दौर ही कुछ और था

दीपक की लौ तले पढ़ने काबारात में पंगत में बैठने कादाँतों से नाखुन चबाने काबागों से अमरुद खाने काबेरियों से बेर तोड़कर लाने कापत्थर मार-मार आम गिराने काबारिश में जामुन तोड़ने जाने का          दौर की कुछ और थास्कूल से फूटकरखेतों में घूमने कारिश्तेदार आने परस्कूल नहीं जाने कारेलिंग वाले खंबे परचढ़ जाने



कहानी : पंच परमेश्वर / प्रेमचंद

जुम्मनशेख अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भीसाझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गये थे, तब अपना घर अलगू को सौंप गये थे, और अलगू जब कभी बाहर जाते, तो जुम्मन पर अपना घर छोड़ देते थे। उनमें न खाना-पाना काव्यवहार था, न धर्म का नाता; केवल विचा



इस मजेदार गाने का आज भी नहीं है कोई जोड़

कुछ गीत न केवल देखने वरन सुनने में भी मजेदार होते हैं जो आप को गुदगुदा करगुनगुनाने और सराहने पर मजबूर कर जाते हैं | ऐसे ही गीतों में से एक है सन 1968  में रिलीज़ सुनील दत्त, सायरा बानो,महमूद और किशोर कुमार अभिनीत बेहद सफल एवं मजेदार फिल्म “पड़ोसन” का मजेदार गीत “एकचतुर नार”| मन्ना दा, किशोर कुमार और म



महज मनोरंजन नहीं : अब 'खेल' बनाते हैं नवाब!

खेलों में आगे आने का यदि कोई अचूक मंत्र है तो वह है ''कैच देम यंगÓÓ जिसका मतलब है छोटी उम्र में ही खेलों में रुचि रखने वाले, स्वस्थ, मजबूत शरीर च इच्छाशक्ति वाले बच्चों को चुनना । स्कूल स्तर से ही उन्हें अच्छे से अच्छा प्रशिक्षण देना, उन्हें सुविधाएं मुहैया कराना, उन्हें अच्छा कैरियर विकल्प व सुरक्ष



मुर्दा को बांग जिंदा को डांग

मैं एक धर्म गुरु हूंमुझ से बढ़ा धर्म गुरु न हुआ न होगामैं एक भक्त हूंमुझ से बढ़ा भक्त न कोई हुआ न होगामैं एक स्वतंत्रता सेनानी हूंमुझ से बढ़ा स्वतंत्रता सेनानी न हुआ न होगामैं एक क्रांतिकारी हूंमुझ से बढ़ा क्रांतिकारी न हुआ न होगामैं एक इतिहासकार हूंमुझ से बढ़ा इतिहासकार न हुआ न होगामैं एक साहित्यका



एक किस्सा रेडियो का

जब भी कोई नई चीज बाजार में आती है तो सभी का मन ललचाता है कि वह उसे मिल जाए। रेडियो भी जब बाजार में आया तो नए-नए कार्यक्रम सुनकर लोग उसे अपने घर लेकर आना चाहते थे। एक व्यकित ने एक डिब्बेनुमा वस्तु से गाने बजते देखे, पैसे जेब में थे ही और झट से उसे खरीद लिया। जगह-जगह उसे अपने साथ लेकर जा रहा था। जब खे



05 अक्तूबर 2015

मनोरंजन

जिंदगी जियो ऐसे की आखरी दिन हो,और कुछ करो तो ऐसे जैसे बरसों जिन है   ||



19 सितम्बर 2015

तब याद आता है बचपन!

यादों के भंवर से ,पीछे मुड़ कर देखते हूँ,तब याद आता है बचपन,बस्ता टाँगे, कॉपी लिए किसी बच्चे को स्कूल जाते देखते हूँ,तब दोस्तों संग स्कूल जाने के लिए आतुर हो जाता हैं बचपन,रोजमर्रा ज़िन्दगी से जब ऊब जाती हूँ, तब मुस्कराता है बचपन,स्वछंद हंसी देखती हूँ,तो नटखट ढंग से लजाता है बचपन,चॉकलेट और टॉफ़ी देखती



हिंद्राणी बनाम इंद्राणी

अपने इस लेख को उक्त शीर्षक देते समंय मैं स्वयं हैरान हुं कि आखिर मेरे सामने यह नौबत क्यों आई और मैं इस शीर्षक से यह लेख क्यों लिख रहा हुं । वास्तव में मैं पूर्व में आयोजित 9 विश्व हिंदी सम्मेलनो के संकल्पों के अनुसार 10 जनवरी, 2015 को मनाए गए विश्व हिंदी दिवस से लेकर आज तक कुछ टीवी चैनलों और समाचार



फिल्म एक नजर में : वेलकम बैक -ट्रांसपोर्टर रिफ्युल्ड

फिल्म एक नजर में : ट्रांसपोर्टर रिफ्युल्डट्रांसपोर्टर सीरिज एक एक्शन पैक्ड मनोरंजन के लिए याद की जाती है ,जिसमे एक ट्रांसपोर्टर की कहानी होती है जो गैरकानूनी ट्रांसपोर्टेशन का कार्य करता है ,जिसके चलते वह बड़ी मुसीबतों में भी पड़ता है और उनसे बच भी निकलता है .ट्रांसपोर्टर की भूमिका में ‘जेसन स्टेथम ‘



तोड़ती बथुआ

धुन में अपनी हो मगनझुककर पार्क में तोड़ रही थी बथुआ  वोगरीब थी इसलिए जरुरत भी थी उसकोपढ़ाकू विद्यार्थियों का अड्डा था पार्क वोअल्हड़ उमर ऐसी कि चुड़ैल संग भी हो लें वोऐसा ही एक विद्यार्थी पीछे-पीछे उसके लिया होपार्क से निकलते वक्त कर दिया बॉय-बॉय उसकोनतीजा बन ग्रहण अगले दिन लगा उसकी शरारत कोबनठन कर



18 जुलाई 2015

tdpta hai dil mera

tdpta hai dil mera njane keo teri yado me saso me hai teri khughbu aakho me hai tere nam ka gm jitna hi mere dil ne chaha tujhko utni hi tu mujhse dur ge n jita hu n mrta hu n hsta hu n rota hu jane kya ho gya hai mujhko kaise esko pyar khu kaise tujhko apna khu n koe bndhn hai n koe nata hai phir b



भगवान जगन्नाथ रथयात्रा पुरी पर विशेष

ओड़िशा के पुरी में समुद्रतट पर स्थित जगन्नाथ मंदिर एक हिंदु मंदिर है जो श्रीकृष्ण (जगन्नाथ)को समर्पित है । जगन्नाथ का अर्थ जगत के स्वामी से होता है । इस मंदिर को हिंदुओं के चार धामों में से एक माना जाता है । यह मंदिर वैष्णव परंपराओं और संत रामानंद से जुड़ा हुआ है । सन 1198 में ओड़िया शासक अनंग भीमदे



चींटी

नन्हां और प्यारा जीव हैं चींटीयांरानी, फौजी और श्रमिक श्रेणी की होती चींटीयांप्रजनन क्षमता रखती केवल रानी चींटीयांलंबा जीवन भोगती हैं मादा चींटीयांहाथी जैसे जीव के लिए भी खतरनाक हैं चींटीयांमानव की खलनायक बनतीं जब काटती चींटीयांभोजन में घुसकर उसे करतीं खराब चींटीयांजानवरों और मानवों को चट कर जातीं म



फिल्म एक नजर में ( क्लासिक्स ) : गाईड ( १९६५ )

निर्देशन: विजय आनंद निर्माता: देव आनंद कलाकार: देव आनंद, वहीदा रहमान, किशोर साहू,लीला चिटनिस लेखक: आर. के. नारायण (उपन्यास) संगीत: एस.डी.बर्मन



मां को खुशियाँ और सम्मान दे

मां को खुशियाँ और सम्मान देने के लिए पूरी ज़िंदगी भी कम होती है। फिर भी विश्व में मां के सम्मान में मातृ दिवस मनाया जाता है।                                                  मां शब्द में संपूर्ण सृष्टि का बोध होता है। मां के शब्द में वह आत्मीयता एवं मिठास छिपी हुई होती है, जो अन्य किसी शब्दों में नह



दर्पण को दोष लगाने से

दर्पण को दोष लगाने से सूरत नहीं बदल जाती है !तुम मत पूजो घर की तुलसी !तुम मत मानों ,कोई देवता ! बहती नदिया को छलकर तुम ,भ्रम पाले ना ,कोई देखता !छुप-छुपकर ,चोरी करने सेसीरत नहीं बदल जाती है !चुगली करतीं हैं ख़ुद आँखें !कितना पाप लिए जागे हो !सीढ़ी पर हो झुकते लेकिन ,विश्वासों के तोड़े धागे !अर्चन को



12 अप्रैल 2015

मोहब्बत एक नशे की तरह जिसकी एक बार लत पड़ जाये तो उसका नशा जाके उतरता

मेरी अब तक की सबसे बेस्ट स्टोरी मैँ से एक "wrongcall" का कुछ अंश आपके लिये लिख रहा हूँ ;"मोहब्बत ऐक ऐसे नशे की तरह जिसकी एक बार लत पढजाये तो उसका नशा जाके उतरता है या तो "शराब केमहखाने मैँ"या फिर"आँशुओँ के पैमाने मैँ""मोहब्बत को हम बेबफा पत्नी की तरह तलाकभी नहीँ दे सकते , मोहब्बत तो हमेँ बुढापे के ह



13 मार्च 2015

Mai abhimani hun

Mai abhimani hun. kyo ki mai bharat jaise vishal ganrajya me rahta hun. mere apni kuch abhiyuktiya hai jise mai pradarshit karne ke liye swatantra hun. jiske liye mera savidhan mujhe azadi deta hai. bharat jaise vishal rashtra me vibhinn prakar ke dharm avam samuday k log rahte hai. aur en sabhi vib



भगवान की खोज

〰〰〰〰〰〰〰 अकबर ने बीरबल के सामने  अचानक एक दिन 3 प्रश्न उछाल दिये। 〰〰〰〰〰〰〰 प्रश्न यह थे - 1) ' भगवान कहाँ रहता है? 2) वह कैसे मिलता है और 3) वह करता क्या है?''  बीरबल इन प्रश्नों को सुनकर सकपका गये और बोले - ''जहाँपनाह! इन प्रश्नों  के उत्तर मैं कल आपको दूँगा।"   जब बीरबल घर पहुँचे तो वह बहुत उदास थे।



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