आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]
x
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस

कविता

कविता से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

तेरी यादो में कई सालो से सोया नहीं हूँ

तेरी यादो में कई सालो से सोया नहीं हूँ कोई ऐसा पल नहीं जब रोया नहीं हूँ क्यू धधकती हो आग सी इस डूबे सैलाब में लौ सी जलती रहती हो इस बुझदिल इंसान में क्यू बिताये थे संग जिंदगी के अनगिनत हिस्से आज भी भौरे की तरह गूंजते है वो किस्से कोई ऐसी रात नहीं जब उन किस्सो में खोया


तेरे प्यार के बही-खाते... #ज़हन

जुबां का वायदा किया तूनेकच्चा हिसाब मान लिया मैंने,कहाँ है बातों से जादू टोना करने वाले?तेरी कमली का मज़ाक उड़ा रहे दुनियावाले... रोज़ लानत देकर जाते,तेरे प्यार के बही-खाते...तेरी राख के बदले समंदर से सीपी मोल ली,सुकून की एक नींद को अपनी 3 यादें तोल दी।इस से अच्छा तो बेवफा हो जाते,कहीं ज़िंदा होने के मि


भस्मासुर गा रहा है

एक देश में कई देश देखालाइन में खड़ा दरवेश देखाजड़ खोदकर फल इतरा रहा हैकिसकी ज़मीन खा रहा हैभस्मासुर गा रहा हैगंगाजल बेचकरनमामि गंगे गा रहा हैलक्ष्मी के दरबार मेंश्रीहीनता का दौर हैदिवंगत धन के बोझ सेनिजात पा कर पेट खाली हैदुरभिसंधि की जुगा


वक्त हिसाब लेता है

कहते है वक्त भी करवट लेता हैकभी घूरे के दिन भी फिरते हैलोग पके आम की तरह गिरते हैंकाले बादल भी घिरते हैकभी -कभी समय चोट देता हैऔर वक्त हिसाब भी लेता हैपाँव तले ज़मीन खिसकती हैजिंदगी गुमनाम सिसकती हैवक्त के मार खाये हमसफ़रइस वक्त से फरियाद न करयाद रखना कभी कभी वक्तयूँ ही मुट्ठी में आ जाता हैवक्त के जख्


करो वंदना स्वीकार प्रभो

करो वंदना स्वीकार प्रभोवासना से मुक्त हो मन, हो भक्ति का संचार प्रभोजग दलदल के बंधन टूटे हो भक्तिमय संसार प्रभो ॥वाणासुर को त्रिभुवन सौपा चरणों में किया नमस्कार प्रभोभक्तो पर निज दृष्टि रखना करुणा बरसे करतार प्रभो ॥कण-२ में विद्धमान हो नाथ तुम निराकार साकार प्रभोदानी हो सब कुछ दे देते


लड़की देखन आये लड़का वाले

लड़की देखन आय रहे, लड़का वाले लोग,दादी के पकवानों का, लगा रहे सब भोग.सबसे पहले केरी के, शरबत की तरावट,पनीर टिक्का चटपटा, दूर करे थकावट.फिर आया मशरूम संग, मटर भरा समोसाथोड़ी देर में दादी ने, परसा मद्रासी डोसा.पेट भरा पर जीभ तो, मांगे थोड़ा और,डिनर में व्यंजनों का, फिर चला इक दौर.भरवां भिंडी संग लगी, मिस्


2. मेरी एक कविता: मेरे गांव का पप्पू

२. मेरे गांव का पप्पू असरदार हो गयामेरे गाॅंव का पप्पू।मुश्किल से इंटर कियाबी.ए. हो गया फेलरमकलिया के रेप केस मेंचला गया फिर जेलरंगदार हो गयामेरे गाॅंव का पप्पू।नेताकट कुर्ता पाजामामाथे पगड़ी लालमुंह में मीठा पान दबायेचले गजब की चालठेकेदार हो गयामेरे गांव का पप्पू। प


1. मेरी एक कविता : फागुन में आया चुनाव

1. फागुन में आया चुनावफागुन में आया चुनावभजो रे मन हरे हरेकौए करें काँव काँवभजो रे मन हरे हरे.पाँच साल पर साजन आयेगेंद फूल गले लटकायेइनके गजब हावभावभजो रे मन हरे हरे.मुंह उठाये भटक रहे हैंहर दर माथा पटक रहे हैंसूज गए मुंह पाँवभजो रे मन हरे हरे.बालम वादे बाँट रहे हैं


1. मेरी कविता - मेरे गांव का पप्पू

1. मेरे गांव का पप्पू असरदार हो गयामेरे गाॅंव का पप्पू।मुश्किल से इंटर कियाबी.ए. हो गया फेलरमकलिया के रेप केस मेंचला गया फिर जेलरंगदार हो गयामेरे गाॅंव का पप्पू।नेताकट कुर्ता पाजामामाथे पगड़ी लालमुंह में मीठा पान दबायेचले गजब की चालठेकेदार


सामने ही सवेरा था

वो रात घनी थी, चारों तरफ़ अंधेरा था निराशा की सर्द स्याही​ में, रास्ता घनेरा था वक्त के बेदर्द थपेड़ों से, बिख़रा मेरा बसेरा था ना बिखरे मेरे सपने, ना टूटा मेरा हौसला समेटकर अपने अरमानों के शीशे, मैं चल


चर्चा कार

 करते हैं बैठ चर्चा, खाली ये जब भी होते, कोई काम इनको करते मैने कभी न देखा. ................................................... वो उसके साथ आती, उसके ही साथ जाती, गर्दन उठा घुमाकर बस इतना सबने देखा. .............................................


अंतिम यात्रा

अंतिम यात्रा, भाग -१किसी की चूड़ियाँ टूटेंगी,कुछ की उम्मीदे मुझसेविदा लेगी रूह जबमुस्करा कर मुझसेकितनी बार बुलाने भी जोरिश्ते नहीं आयेदौड़ते चले आएंगे वो तब आँशु बहायेकितने आँशु गिरेंगे तबजिस्म पर मेरेरुख्सती में सब खड़े होंगे मेरी मिटटी को घेरे ||अंतिम बार फिर नहलाया जायेगाबाद सजाया जायेगाअंतिम दर्श


ताकता बचपन .

अब वो नमी नहीं रही इन आँखों में शायद दिल की कराह अब,रिसती नही इनके ज़रिये या कि सूख गए छोड़पीछे अपने  नमक और खूनक्यूँ कि अब कलियों बेतहाशा रौंदी जा रही हैं क्यूंकि फूल हमारे जो कल दे इसी बगिया को खुशबू अपनी करते गुलज़ार ,वो हो रहे हैं तार तार क्यूंकि हम सिर्फ गन्दी? और बेहद नीच एक सोच के तले दफ़न हुए जा


कलाकार

कभी हाथों से से मिट्टी को तरासते,तो कभी पत्थरों को नए रूप में गढ़ते,कभी रंगों से कागज पर नयी दुनिया बसाते,या फिर मधुर संगीत की लहरी में हमें डुबाते,हैं तो वो आम हम सब के जैसे, पर लगें हम सबसेभिन्न हैं


रातों में नींद तुम्हें भी कहाँ आती होगी

रातों में नींद तुम्हें भी कहाँ आती होगी बंद करते होगे जब भी आँखें तस्वीर हमारी ही नज़र आती होगी महफ़िलों में हँस के मिलते होगे सबसे नज़रें मगर हमें ही ढूँढती होंगी क़द्रदानों के ख़त रोज़ पढ़ती होगी लिफ़ाफ़ा, मगर, हमारे नाम का ही ढूँढती होगी राह में मिलते होंगे साथी बहुतनज़रें, हर मोड़ पर मगर, हमें ह


यही काफ़ी है

रहते हैं दूर इसका मतलब नहीं की दिलो के बीच दूरियाँ हैं नज़दीक रह कर भी कई बार दिलों के फ़ासले कम नहीं होते हो नहीं तुम नज़रों के सामनेतो कोई बात नहींदुआओँ में हमारी रहोगे सदा ना हो रोज़ बात, तो कोई शिकवा नहींजब भी होती है तो मिलता है सुकून, यही काफ़ी है १३ मार्च २०१७जिनेवा


मेरे हाथों की लकीरों में तू ना सही

मेरे हाथों की लकीरों में तू ना सही मेरे ख़यालों में रहेगी सदा मेरी ज़ुबान पर तेरा नाम ना सही मेरे अहसास में तू रहेगी सदा मेरे दिल में तेरी तस्वीर ना सहीमेरे ख़्वाबों में तू रहेगी सदा मेरी क़िस्मत तुझ से जुड़ी ना सही मेरी ज़िंदगी तुझ से जुड़ी रहेगी सदा ३ मार्च २०१७जिनेवा


ढूँढते हैं

जो ढूँढते थे हमसे मिलने के बहाने वो आज बिछड़ने के तरीक़े ढूँढते हैं बैठे रहते जो पहरों डाल आँखों में आँख वो आज आँखें चुराने के बहाने ढूँढते हैंहाथ पकड़ हमारा, चलते थे मीलों जो वो आज हाथ छुड़ाने के बहाने ढूँढते हैं दूर जाने के ख़याल से जो घबरा जाते थे वो आज दूर रहने के बहाने ढूँढते हैंसाथ जीने मरने क


ऐसी मेरी एक बहना है

ऐसी मेरी एक बहना हैनन्ही छोटी सी चुलबुल सीघर आँगन मे वो बुलबुल सीफूलो सी जिसकी मुस्कान हैजिसके अस्तित्व से घर मे जान हैउसके बारे मे क्या लिखूवो खुद ही एक पहचान हैमै चरण पदिक हू अगर वो हीरो जड़ा एक गहना हैऐसी मेरी एक .बहना है………..कितनी खुशिया थी उस पल मेजब साथ-२ हम खेला करतेछोटी छोटी सी नाराजीतो कभी


फूल.....

कितना दर्द सहते हो तुम फूल ,कांटों मे भी मुस्कुराते हो तुम फूल ,महक से दिलों में खुशी लाते तुम फूल ,प्रक्रुति को अपने रंगों से, किसी नई दुल्हन सी सजाते तुम फूल । ॥1॥चाहे आए गर्मी जाड़ा या तूफ़ान कोई ,न तुम लडखड़ाते हो ,भौंरे तितली चुसे तुमको ,फिर भी प्यार उन पर लुटाते हो


आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]
x
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस