कविता



नव सम्वत्सर की हार्दिक शुभकामनाएँ

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तुनिरामयाःसर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चितदुःखभाग्भवेत।।भारतीय वांगमय में सदा सबके कल्याणकी कामना की गई है | उसे ही सार्वभौम मानव धर्म माना गया है | प्रार्थना की गई हैकि सभी प्रसन्न रहे, सभी नीरोगी रहें, सभी के समस्त कर्म सिद्ध हों, किसी को भीकिसी प्रकार का कष्ट न मिले..



सीखना होगा

नमस्कारमित्रों, स्वागत है आज फिर से आप सबका हमारेकार्यक्रम “कुछ दिल से - मेरी बातें” में... अभी तेरह अप्रैल से माँ भगवती कीउपासना का पर्व नवरात्र आरम्भ होने जा रहे हैं... नवरात्र... जिसमें पूजा अर्चनाकी जाती है शक्ति की... इस अवसर प्रायः प्रत्येक घर में बहुत ही श्रद्धाभाव सेदेवी के नौ रूपों की उपासन



पश्चाताप

तुम कहते हो करूँ पश्चताप,कि जीवन के प्रति रहा आकर्षित ,अनगिनत वासनाओं से आसक्ति की ,मन के पीछे भागा , कभी तन के पीछे भागा ,कभी कम की चिंता तो कभी धन की भक्ति की। करूँ पश्चाताप कि शक्ति के पीछे रहा आसक्त ,कभी अनिरा से दूरी , कभी मदिरा की मज़बूरी ,कभी लोभ कभी भोग तो कभी म



राग रंग में रंगा मिलन का त्यौहार

22 मार्च को WOW India की ओर से डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म ज़ूम पररंगोत्सव मनाने के लिए एक काव्य सन्ध्या का आयोजन किया गया... जिसमें बड़े उत्साहसे सदस्यों ने भाग लिया... कार्यक्रम की अध्यक्षता की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रमासिंह ने और संचालन किया WOW India की Cultural Secretary लीना जैन ने... सभी कवयित्रियों के काव



जिससे यह तन मन रंग जाए

22 मार्च को WOW India की ओर से डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म ज़ूम पररंगोत्सव मनाने के लिए एक काव्य सन्ध्या का आयोजन किया गया... जिसमें बड़े उत्साहसे सदस्यों ने भाग लिया... कार्यक्रम की अध्यक्षता की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रमासिंह ने और संचालन किया WOW India की Cultural Secretary लीना जैन ने... सभी कवयित्रियों के काव



शायरी

शाख से है रंग उड़ा मन है बेरंग सा होंठ पर है धूप खिला दर्द ने है आह भरा रंग पर जब रंग चढ़ा रूह से आवाज़ आई ये ज़िन्दगी है आयशा ये भी ज़िन्दगी है क्या



होली है हुडदंग मचा लो

आज सभी रंगों से होली खेल रहे हैं... होली... जो पर्व हैरंगों का... रूठे हुओं को मनाने का... मन की सारी नकारात्मकता होलिका के साथ दहनकरके सकारात्मकता के रंगों से होली खेलने का... मेल मिलाप का... हमारे अपनेकार्यक्रम “मेरी बातें” में आप सभी का स्वागत है... होली के हुडदंग के साथ... प्रस्तुतहैं कुछ पंक्ति



शहीद दिवस

🇮🇳🇮🇳☆शहीद दिवस☆🇮🇳🇮🇳चित्तौड़ का वीर- राणा प्रतापअब यहाँ कहाँ है?झाँसी की रानी- लक्ष्मी बाईअब यहाँ कहाँ है??क्षत्रपति शिवाजी कीलपलपाती वह तलवार कहाँ है?असली आजादी का जुनूनठंढा हो छुप गया कहाँ है?? शहिद दिवस पर श्रद्धांजलिमिल कर सब देते रहना।'राजनीतिक आजादी' कोझंडा फहराते तुम रहना।।"सहोदर भाई"



दो मुट्ठी

एक हाथ की मुट्ठी खुली हुई है दूसरी मुट्ठी बंद है जो मुट्ठी खुली हुई है , वह खाली है इसने संजोकर कुछ भी नहीं रखा न आँसू न गम न एहसास न जज्बात जो भी मिला थोड़ा थोड़ा सब में बाँट दिया और जो खुद से भी लिखा पढ़ा नहीं गया वह दिल में दफ़न



तुमको काली भी बनना है।

मारीच संग मिल रावण ने मायाजाल बिछाया था स्वर्ण मृग का भेष बदल सीता को ललचाया था राम के क्षत होने का उसने स्वांग रचाया था विप्र बन छल से सीता को लक्ष्मण-रेखा पार कराया था वर्तमान में भी रावण जैसे कपटी पाए जाते है स्वर्ण मृग और साधु बन सीता को हर ले जाते है इन कपटियो के



बिटिया दूजे घर है जानी

बिटियादूजे घर है जानीसमय पंख लगाकर उड़ता चला जाता है | कल एक फुट की नन्हीसी कली गोद में दी डॉक्टर ने तब सब कुछ जानते हुए भी सोचा नहीं था कि कभी इसे पराएघर भी जाना होगा... जो सत्य है जीवन का... बेटियाँ योग्य पति के साथ विवाह करकेअपनी स्वयं की गृहस्थी बसाएँ और प्रसन्न एवं सुखी रहे यही हर माता पिता की क



मन पाखी की उड़ान - प्रेम कविता

मन पाखी की उड़ान तुम्हीं संग मन मीता जीवन का सम्बल तुम एक भरते प्रेम घट रीता !नित निहारें नैन चकोर ना नज़र में कोई दूजा हो तरल बह जाऊं आज सुन मीठे बैन प्रीता ! बाहर पतझड़ लाख चिर बसंत तुम मनके सदा गाऊँ तुम्हारे गीत भर - भर भाव पुनीता ! बिन देखे रूह बेचैन हर दिन राह निहारे लगे बरस पल एक



काव्य संध्या

प्रिय सदस्यों, WOW India आठ मार्च को डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म Zoom पर AwardCeremony और रंगारंग कार्यक्रम के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय महिलादिवस का आयोजन करने जा रहा है | इसी उपलक्ष्य में आज यानी शुक्रवार 5 मार्च को सायं तीन बजे से एक काव्य सन्ध्या का आयोजन हम लोगों ने किया...जिसकी अध्यक्षता की वरिष्ठ साहित्य



बसंतागमन

🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 वसंत ऋतु की पहली कोपल 🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱नैसर्गिक बीज एक नील गगन से-पहला जब वसुन्धरा पर आ टपका।मिट्टी की नमी से सिंचित हो वह-ध्रुतगति से पनप खिल कर महका।।🌾🌾🌾🌾🌾🌱🌾🌾🌾🌾🌾सूर्य उर्जा से अवशोषित उष्णतामिट्टी से अंत-शोषण- पोषण- संचय।प्रथम अंकुरण पा कर बड़भागीकोपल फुटी



आदमी का आदमी होना बड़ा दुश्वार है

सत्य का पालन करना श्रेयकर है। घमंडी होना, गुस्सा करना, दूसरे को नीचा दिखाना , ईर्ष्या करना आदि को निंदनीय माना गया है। जबकि चापलूसी करना , आत्मप्रशंसा में मुग्ध रहना आदि को घृणित कहा जाता है। लेकिन जीवन में इन आदर्शों का पालन कितने लोग कर पाते हैं? कितने लोग ईमानदार, शां



जीवन की रामकहानी

जीवन और मरण निरन्तर चलती रहने वाली प्रक्रियाएँ हैं... मरण के बाद भी जीवनकी रामकहानी समाप्त नहीं होने पाती... किसी नवीन रूप में फिर से आगे बढ़ चलती है...यही है संहार और निर्माण की सतत चलती रहने वाली प्रक्रिया... इसी प्रकार के उलझेसुलझे से विचारों से युक्त है हमारी आज की रचना... अभी शेष है... कितने ही



पथ मंज़िल का

मंज़िल की तलाश में जब व्यक्तिनिकलता है तो आवश्यक नहीं कि उसका लक्ष्य उसे सरलता से प्राप्त हो जाए... कभी कभीतो बहुत अधिक प्रयास करना पड़ता है... कई बार यही नहीं मालूम होता कि किस मार्ग सेआगे बढ़ा जाए... लेकिन एक सत्य यह भी है कि मार्ग में यदि बाधाएँ होती हैं... आड़ेतिरछे मोड़ होते हैं... तो वहीं कुछ न कुछ



प्रेम सुधा

हम सभी प्रायःअनन्त की बातें करते हैं,असम की बातें करते हैं, नवग्रहों और नवधा भक्ति आदि की बहुतसी दार्शनिक बातें करते हैं... मोक्ष की बातें करते हैं... लेकिन हम समझते हैं जिसदिन हमने समस्त चराचर में अपने दर्शन कर लिए... सबके साथ समभाव हो गए... उस दिनहमें कुछ भी बाहर खोजना नहीं पड़ेगा... उस दिन हम स्वय



मंजिल का अवसान नहीं

एक व्यक्ति के जीवन में उसकी ईक्क्षानुसार घटनाएँ प्रतिफलित नहीं होती , बल्कि घटनाओं को प्रतिफलित करने के लिए प्रयास करने पड़ते हैं। समयानुसार झुकना पड़ता है । परिस्थिति के अनुसार ढ़लना पड़ता है । उपाय के रास्ते अक्सर दृष्टिकोण के परिवर्तित होने पर दृष्टिगोचित होने लगते हैं।



ईश्वर का प्रमाण

मानव ईश्वर को पूरी दुनिया में ढूँढता फिरता है । ईश्वर का प्रमाण चाहता है, पर प्रमाण मिल नहीं पाता। ये ठीक वैसे हीं है जैसे कि मछली सागर का प्रमाण मांगे, पंछी आकाश का और दिया रोशनी का प्रकाश का। दरअसल मछली के लिए सागर का प्रमाण पाना बड़ा मुश्



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