कविता



गुरु वन्दना

मेरे समस्त स्नेही पाठकवृन्द को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं --- तुम कृपासिन्धु विशाल , गुरुवर ! मैं अज्ञानी , मूढ़ , वाचाल गुरूवर ! पाकर आत्मज्ञान बिसराया .छल गयी मुझको जग की माया ;मिथ्यासक्ति में डूब -डूब हुआ अंतर्मन बेहाल , गुरुवर ! तुम्हारी कृपा का अवलंबन , पाया अ



मेरे जनक तुम्हारी स्मृति

मित्रों, आजअपने जन्मदिन के अवसर पर अत्यन्त स्नेहशील और पूरी तरह से केयर करने वाले पति डॉ.दिनेश शर्मा, प्यारी बिटिया स्वस्ति श्री और उसके पति जीत के साथ साथ ढेर सारेमित्रों ने भी हार्दिक शुभकामनाएँ दीं | सभी का बहुत बहुत धन्यवाद | पर इतने लोगोंका प्यार और साथ मिलने के बाद भी न जाने क्यों पिताजी का अभ



इन्द्रधनुष ऐसा लगता है

रात दिन चौबीस घंटे बरखा रानी अपनी सखी दमयन्तीदेवी की स्वर्णिम पायल झंकारती सखा मेघराज के मृदंग की थाप पर रिमझिम का गानसुनाती मस्त पवन के साथ मादक नृत्य दिखाती हो – लेकिन इसी बीच शाम को उनकी सखी धवलधूप इन्द्रधनुष का बाण चढ़ाए कुछ पलों के लिए उपस्थित हो जाएँ – और अपनी सखी बरखासे मिलकर वापस लौट जाएँ बरख



कहानी कागज की

📖 कहानी कागज की 📖📰📰📰📰📰📰📰📰रद्दी बही - मैगजीन - अखबारों को कूट - काटबनी 'लुगदी' से चमक- दमक उभर मैं आता हूँचाहने वालों के रंग में सहज हीं रंग जाता हूँ'उकेरी लकिरों' से कवियों का मन पढ़ पाता हूँशास्त्र कहें या पुस्तक,पुस्तकालयों में सज जाता हूँ'भोज पत्र' अब दुर्लभ,मैं हीं सबका मन बहलाता हूँन



इस बिछड़न हम कोई गीत लिख दे

इस बिछडन हम कोई गीत लिख दे या लिख दे हम अपनी दुःख भरी कहानी दिन बीते नहीं रतियन कटे नहीं एक अखियन से दूजे अखियन में बहे पानी भूल भुलाने को दिल को बहलाने कोयहाँ कितने खिलौने है दिल को हरसाने को पर तोहरे बिना न जियरा हमरा लागीइन पलकों पर अब कोई ख्वाब नहीं



चीन मरेगा तूं अपने मरण

चीन तूं मरेगा अपनी मरण★★☆★★☆★★☆★★☆★★ खुदा का वज़ूद तुम सरयाम नकारते हो!ज़हर इज़ाद कर सबको तुम मारते हो!!हवस इतनी की पैसा अब उछालते हो!दोज़ख़ की राह पे अपनों को डालते हो!!तुम्हारा मुक़ाम जा तुझे आज पुकारता है!दुनिया का हर इंसान तुझे ललकारता है!!नाम तेरा जेहादियों के साथ मिट जाएगा!हर सख़्स कहर बन तुझे निग



चीन तूं मरेगा अपनी मरण

चीन तूं मरेगा अपनी मरण★★☆★★☆★★☆★★☆★★ खुदा का वज़ूद तुम सरयाम नकारते हो!ज़हर इज़ाद कर सबको तुम मारते हो!!हवस इतनी की पैसा अब उछालते हो!दोज़ख़ की राह पे अपनों को डालते हो!!तुम्हारा मुक़ाम जा तुझे आज पुकारता है!दुनिया का हर इंसान तुझे ललकारता है!!नाम तेरा जेहादियों के साथ मिट जाएगा!हर सख़्स कहर बन तुझे निग



राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस

💐💐राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस💐💐भारत का डॉक्टर हार रहा-हुआ हताशकवि अश्रु बहा थकित-हो रहा निराश''कोभिड'' फटेहाल देख डॉक्टर कोआगोश में समेट कहीं छुप जाता हैघर में बने 'मास्क' पहन क्या (?) कोईकोभिड संक्रमण से क्या बच पाता हैपैदल चल कर आखीर कैसे डॉक्टर५लाख पार खाने वाले को-मार भगा पाएगापहुँच रहा आँकड़



माँ का आँचल

जीवन मेंअनगिनती पल ऐसे आते हैं जब माता पिता की याद अनायास ही मुस्कुराने को विवश कर देतीहै | ऐसा ही कुछ कभी कभी हमारे साथ भी होता है | माँ क्या होती है – इसके लिए तोवास्तव में शब्द ही नहीं मिल पाते | माँ की जब याद आती है तो बस इतना ही मन करताहै: माँ तेरी गोदीमें सर रख सो जाऊँ मैं पल भर को, तो लोरी तू



मिथिला

मिश्री जैसी मधुर है हमारी बोली हम प्रेमी पान मखान और आम के भगवती भी जहाँ अवतरित हुईं हम वासी हैं उस मिथिला धाम के संतानों को जगाने मिथिला की माएँ सूर्योदय से पूर्व गाती हैं प्रभाती सुनाकर कहानियाँ ज्ञानवर्धक मिथिला की दादी बच्चों को सुलाती प्रतिभा जन्म लेती है यहाँ पर कला और सौंदर्य का संसार है दिखत



ग्लास को नीचे रख दीजिये हिंदी और अंग्रेजी मे

आज का प्रेरक प्रसंग ग्लास को नीचे रख दीजिये-------------------------------------------------एक प्रोफ़ेसर ने अपने हाथ में पानी से भरा एक Glass पकड़ते हुए Class शुरू की . उन्होंने उसे ऊपर उठा कर सभी Students को दिखाया और पूछा , ” आपके हिसाब से Glass का वज़न कितना होगा?” ’50gm….100gm…125



मेघ इठलाए रहे हैं

बरखा की सुहानी रुत में मेघों की बात न हो, उनकी प्रिय सखी दमयन्ती की बात न हो, प्रकृति के कण को में व्याप्त मादकता की बात न हो -ऐसा तो सम्भव ही नहीं... निश्चित रूप से कोई योगी या कोई विरह वियोगी ही होगा जोइस सबकी मादकता से अछूता रह जाएगा... तो प्रस्तुत है हमारी आज की रचना "मेघइठलाए रहे हैं"... सुनने



क़िस्सा गिलहरी और कोरोना का - दिनेश डाक्टर

फुदकती फुदकतीमेरी खिड़की परफिर आ बैठी गिलहरीछोटी सी लीची कोकुतर कुतर छीलाफिर मुझसे पूछाक्या हुआ सब खैरियत तो हैदेखती हूँ कई महीनों सेकैद हो महज घर में न बाहर जाते होन किसी को बुलाते होबस उलझे उलझे उदास नज़र आते हो ? मैंने देखा उसकीचौकन्नी आंखों कोसफेद भूरीचमकती धारियों कोछोटे छोटे सुंदर पंजो कोपल पल ल



मास्क स्तुति

कामदं मोक्षदं चैवॐकाराय नमो नमः🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏आज की है यही एक पुकारलबों से चिपकाओ बार- बारजरुरत हो तो लगा कर जाओजो भी शुद्ध मिले घर में खाओधूप में टाँग- रोजाना चमकाओमिस किए तो रुमाल लटकाओचाइनिज-प्लेट है, अभी हटाओ मास्क पहन कर अबकी आओडॉ. कवि कुमार निर्मल



माँ का व्रत

पूर्णिमा " तुम एक ही हफ्ते भर में चार दिन भूखी रह जाओगी, तो शरीर में ना मांस बचेगी ना खून " , हमेशा की तरह फिर से पिता जी ने भृकुटि को सिकोड़कर अपने पौरुषेय शैली में मां पर गुस्सा निकालना शुरु किया. "अगर दिन रात मैं खट कर तुम लोगों को मन पसंद खाना खिला सकती हूं, घर का



सपने वो होते हें!

सपने वो होते हें!जो सोने नही देते !! और अपने वो होते है ! जो रोने नही देते !! प्यार इंसान से करो उसकी आदत से नही रुठो उनकी बातो से मगर उनसे नही... भुलो उनकी गलतीया पर उन्हें नही क्योकि रिश्तों से बढकर कुछ भी नहीं।।



सच्ची कहानी मन की

🌺सच्ची कहानी मन की🌺नानी- दादी- माँ की कहानी सुन कर हीं,नींद कभी आती थीसपनों में कहानी हुबहू फिर आ कर हिया बहलाती थीपाठशाला के मेरे पण्डित जी मनहर-कहानी सुनाते थेविद्यालय के शिक्षक कहानी की अलग घंटी लगाते थेमाँ जब व्रत करती तो बैठा पौराणिक-कथा सुनाती थीपुस्तकालयों से बहना कहानी की पुस्तकें हीं लाती



जेठ की चिलचिलाती धूप

अभी बाहर बड़े अच्छे से आषाढ़ की बारिश हो रही है – आषाढ़ – जो अभीऔर सप्ताह के बाद समाप्त हो जाएगा और श्रावण माह का आरम्भ हो जाएगा झमाझम बारिश केसाथ | पेड़ पौधों से झरती बरखा की बूँदें सुरीला राग छेड़ती तन मन को गुदगुदा रहीहैं | अभी पिछले दिनों ज्येष्ठ माह में जब चिलचिलाती धूप ने सबको बेहाल किया हुआथा तब ह



भक्ति सर्वश्रेष्ठ धन है

भक्ति सर्वश्रेष्ठ धन🌹🌹🌹🌹🌹🌹मन है अति चंचल,आलोढ़ित चितवन,मन तो आखिर है मन-डोलेगा हीं, वो डोलेगामन अति आह्लादित-नयन हैं अश्रुप्लावितएक को ठहरा कर हीं-दूजा कुछ बोलेगाप्रसव-पीड़ा के आँसूजन्म के आँसूसुख के आँसूदुख के आँसूप्रतारणा के आँसूपठन-पाठन के आँसूधुयें के आँसूंप्रेम के आँसूभक्ति के आँसूआसक्ति



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