श्याम रंग

खग वृंद करें छंद, पवन है मंद मंद आज मेरी वाटिका तरंग में नहाई है पुष्प संग झूम रही, लिए मन मकरंद भ्रमर का नाद सुन कली मुसकाई है मन की उमंग देख, परवश अंग देख आज मेरी कविता प्रथम लजाई है| टेसुओं में पड़े रंग, नयी रश्मियों के संग सप्तरंग फागुन ने ली अंगडाई है कोयल है कूक रही, पत्र-पत्र उन्मत्त बड़, आम



स्वाइनफ्लू से फीका न हो होली का रंग

मौसम के बदलते रंग और बारिश के साथ ठंड पलटने से स्वाइन का खतरा बढ़ गया है । इस होली अपने करीबियों को गले लगाकर होली की बधाई देने या होली के जश्न के लिए किसी रेन या पूल पार्टी का हिस्सा बनने से पहले एक बार जरूर सोच लें कि कहीं आपका त्यौहारों का यह खुमार आपको स्वाइन फ्लू की चपेट में तो नहीं ला रहा। इस



शब्दों की होली

तेरे संग खेली मैंने , अपने शब्दों की होली , यही बात अब तक मैंने , तुमसे नहीं है बोली ।। कोई रंग न बिखेरा , न गुलाल ही उड़ाया , सुन्दर यह रूप अपना , बस शब्दों से सजाया ।। अपनी कल्पना से सजा दो , अब शब्दों की रंगोली, लाए मंगल और सौभाग्य , सबके जीवन मे ये होली ।।



होली के रंग

अबकी होली, खेलो रंग इतना , अपनों संग मनाओ होली, जी चाहे जितना , छोटी छोटी बातें है , छोटी छोटी खुशियाँ , तुम भी ज़रा हँस लो आज, जब हस्ती है ये दुनिया, न बुरा सोचो किसी का , हर मन हो खुशियाँ समाई , करो कुछ ऐसा , की लगे प्रेम के रंग होली है लाई ।



शब्दनगरी की पहली होली

यह शब्दनगरी की आप सब के साथ पहली होली है । पूरे शब्दनगरी संगठन के लिए ये सौभाग्य और अत्यंत हर्ष का मौका है जब हम और आप, अपने शब्दो के रंगो से इस पावन पर्व पर एक दूसरे पर रंगो की बौछार करेंगे । होली बसंत व प्रेम-प्रणव का पर्व है । रंगो का यह लोकप्रिय पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है। फाल्गुन मा



भगवान की खोज

〰〰〰〰〰〰〰 अकबर ने बीरबल के सामने  अचानक एक दिन 3 प्रश्न उछाल दिये। 〰〰〰〰〰〰〰 प्रश्न यह थे - 1) ' भगवान कहाँ रहता है? 2) वह कैसे मिलता है और 3) वह करता क्या है?''  बीरबल इन प्रश्नों को सुनकर सकपका गये और बोले - ''जहाँपनाह! इन प्रश्नों  के उत्तर मैं कल आपको दूँगा।"   जब बीरबल घर पहुँचे तो वह बहुत उदास थे।



भुखले पेट रोज मरै छै

समिति आरो वार्ड कमिश्नर।भुखले पेट रोज मरै छै। पर मुखिया के गोदाम में सब गेहूँ-चावल सरै छै। गरीबन सब के खून पीके।  बोलेरो ई रंगबाबै छै। कोन कसाई मुखिया बन्लै।  शरम नै तनियो आवै छै।   मारै छै ई लात पेट पर।   ऊपर से गालियो पढ़ै छै। समिति आरो वार्ड कमिशनर।   भुखले पेट रोज मरै छै।



सब के सब करप्ट हैं

A satirical look at the hypocritical values of middle class India...



बसंत

सुबह उठा तो देखा  कि बात आज क्या है ? पत्ते खनक  रहे हैं, चिड़िया चहक रहे है । सूरज की तेज से मैं पूछा कि राज क्या है ? भोर के महक का एहसास आज क्या है। अमराईयों के झुरमुट कोई बुला रहा है   बहक गया है कोयल और गीत गा रहा है  सरसों के फूल से मैं पूछा कि राज क्या है? संगीत की समां का अहसास आज क्या है । 



चुटकुला

एक बार एक अध्यापक कक्षा में बच्चों को रक्त प्रवाह (ब्लड प्रेशर) के बारे में पढ़ा रहा था।अध्यापक: बच्चों जैसा की आप जानते हैं कि अगर मैं अपने सिर के बल खड़ा हो जाऊँगा तो मेरा रक्त मेरे सिर की ओर तेजी से प्रवाहित होने लगेगा जिसकी वजह से मेरा चेहरा लाल पड़ जाएगा।बच्चे: जी मास्टर जी।अध्यापक: तो फिर बच्च



28 जनवरी 2015

बस वो मेरी है, मेरी ही रहे

Ae khuda! Ab thak chuka hoon sajda kar kar, Usko tujhse har baar maang maang kar,  Ab toh apne iss bande par reham kar, Hum dono ke beech ki dooriyon ko fanaa kar, Pareshan rehta hai dil-o-dimag uske liye, Ab toh uski berukhi mujhse door kar,  Tu janta hai na Main usse kitna chahta hoon? Tu janta ha



"Mann Ki Baat" Hon’ble Shri Narendra Modi

If You Missed Mann Ki Baat..Than Here is Transcript  of "Mann Ki Baat" Hon’ble Shri Narendra Modi): Today, Shri Barack Obama, President of the United States, joins us in a special programme of Mann Ki Baat. For the last few months, I have been sharing my “Mann Ki Baat” with you. But today, people fr



क्यों कबूतर की सफेदी

क्यों ? क्यों कबूतर की सफेदी क्यों सहिष्णुता के मोती क्यों गगन का नीलापन ये क्यों अमन के ये साथी और प्यार के वे पाती धुंधलके में खो रहे हैं ? प्यार के दिलबाग नगमे कल के वे रंगीन सपने वे दिल-अजीज़ अपने पराये क्यों हो रहे हैं? सांप्रदायिक सौहर्द्र की वो भावना क्यों खो रही है? आपस में लिपटी जै



26 जनवरी 2015

हमारा मन

किसी राजा के पास एक बकरा था। एक बार उसने एलान किया की जो कोई इस बकरे को जंगल में चराकर तृप्त करेगा मैं उसे आधा राज्य दे दूंगा। किंतु बकरे का पेटपूरा भरा है या नहीं इसकी परीक्षा मैं खुद करूँगा। इस एलान को सुनकर एक मनुष्य राजा के पास आकर कहने लगा कि बकरा चराना कोई बड़ी बात नहीं है। वह बकरेको लेकर जंगल



सच्चा सुख

सच्चा सुख एक युवक जो कि एक विश्वविद्यालय का विद्यार्थी था, एक दिन शाम के समय एक प्रोफ़ेसर साहब के साथ टहलने निकला हुआ था। यह प्रोफ़ेसर साहब सभी विद्यार्थियों के चहेते थे और विद्यार्थी भी उनकी दयालुता के कारण उनका बहुत आदर करते थे। टहलते-टहलते वह विद्यार्थी प्रोफ़ेसर साहब के साथ काफ़ी दूर तक निकल गया



छोटी-मोटी चीजें पाने के लिए कुछ बहुत बड़ा खो देते हैं

एक व्यक्ति आफिस में देर रात तक काम करने के बाद थका-हारा घर पहुंचा . दरवाजा खोलते ही उसने देखा कि उसका छोटा सा बेटा सोने की बजाय उसका इंतज़ार कर रहा है . अन्दर घुसते ही बेटे ने पूछा —“ पापा , क्या मैं आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हूँ ?” “ हाँ -हाँ पूछो , क्या पूछना है ?” पिता ने कहा . बेटा - “ पापा , आप ए



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