शर्मनाक! क्यों सुरक्षित नहीं बेटियां ??

शर्मनाक! क्यों सुरक्षित नहीं बेटियां ??मूर्ख! पत्थर की मूरत की रोज उतारते हो आरती पर देश में अपनी बेटी की हालत देख रो रही माँ भारती!!रोज कोई न कोई देवी स्वरूपा जंग जिंदगी की हारती...द्रौपदी की खिंच रही है अब भी साड़ी वो कृष्ण को पुकारती.



"गोवा की कहानी मेरी जुबानी"

क्याआप जानते हैं गोवा भारत के साथ आजाद नहीं हुआ था | बंटवारे और संप्रदायिक हिंसा केबाद भारत को आजादी तो मिल गई लेकिन गोवा पुर्तगाल के कब्जे में रहा | १९५४ में फ्रांसीसी पांडिचेरी छोड़ कर चले गए मगर गोवाआ



चलो चले हम हिंदी सीखें

हिंदी पत्रकारिता के दिवस पर हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालती श्री मती मनीषा राम रक्खा की कविता ,इन्होने फिजी वासी ,भारतवंशियों को हिंदी का महत्व समझाने , हिंदी लिखने पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया एवं हिंदी साहित्य के शिक्षण का महत्व पूर्ण कार्य किया आज भी वह हिंदी विकास के लिए निरंतर प्रयत्न शील हैं



वैवाहिक वर्षगाँठ

प्राणप्रियेसरसी छन्द16,11 की यति 27 मात्रएं अंत 21 सेमेरी प्राणप्रिये तुम हमको, जन्म जन्म स्वीकार।तुम ही मेरे जीवन की हो, जीने का आधार।तुम मेरे दिल की धड़कन हो, तुम ही मेरी सांस।तुमसे कुछ उम्मीदें मेरी, तुमसे ही कुछ आस।करती सेवा सदा हमारी, रखती हर पल ध्यान।अगर समस्या में चिंतित हूँ, करती तुम आसान।कभी



अजीब मसला है जिंदगी का।

अजीब मसला है जिंदगी का।लोग कहने लगे है, रही जिंदगी, तो दुनियाँ जहां को समझ लेंगे।लहरे भी अनगिनत होंगी कोरोना की अभी, तीसरी का इंतजार है।पहली लहर से घबराए भागे, मौत से बचने के लिए योंही जिंदगियां गवा दिए रोड, रेल ट्रैक पर।दीन दानवीरों की टोलियां मद्दत किया उनकी जो प्रवासी मजदूर बन गए थे।अजीब मसला है



मन

ऐ मन बता देक्या ढूँढ रहा है तूऐ मन बता दे तूमन बोला ये ज़िंदा हूँ मैंकोई याद बचपन की दिला रहा हैरास्ते वो बता रहा हैमन का ये आँचल चाहता तो है खुले आसमान में उड़नाख़्याल कब से ये छुपा के रखा हैये ख़्वाहिश है मेरे मन कीउस को ढूँढ रहा हूँ-अश्विनी कुमार मिश्रा



जहां चाह वहां राह

मानसीको दिल्ली आए हुए 6 महीने ही हुए थे, अभी उसके पति का मुंबई से दिल्ली ट्रांसफरहुआ था, जो कि एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर था। मानसी पूरा दिन घर पर अकेलामहसूस करती थी, हालांकी खाना वो खुद ही पकाती थी फिर भी बचे हुए वक्त में क्या करे? ये



असली मर्द

सीमा और मनोज एक हीगांव में पले-बढ़े थे। आज पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर मनोज अपने दोस्त संग पंजालड़ा रहा था। तभी सीमा अपनी सहेली संग वहां आ पहुंची, बगल वाले पेड़ से बेरतोड़ने, एक-एक करके उसने बेर अपने दुप्पटे में लपेट कर बांध लिए।तभी पड़ोस की चंदाकाकी भी आ पहुंचीऔर बोली “अर



प्यार की अमर कहानी

आज अदिती बेहद उदास थी तो सुमित ने उससे पूछा “क्या बात हैतुम्हारा मिज़ाज आज बदला-बदला सा क्यों है ?”“मैंने एक प्रेम कहानी पढ़ ली जिसमें नायिका नायकके चक्कर में अपनी जान से हाथ धो बैठती हैं।” अदिती ने कहा।“तो नहीं पढ़नी चाहिए थी।” सुमित ने कहा।“बहुत मशहूर थी और बेस्टसेलर भ



चांद के पार चलो।

आज नवीन की पेटिंग ने एक मशहूर कॉम्पीटिशन में पहला स्थान पाया था, आज मेल बॉक्स खोलकर देखा तो वो हैरान हो गया ऐसी तो किसी कॉम्पीटिशन में उसने भाग ही नहीं लिया था, तो फिर ऐसा कैसा हुआ। तभी उसने वहां फोन लगाया तो



पर्शियन समाज को नौरोज की शुभकामनाएं

पर्शियन समाज को नौरोज की शुभकामनायेंडॉ शोभा भारद्वाज पर्शियन संस्कृति में नव वर्ष (नौरोज) सोलर हिजरी कलंडर के अनुसार बहार (बसंत) का पहला दिन है .21 मार्च को नौरोज ईरान ,टर्की ,सीरिया इराक ,एवं खुर्द समाज में धूमधाम से मनाया जाता है ,पर्व में होली का उल्लास चैत्र मास के नवरात्रों ,बैसाखी एवं ईस्टर



मनोज्ञा छंद "होली"

मनोज्ञा छंद "होली"भर सनेह रोली।बहुत आँख रो ली।।सजन आज होली।व्यथित खूब हो ली।।मधुर फाग आया।पर न अल्प भाया।।कछु न रंग खेलूँ।विरह पीड़ झेलूँ।।यह बसंत न्यारी।हरित आभ प्यारी।।प्रकृति भी सुहायी।नव उमंग छायी।।पर मुझे न चैना।कटत ये न रैना।।सजन य



कुम्भ एवं अर्द्ध कुम्भ

कुभ एवं अर्द्ध कुम्भ आज 11 मार्च महा शिवरात्रि, हरिद्वार में कुंभ के अवसर पर शाही स्नान हुआ| डॉ शोभा भारद्वाज पुराणोंमें वर्णित पोराणिक कथाओं के अनुसार देवताओं एवं दानवों ने मिल के समुद्र मंथनकिया था तय था समुद्र मंथन से जो रत्न निकलेंगे दोनों पक्ष मिल कर बाँट लेंगेमन



धनहर और मनहर

धनहर और मनहरधनहर मनहर दोनो साथी और संघाती है।गंगा में धनहर नाव तो मनहर पतवार है।बीज बोता धनहर खेत मे, ध्यान मनहर देता है।ट्यूबवेल धनहर का बरहा होता मनहर का।फसल बड़ी हुई धनहर की काटता मनहर है।धनहर फसल लाया शहर में मनहर गांव में।धनहर की झोली भरी मनहर की जेब ऊँची हो गई।धनहर की कोठी हवेली, मनहर की झोपड़ी



धन्यवाद आपको

कैसे करूं मैं सभी का धन्यवाद,सोचता रहा दिन भर;आपकी ये शुभकामनाएं,खुशनुमा बना देती दिन के हर पल को।कैसे करूं मैं साधुवाद,शब्दों में व्यक्त करना है मुश्किल इन पलों को।जन्मदिवस पर मिलने वाली ये शुभकामनाएं,जीवन सार्थक करें हर पल को।बहुत कुछ पा लेता इंसान,मिलती इन सबकी सदि



समझ

मन के सांचे जो ढल जाए, प्रेम सुधा वो पी जाएं.. वो हमराही, हमसफ़र सबको कहां मिलता है? मन से ही जो ठोकर खा जाएं, फिर भला वो कहां जाएं? जज्बातों का ज़लज़ला है, जिंदगी में सुख दुःख का फलसफा है... कुछ कह जाए, कुछ रह जाएं.. पूर्ण करने को सबकों मनमीत कहां मिलता है? जीने के लिए साथी है पर साथ कहां मिलता है



अभिलाष

जीवन के मधु प्यास हमारे, छिपे किधर प्रभु पास हमारे?सब कहते तुम व्याप्त मही हो,पर मुझको क्यों प्राप्त नहीं हो?नाना शोध करता रहता हूँ, फिर भी विस्मय में रहता हूँ,इस जीवन को तुम धरते हो, इस सृष्टि को तुम रचते हो।कहते कण कण में बसते हो,फिर क्यों मन बुद्धि हरते हो ?सक्त हुआ मन निरासक्त पे,अभिव



चेहरे पर मुस्कान लौटाती आशाएं

बुंदेलखण्ड की हीरा नगरी कहे जाने वाला पन्नाजिला वास्तव में आदिवासी बहुल क्षेत्र है। इसी पन्ना जिले के देवेन्द्रनगरविकासखण्ड के ग्राम फुलवारी



जम्मू कश्मीर में जिला विकास परिषद के चुनाव परिणाम अमन शांति की और बढ़ते कदम हैं

जम्मूकश्मीर में जिला विकास परिषद के चुनाव परिणाम अमन शांति की और बढ़ते कदम डॉ शोभाभारद्वाज जम्मूकश्मीर में जिला विकास परिषद के चुनाव संसद द्वारा धारा 370 की समाप्ति के बाद हुएगुपतार गठ्बन्धन का चुनावों में हिस्सा लेना परोक्ष रूप से अनुच्छेद 370 कीसमाप्ति पर स्वीकृति थी 370 का काल गुजर गया . महबूबा



सौराष्ट्र गौरव:लोक गायक हेमु गढ़वी

सौराष्ट्र गौरव:लोक गायक हेमु गढ़वी 07दिसंबर 2007 का वह अविस्मरणीय दिवस था.ग्यारहवीं अंतर



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