आज़ादी देने की नहीं, छीनने की आवश्यकता

अक्सर में लोगों को ये कहते सुनताहूँ कि महिलाओं या लड़कियों को लड़कों के समान आज़ादी मिलनी चाहिए। शायद आप भी इस बात से हामी भरते होंगे, पर मैं नहीं। क्योंकि हम लड़कों के लिए जिस आज़ादी शब्द का प्रयोग करते हैं। असल में वो



दम तोड़ती भावनायें

"क्या ,आज भी तुम बाहर जा रहे हो ??तंग आ गई हूँ मैं तुम्हारे इस रोज रोज के टूर और मिटिंग से ,कभी हमारे लिए भी वक़्त निकल लिया करो। " जैसे ही उस आलिशान बँगले के दरवाज़े पर हम पहुंचे और नौकर ने दरवाज़ा खोला ,अंदर से एक तेज़ आवाज़ कानो में पड़ी ,हमारे कदम वही ठिठक गये। लेकिन तभी बड़ी शालीनता के साथ नौकर न



बाबा जयगुरुदेव राजनैतिक संगत का गठन किया गया

जयपुर। बाबा उमाकांत महाराज के सानिध्य में संचालित बाबा जयगुरुदेव धर्म विकास संस्था द्वारा संबंध बाबा जयगुरुदेव राजनैतिक संगत की एक राष्ट्रीय गोष्ठी में लखनऊ कार्यक्रम में बाबा जयगुरुदेव राजनीतिक संगत का गठन किया गया। राजनैतिक संगत के राष्ट्रीय प्रभारी आशुतोष शर्मा (जय



बेटियाँ :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *नारी को सृष्टि का मूल स्रोत मानते हुए सनातन धर्म के आदि ग्रंथ वेदों में नारी का महिमामंडन किया गया है | हमारे वेदों में नारी को अत्यंत महत्वपूर्ण गरिमामय एवं उच्च स्थान प्रदान किया गया है | स्त्रियों की शिक्षा- दीक्षा, शील, गुण, कर्तव्य, अधिकार और सामाजिक भूमिका का ज



मानस गीत मंजरी

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सामाजिक एकता

2018 समाप्त हुवा । बदलाव , परिवर्तन निसर्ग का एक नियम है । आज विश्व काफी तीव्रगति से चल रहा है । और परिवर्तन की दौड़ मैं कई पीछे छुट रहे है तो कई काफी तेजीसे आगे भी बढ़ रहे है । समाज की एकता और प्रेम तभी आपसे में एक रूप हो सकते है जब हम इस बढ़ती तेज रफ़्तार में एक दूजे के सहायक बन एक दूजे को भी साथ लेकर



जीवन का अनमोल "अवॉर्ड "

" नववर्ष मंगलमय हो " " हमारा देश और समज नशामुक्त हो " नशा जो सुरसा बन हमारी युवा पीढ़ी को निगले जा रहा है ,



सामाजिक कुरीतियाँ

जब कभी भी हम सामाजिक कुरीतियों पर चर्चा करते हैं तो आमतौर पर जाती, धर्म भेदभाव, बालविवाह, अशिक्षा जैसी कुछ कुरीतियों पर ही ध्यान जाता है, जो कि अशिछित लोगों में ही प्रभावशाली पायी जाती हैं, या यो कहें की अशिक्षा ही कुरीतियों का मूल कारण है !लेकिन क्या हम



चोर

सुबह के साढ़े आठ बज रहे थे, मैं घर के कामों में व्यस्त थी। चोर! चोर! शोर सुनकर मैं बेडरूम की खिड़की से झाँककर देखने लगी। एक लड़का तेजी से दौड़ता हुआ गली में दाखिल हुआ उसके पीछे तीन लोग थे जिसमें से एक मंदिर का पुजारी था, सब दौड़ते हुये चिल्ला रहे थे, "पकड़ो,पकड़ो चोर है काली माँ का टिकुली(बिंदी) चुर



हमारे त्यौहार और हमारी मानसिकता

रहम करे अपनी प्रकृति और अपने बच्चो पर , आप से बिनम्र निवेदन है ना मनाया ऐसी दिवाली गैस चैंबर बन चुकी दिल्ली को क्या कोई सरकार ,कानून या धर्म बताएगा कि " हमे पटाखे जलने चाहिए या नहीं?" क्या हमारी बुद्धि और विवेक बिलकुल मर चुकी है ? क्या हममे सोचने- समझने की शक्ति ही नहीं बची जो हम सम



लेख :- MeToo एक अच्छा हो सकता है ।

आरोप प्रत्यारोप के बीच में me too का जो मुख्य उद्देश्य था, वह लोगों की सोच और फालतू बहसबाज़ी के बीच खो गया ।अभी अभिनेत्रियों ने पहल की है, इसलिए यह गलत लिया जा रहा है ।जो बड़े पद पर हैं इसका यह निहतार्थ नहीँ की वो साफ छवि के ही हैं , साहस का कार्य तो है ही क्योंकि आरोप लगाने के साथ आप की भी इज्जत की ब



अगर पुरानी मम्मी होतीं...

https://amitnishchhal.blogspot.com/?m=1 मकरंदअगर पुरानी मम्मी होतीं... ✒️बैठी सोच रही है मुनिया, मम्मी की फटकार कोदुखी बहुत है कल संध्या से, क्या पाती दुत्कार वो?अगर पुरानी मम्मी होतीं...अगर पुरानी मम्मी होतींक्या वो ऐसे डाँट सुनातीं?बात-बात पर इक बाला कोकह के क्या वह बाँझ बुलातीं?पापा जो अब च



दिल तो बच्चा है जी

ज़िंदगी हर पल एक चलचित्र की तरह अपना रंग रूप बदलती रहती है।है न , जैसे चलचित्र में एक पल सुख का होता है तो दुसरा पल दुःख का ,फिर अगले ही पल कुछ ऐसा जो हमे अचम्भित कर जाता है और एक पल के लिए हम सोचने पर मजबूर हो जाते है कि "क्या



" बृद्धाआश्रम "बनाम "सेकेण्ड इनिंग होम "

" बृद्धाआश्रम "ये शब्द सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते है। कितना डरावना है ये शब्द और कितनी डरावनी है इस घर यानि "आश्रम" की कल्पना। अपनी भागती दौड़ती ज़िन्दगी में दो पल ढहरे और सोचे, आप भी 60 -65 साल के हो चुके है ,अपनी नौकरी और घर की ज़िम्मेदारियों से आज़ाद हो चुके है। आप के



हमारी प्यारी बेटियाँ

"बेटियाँ "कहते है बेटियाँ लक्ष्मी का रूप होती है ,घर की रौनक होती है। ये बात सतप्रतिस्त सही है। इसमें कोई दो मत नहीं हो सकता कि बेटियाँ ही इस संसार का मूल स्त



नूतन बनाम पुरातन

नूतन को पुरातन से हमेशा शिकायत रही है, आज भी है। इसके बावजूद कि पुरातन से ही नूतन का उद्भव हुआ है। मजेदार बात यह है कि नूतन को यह बात पता है, इसके बावजूद भी..। बात अगर केवल शिकायत तक सीमित रहती तो भी ठीक था, बात अब दोषारोपण तक पहुंच चुकी है। दोषारोपण इसलिए क्योंक



खाप की माप

खाप की माप✒️लगा बैठे बिना ही मन, सँभलते राह में साथीदिलों पर ज़ोर किसका है, कहो किसका कभी भी था?मगर ललकार सहने की, कभी सोची नहीं शायदयुगल को बाँध ठूँठों में, अवज्ञा खाप का जो था।ज़मीं थी वासनाओं की, कमी कब यातनाओं की?कि निर्मम हाथ में चाबुक, दुसूती शर्ट था उसका;लगे थे काट खाने को, अभी से ही लगे कहनेकि



कन्हैया के जन्मदिन पर हम विराजे है काशी के गोकुल धाम

https://akankshasrivastava33273411.wordpress.com/ नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैयालाल की.... छैल छबीला,नटखट,माखनचोर, लड्डू गोपाल,गोविंदा,जितने भी नाम लिए जाए सब कम है। इनकी पहचान भले अलग अलग नामो से जरूर की जाए मगर अपने मोहने रूप श्याम सलौने सबको मंत्र मुग्ध कर लेते ह



हाई डिमांड "बहू-बेटी जैसी"????

आकांक्षा श्रीवास्तव। .....?????"बहू बेटी जैसी चाहिए???? क्या हुआ आप भी भौचक्के रह गए न ,भइया आजकल अलग अलग तरह कि डिमांड शुरू हो गयी है। यह सुनते मेरे मन मे भी लाखों प्रश्न उमड़ते बादलों की तरह गरजने लगे कि ये कैसी डिमांड??? बहू- बेटी जैसी.???आख़िर एक स्त्री पर इतना बड़ा प्रहार क्यों???? आख़िर एक बहू को



एक विवाह ऐसा भी

शादी ....शादी वो है जिसे लोग एक खुशी के लड्डू से जोड़ रखे है। इतना ही नही यहाँ तक यह भी कहा जाता है जो खाए वो भी ,जो न खाए वो भी पछताए। आज मेरी कहानी शादी के ऊपर ही आधारित है एक ऐसा विवाह जहाँ खुशियों की लरी लगी हुई थी। लेकिन ऐसा क्या हुआ उस शादी में आप यह लेख पूर



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