कविता



कान्हां आयो

कान्हां आयोकृष्ण मथुरा जमुना पार आयोगोकुल जा बहुत रे धूम मचायोसथियन संग सारो माखन चुरा खायोगइयन को सारे दिन गोपाल चरायोबांसुरियां धुन सुन जग बउरायोगोपियन को प्यारो बहोत भायोदेवकी माता को कन्हिया जायोयशोदा पलना डाल झुलायोकालिया नाग को मार भगायोगोबरधन उठा इंद्र को हरायोमामा कंस को बहुत डरायोपूतना क



वंशी की वह मधुर ध्वनि

वंशी की वह मधुर ध्वनि... जी हाँ, यदि हम अपने चारों ओरकी ध्वनियों से – चारों ओर के कोलाहल से मुक्त करके मौन का साधन करते हुए अपनेभीतर झाँकने का प्रयास करें तो कान्हा की वह लौकिक दिव्य ध्वनि हमारे मन में गूँजसकती है... ऐसी कुछ उलझी सुलझी भावनाओं के साथ आज स्मार्तों और कल वैष्णवों कीश्री कृष्ण जयन्ती क



सागर की लहरें....

सागर की लहरें...सागर की लहरें किनारे से बार-बार टकरातीचीखती उफान मारती रह-रहकर इतरातीमन की बेचैनी विह्वलता साफ झलकतीसदियों से जीवन की व्यथा रही छिपाती पर किनारे पहुँचते ही शांत सी हो जातीवह अनकही बात बिना कहे लौट जातीअपने स्पर्श से मन आल्हादित कर जातीसंग खेलने के लिए उत्साहित हो उकसातीजैसे ही हाथ बढ़



रात बेखबर चुपचाप सी है

रात बेखबर चुपचाप सी है आओ मैं तुम्हे तुमसे रूबरू करवाउंगी मेरे डायरी में लिखे हर एक नज्म के किरदार से मिलाऊँगी मैं तुम्हे बतलाऊँगी की जब तुम नहीं थे फिर भी तुम थे जब कभी कभी दर्द आँखों से टपक जाती थी ..... कागजों पर एक बेरंग तस्वी



कोविड की तानाशाही...

कोविड की तानाशाहीहम कहते हैं बुरा न मानोमुँह को छिपाना जरूरी हैअपनेपन में गले न लगाओदूरियाँ बनाना जरूरी हैकोरोना महामारी तोएक भयंकर बीमारी हैकहने को तो वायरस हैपर छुआछूत बीमारी हैहट्टे कट्टे इंसानों पर भी एक अकेला भारी हैआँख मुँह और नाक कान सेकरता छापेमारी हैएक पखवाड़े के भीतर हीअपना जादू चलाता हैकोर



जहाँ न मैंने तुझे पुकारा

हम ईश्वर को यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ ढूँढ़ते फिरते हैं, लेकिन अपने भीतरझाँककर नहीं देखते... हमारा ईश्वर तो हमारे भीतर ही हमारी आत्मा के रूप मेंविराजमान है... प्रकृति के हर कण में... हर चराचर में ईश्वर विद्यमान है... जिसदिन उस ईश्वर के दर्शन कर लिए उस दिन से उसे कहीं ढूँढने की आवश्यकता नहीं रहजाएगी... कुछ



मैं सड़क....

मैं सड़क …अरे साहबकोरोना महामारी के कारणफुर्सत मिलीआपबीती सुनाने कामौका मिला।सदियों से सेवाव्रतीदिन-रात सजग तैनातसीनें पर सरपट दौड़ती गाड़ियों का अत्याचार।हाँ साहब.. 'अत्याचार'तेजगति से बेतहाशाचीखती - चिल्लातीभागती गाड़ियाँ..।क्षमता से अधिकबोझ लादे…आवश्यकता से अधिकरफ़्तार में भागती गाड़ियाँ...।मेरे चिथड़े



प्रेम बन जाएगा ध्यान

मैंने देखा, और मैं देखती रही / मैंने सुना, और मैं सुनती रही मैंने सोचा, और मैं सोचती रही / द्वार खोलूँ या ना खोलूँ...प्रेम खटखटाता रहा मेरा द्वार / और भ्रमित मैं बनी रही जड़ खोई रही अपने ऊहापोह में...तभी कहा किसी ने / सम्भवतः मेरी अन्तरात्मा ने तुम द्वार खोलो या ना खोलो / द्वार टूटेगा, और प्रेम आएगा



कहानी एक फूल की

🥀🥀कहानी एक फूल की🥀🥀🌳🌳🌷🌺🌺🌺🌷🌳🌳कहानी फूल की तुझे आज सुनाता हूँमत जाना कहीं-आद्योपांत सुनाता हूँऊँचे दरख़्त झूम- झूम कर ताज़िन्दगी,छाँव-बतास ओ' गुल- फल लुटाते हैं!वख्त की मार कहूँ या तूफानों से धिर,गीर-पड़ उखड़ निर्जीव हो जाते हैं!!डालें टुंग-टुंग कर मानव दो शाम,असंख्य चुल्हें जल-जठराग्नि



वक़्त अच्छा हो तो....

वक्त अच्छा हो तो….कोरोना काल में अंतर्मन ने पूछा -इस दुनिया में तुम्हारा अपना कौन है..?सवाल सुनते हीएक विचार मन में कौंधामाँ-बाप, भाई-बहन, पत्नी…बेटा - बेटी या फिर मित्र..किसे कहूँ अपना..?यदि वक़्त अच्छा हो तोजो अदृश्य हैसर्वशक्तिमान हैसर्वव्यापी हैवो भी अपना है तब सब कुछ ठीक है।वक़्त अच्छा हो तोमाँ-ब



मेहतर....

मेहतर….साहबअक्सर मैंने देखा हैअपने आस-पासबिल्डिंग परिसर व कालोनियों मेंकाम करते मेहतर परडाँट फटकार सुनातेलोंगों कोजिलालत करतेमारते भर नहींपार कर देते हैं सारी हदेंथप्पड़ रसीद करने में भी नहीं हिचकते।सच साहबकिसी और पर नहींबस उसी मेहतर परजो साफ करता हैउनकी गंदगीबीड़ी सिगरेट की ठुंठेंबियर शराब की खाली बो



सबके हो तुम राम

कल पाँच अगस्त को सारा विश्व के महान घटनाका साक्षी बना... और ये घटना थी श्री राम जन्म भूमि अयोध्या में राम मन्दिर भूमिपूजन... हम सभी वास्तव में बहुत सौभाग्यशाली हैं कि हमारे माननीय प्रधान मंत्री जीने सनातन महानुभावों की साक्षी में कल जो वहाँ भूमि पूजन किया हम सबको अपने अपनेनिवास से ही उस यज्ञ में सम्



जय बोलो प्रभु श्री राम की

जय बोलो प्रभु श्री राम कीजय बोलो प्रभु श्री राम कीअयोध्या नगरी दिव्य धाम कीपावन नगरी के उस महिमा कीतुलसीदास जी के गरिमा कीजो जन्म भूमि कहलाता हैत्रेतायुग से जिसका नाता हैसुनि रामराज्य मन भाता है।जय बोलो प्रभु श्री राम कीअयोध्या नगरी दिव्य धाम कीजग के पालनहारी श्री रामबिगड़ी सबके बनाते कामभ्राता भरत क



कबीर दास

कबीरदास की उलटी बानी , बरसे कम्बल भीगे पानी।” (कबीरदास का कहना है, "हर व्यक्ति अपने भीतर सुप्त रूप में विद्यमान समाज प्रदत्त संस्कार रूपी कम्बल ओढ़ा हुआ है, जिसमे कई जन्म के संस्कार हैं। जब ये भक्ति रूपी संस्कार के कम्बल बरसतें हैं, अर्थात जीवन में सक्रीय व क्रियाशील हो



सच्चा मित्र

असली मित्रजिंदगी से मुलाक़ातएक बार गोष्टियों में यह बात हुई।असली मित्र कौन? बहस बेबात हुई।।धमासान चला वर्षों वाक् युद्ध।अंत में निष्कर्ष यही निकला शुद्ध।।मित्रता की सोंचे वो है पगला।हम हैं तो कोई मित्र बने हमारा।।हम न रहे लो श्मशानधाट हमारा।।साँसों के तार का ताना-बाना,जीवन हीं परम मित्र हमारा।।।मुला



अयोध्या में राम !

अयोध्या में राम !भगवान राम तुलसी हृदय में बसते राम , तुलसी हृदय में राम।सब में रमते हैं श्री राम, जो हैं तुलसी के राम।तुलसी ने काशी रहकर रामायण रचते ।रामचरित्र मानस को भजते श्री राम राम तुलसी जपते ।तुलसी के थे राम और,राम जी के तुलसी।श्री राम के साथ राम, भक्त हनुमान नेगुणगान गाया ! कहते हैं संकटम



अपना ख्याल रखना

अपना ख्याल रखना कि तुम्हे पता भी नहीकितने बेपरवाह हो तुमदिन को रात ,रात को दिन बना रखते हो दुर हु तुमसे... पर फिर भी मेरी बात का मान ऱखना ....मेरी खुशी के लिए...अपना ख्याल रखना... माना कि अब मे पास नही तुम्हे डाटँने का बहाना भी कुछ खास नही मेरी हर झल्लाहट का एहसास रखना अपनी मसरुफ जिंदगी को थोड



बप्पा को लाना तो हमारी जिम्मेदारी है

बप्पा को लाना हमारी जिम्मेदारी है...अबकी बरस तो कोरोना महामारी हैउत्सव मनाना तो हमारी लाचारी हैरस्में निभाना तो हमारी वफादारी हैबप्पा को लाना तो हमारी जिम्मेदारी है।अबकी बरस हम बप्पा को भी लायेंगेंसादगी से हम सब उत्सव भी मनायेंगेंसामाजिक दूरियाँ हम सब अपनायेंगेंमास्क सेनिटाइजर प्रयोग में लायेंगें।दू



ऐसे याद तुम्हारी आए

यादो के अनेकरूप होते हैं, अनेकों भाव और अनेकों रंग होते हैं...अपनी पिछली रचना "तुम्हारी याद यों आए" में यादों को इसी प्रकार के कुछउपमानों के साथ चित्रित करने प्रयास था, आज की रचना "ऐसे यादतुम्हारी आए, सूर्य डूब जाने पर जैसे अलबेली संध्या अलसाए..." में भी इसी प्रकार का प्रयास किया गया है... सुधी श्रो



कोरोना देव की कृपा

कोरोना देव की कृपाजीवन का नाहीं कौनों ठिकानामरै के चाहिय बस कौनों बहाना बुढ़न ठेलन का बाटै आना जानाजवनकेउ का नाहीं बाटै ठिकानारोग ब्याधि का बाटै ताना बानाफैलल बा भाई वायरस कोरोनाझटके पटके में होला रोना धोनाकितना मरि गयेन बिना कोरोनामेहर माई बाप के बाटै भाई रोनाअस्पताल वाले पैसा लूटत बानाभागल भागल बीर



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x