद करने की सब


तेरी ख़ुशी से ही नहीं ...!


होंठ मुस्कुरा रहे हैं

होंठ मुस्कुरा रहे हैं आँखें मगर रिस रही हैं तुझे भूल गया हूँ फिर भी तू याद हैपरछाईं में अपनी तेरा अक़्स ढूँढता हूँ किया बहुत कुछ हासिल मुफ़लिसी फिर भी छाई है पूरे किए सपने सभी ज़िंदगी मगर अधूरी है होंठ हँस रहे हैं मगर २६ मई २०१७जिनेवा


कम्बख्त,इश्क़ में लग गए

"मोहल्ले के लौंडों का प्यार अक्सर इंजीनियर डॉक्टर उठा कर ले जाते हैं।"रांझना फिल्म का ये डॉयलोग तो आपके जेहन में होगा ही।practical life में यानी की असल जिन्दगी में प्यार काफी हद तक ऐसा ही होता है।अब हर लव स्टोरी तो srk की फिल्मों की तरह होती नहीं कि पलट बोला और लड़की पलट ग


वक़्त

हर चीज़ की कीमत तय कर दी, उन लम्हों की कीमत क्या होगी !जो साथ हँसे, जो साथ जिए, उन रिश्तों की कीमत क्या होगी !!क्यूँ भूल गये उस बचपन को, उन नन्ही आँखो के सपनो को !वो कैसे तुम अब पाओगे, जिसकी कोई कीमत ही नहीं !क्यूँ भूल गये उन कसमो को, उन छोटी छोटी सी रस्मो को !वो कैसे तु


वो लम्हे कहाँ फ़ुरसत के

वो लम्हे कहाँ फ़ुरसत के, वो पल कहाँ राहत के !अब इंतेज़ार है और ख़्वाहिश है, वो निशान कहाँ हसरत के !!कभी सबको साथ लेकर चलने की आदत थी दोस्तो !अब ख़बर नहीं कहाँ है, वो फसाने लड़कपन के !!कभी चाहत पे दुनिया का हर जर्रा जर्रा कायम था !मुद्दत हुई


तेरा रंग अभी तक बाकी है

अश्क तो हैं तेरी यादों के, मेरे लिए काफ़ी हैं !कुछ गुज़रे दिन इनके सहारे, गुजर जाएँगे जो बाकी हैं !!तेरी तस्वीर थी जो आँखों में, इसमे अब पानी का रंग शामिल है !ये धुंधली सी हो गयी है, बस अब थोडा सा रंग बाकी है !!म


क़लम

वो क़लम नहीं हो सकती है जो बिकती हो बाज़ारों में ! क़लम वही है जिसकी स्याही, ना फीकी पड़े नादिया की धारों में !! क़लम वो है जो बनती है, संघर्ष के तूफान से ! लिखती है तो बस सिर्फ़ मानवता क़ी ज़ुबान से !! क़लम चाकू नहीं खंज़र नहीं, क़लम तलवार है ! सत्यमेव ज्यते ही इस


1. मेरी एक कविता : फागुन में आया चुनाव

1. फागुन में आया चुनावफागुन में आया चुनावभजो रे मन हरे हरेकौए करें काँव काँवभजो रे मन हरे हरे.पाँच साल पर साजन आयेगेंद फूल गले लटकायेइनके गजब हावभावभजो रे मन हरे हरे.मुंह उठाये भटक रहे हैंहर दर माथा पटक रहे हैंसूज गए मुंह पाँवभजो रे मन हरे हरे.बालम वादे बाँट रहे हैं


भारतीय

मिट गयीं वो हस्तियाँ,और उनकी बस्तियाजो मिटाने के लिए, हमे आई हैंथम गयीं वो आँधियाँ,बुझ गयीं वो बातियाजो जलाने के लिए, हमे आई हैंकट गये वो कर,झुक गये वो सरजो झुकने के लिए, हमे आए हैं– कुँवर दीपक रावत


बदनाम

कुछ खत मेरे नाम, बेनाम चले आएहम आज तेरी महफ़िल से, गुमनाम चले आएकुछ वक़्त तेरे साथ, कुछ लम्हे तेरे नामतेरी दोस्ती की गफलत में, हर शाम चले आएनाचीज़ समझते हो, बड़े शौक से समझोफिर भी मेरे नाम, कुछ इल्ज़ाम चले आए


साधक

मूक क़लम को साधकरभावनाए बाँधकरहोठों पे गुनगुनाते हुयेआधे अधूरे से गीतों कोरात के अँधेरे मेंदीपक के प्रकाश सेवह लिख रहा होगावह लिख रहा होगा- कुँवर दीपक रावत


इबादत

जलते हुए शोलों से दोस्ती कर ली ! खुद खाक होने की, साज़िश कर ली !! इन सर्द बर्फ़ीली हवाओं में, वो बात कहाँ ! एक धूप की ख्वाहिश में, रोशनी कर ली !! तेरे दामन में, या मेरे आशियाने में ! एक बूँद की चाहत में, बारिश कर ली !! वो तो नहीं हुआ जो, दिल की आरज़ू थी ! हर शाम


अंदाज़ शायराना

कहते हैं कुछ लोग की, ये अंदाज़ शायराना है ! कहते हैं हम की, अब ठीक से पहचाना है !! दिल की तन्हाई का, अब तो ये ही अफ़साना है ! कहते हो फिर क्यूँ के, ये तो बस बहाना है !! फिर वही दिन, वही रोशनी, वही आसमा है ! जाने क्यूँ फिर भी यहाँ, कुछ तो विराना है !! वो मोहब्बत कहाँ


प्यारी माँ

काश तुम थोड़ा और ठहर जातीकाश मैं कुछ पहले समझ पातीकाश न निभाई होती फ़िज़ूल की सामाजिक रस्में मैंने और काश तुमने भी हर बार न समझ करमेरी परिस्तिथी को, थोड़ा ज़िद करमुझें बुलाया होता,तुम तो बड़ी थी पता तो होगा तुमकोकी तुम्हारे बाद तुम्हारा ख्याल जब जबआएगा न जाने कितनें खोएं लम


माँ भारती

जिसकी मिट्टी में ममता है, आँचल प्यार का साया है ! प्रेम प्यार से सनी हुई, जिसकी अद्भुत छाया है !! यहीं आके हमको चैन मिले , यह कैसी तेरी माया है ! हम धन्य हुए माँ, प्यार तेरा हमने पाया है !! हर पल हर छन तूने, हमारा साथ निभाया है ! हम धन्य हुए तूने , हमको सीने से लगाया


तुम्हारा ख़याल

सच है की तुमसे है ज़्यादा,तुम्हारा ख़्याल ख़ूबसूरत क्यूँकि इसमें हक़ीक़त के दाग़ों का शुमार नहींढल जाता है ये मेरी पसंद से …घंटो बैठता है मेरे नज़दीक ये मेरी आँखों में आँखें डाल, पकड़ कर मेरे हाथो कोदे जाता है गरमाहटठंडी अकेली शामों में अक्सर…मेरी उदासियों का गवाह बनकेचुपचाप रहता है नज़दीक मेरे बिना


हर कदम प्यास है

सूखी नदी सा मन उदास है .सदी - साआकाशबादल बिन नंगा है यमुनापियराई - सी मैली - सी गंगा है आँखों मेंपतझड़ हैराहों मेंधूल हैबागों में बच गएबेर और बबूल हैं. हर घाट बदहवास है .--- डॉ. हरेश्वर राय


मशाल बुझी हुई है ....

मशाल बुझी हुई है .... कोई फूल मुरझाये आपको क्या ?कोई पत्थर पर चढ़ जाए आपको क्या ?क्या कोई इंसान भी जिन्दा है यहाँचाँद पर जाने से जैसे चाँद भी पत्थर हो गया ...चांदनी हो गई उजाला ...माफ़ करना मेरे दोस्त !यहाँ पर कोई तुम्हारी उम्मीद सुनने नहीं आये हैसपने तो ‘पाश’ के समय में भी मरते थेआज सपनों के साथ इन्स


जुगनू हुई तनहाई

मन ठूँठ परआस केपात आये.जेठ की गई तपनसावन की पुरवाई आईतन अगस्त्य का फूल हुआसूखे पैरों की गई बिवाईबाग़ केउड़े तोतेहाथ आये.मन पुरइन का पात बनाजुगनू हुई तनहाईहोंठ फाग केगीत हुएआँखें हुईंअमराईहासपरिहास केपरात आये.---- डॉ. हरेश्वर राय


आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x