पूर्व प्रधान मंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी जी को अर्पित श्रद्धा सुमन

17 अगस्त 2018   |  शोभा भारद्वाज   (110 बार पढ़ा जा चुका है)

पूर्व प्रधान मंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी जी को अर्पित श्रद्धा सुमन

पूर्व प्रधान मंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी को अर्पित श्रद्धा सुमन


डॉ शोभा भारद्वाज


स्वर्गीय प्रथम प्रधान मंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू ने संसद में अटल जी के पहले भाषण पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था एक दिन अटल देश के प्रधान मंत्री पद पर पहुंचेगे |श्री अटल जी एक ऐसे प्रधान मंत्री थे उनके मन में किसी के लिए भेदभाव नहीं था वह सबके थे उनके चुनाव क्षेत्र में मुस्लिम समाज की लम्बी कतारें एवं मुस्लिम महिलाएं विशेष रूप से उन्हें वोट देने आती थी | उनके राजनीतिक जीवन की चादर में रत्ती भर भी दाग नहीं है वह उत्तम कोटि के स्टेट्समैन थे | उन्हें कई सम्मानों से सम्मानित किया गया 1992 में पद्म विभूषण ,1994 में लोकमान्य तिलक पुरूस्कार ,इसी वर्ष उन्हें श्रेष्ठ सांसद और गोविन्द बल्लभ पंत सम्मान दिया गया| उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न के सम्मान से सम्मानित श्री अटल जी नें पाँच बज कर पाँच मिनट 16 अगस्त 2018 को सदैव के लिए आँखें मूंद ली वह असार संसार से विदा हो गये लेकिन पीछे अपनी अमर गाथा छोड़ गये जो इतिहास के पन्नों पर स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगी |


25 दिसम्बर 1924 को श्री अटल बिहारी का जन्म ग्वालियर में हुआ उनके पिता पंडित कृष्ण बिहारी पेशे से अध्यापक थे,माता का नाम कृष्णा था पिता पेशे से अध्यापक थे | अटल जी ने बी.ए की परीक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज से पास की |कानपुर के डी.ए.वी. से एम.ए राजनीतिशास्त्र प्रथम श्रेणी से पास किया उन्होंने एल.एल.बी की पढ़ाई शुरू की लेकिन वह निष्ठा से आरएसएस से जुड़ गये| महात्मा गांधी के आह्वान पर उन्होंने छात्रों का नेतृत्व करते हुए 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लिया 23 दिन तक आगरा की बच्चा जेल में रहे | वह भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे , जनसंघ के अध्यक्ष पद को सुशोभित किया था | अटल जी ने एक पत्रकार के रूप में राष्ट्रधर्म ,पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि पत्र, पत्रिकाओं का सम्पादन किया वह पहले एक पत्रकार ,हिंदी के कवि थे राजनीतिक जीवन में वह एवं उत्तम कोटि के वक्ता थे | उन्हें देखने उनके भाषण सुनने के लिए श्रोता दूर –दूर से इकठ्ठे होते थे उनका इंतजार करते एवं मन्त्र मुग्ध हो कर उनको सुनते थे उनकी भाषण कला बेजोड़ थी |


आरएसएस के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रह कर देश की सेवा का संकल्प लिया |अपनी मेहनत एवं लगन के बल पर वह सांसद से विदेश मंत्री एवं प्रधान मंत्री पद पर पहुंचे | लोकसभा मं पूर्ण बहुमत न मिलने की स्थिति में उन्होंने गठ्बन्धन सरकारों के कामकाज की चलाने के लिए अपनी विचारधारा से हट कर कौमन मिनिमम प्रोग्राम द्वारा पहले गैर कांग्रेसी प्रधान मंत्री पद को सुशोभित किया उन्हीं के नेतृत्व का परिणाम से एनडीए का गठन किया गया था यह 24 दलों का गठ्बन्धन था जिसमें उन्होंने विभिन्न विचार धारा एवं कार्य शैली वाले क्षेत्रीय दलों को जोड़ा दलों को राष्ट्रीय राजनीति में आने का अवसर मिला |


स्वर्गीय पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा जी द्वारा घोषित एमरजेंसी में अटल जी भी अन्य कांग्रेस विरोधी नेताओं के साथ जेल गये उन्हें श्री आडवानी जी के साथ बेंगलौर जेल में रखा गया |जेल में बंद विभिन्न विचारधाराओं वाले राजनीतिक कैदी इंदिरा जी के खिलाफ संगठित हो गये सबने मिल कर जनता दल का गठन कर चुनाव लड़ा अटलजी की सलाह पर जनसंघ का जनता दल में विलय किया गया उस दिन वह और श्री अडवानी जी बहुत उदास थे चुनाव के परिणाम , इंदिरा जी भी अपनी सीट बचा नहीं सकीं जनता दल को पूर्ण बहुमत मिला मोरारजी देसाई के नेतृत्व में (1977 ) केंद्र में सरकार का गठन किया गया अटल जी देश के विदेश मंत्री बने यह पद उनकी रूचि के अनुकूल पद था उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिवेशन में पहली बार हिंदी में भाषण दिया अभी तक सभी विदेश मंत्री अंग्रेजी में भाषण देते थे तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया गया | 1962 भारत चीन के युद्ध के बाद रिश्ते खराब हो चुके थे उन्होंने रिश्तों को स्थिर किया |


बाजपेयी जी नौं बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए उन्होंने आडवाणी जी के साथ मिल कर ‘भारतीय जनता पार्टी’ की नीव रखी | 1986 में वह राज्यसभा के सदस्य बने | 16 मई 1996 , भाजपा लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी थी लेकिन उनके पास सरकार बनाने का बहुमत नहीं था | तत्कालीन राष्ट्रपति श्री शंकर दयाल शर्मा से वह अपने दल का नेतृत्व करते हुए मिलने गये उन्होंने उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया अटल जी ने किसी भी तरह के जोड़ तोड़ से सरकार बनाने की कोशिश नहीं की 1 जून को उनकी तेरह दिन की सरकार विश्वास मत में वोटिंग के दौरान एक वोट से गिर गयी उन्होंने त्याग पत्र दे दिया और कहा वह लोकसभा में मजबूत विपक्षी दल की भूमिका में रहेंगे| 1998 के आम चुनावों में सहयोगी दलों के साथ लोकसभा मे बहुमत सिद्ध कर वह फिर से प्रधान मंत्री बने लेकिन तमिलनाडू की मुख्यमंत्री जयललिता के दल (एआईएडीएम) के द्वारा समर्थन वापिस लेने पर सरकार गिर गयी एक बार फिर से आम चुनाव हुए ,वह फिर से प्रधान मंत्री बने उनका कार्यकाल 19 मार्च 1998 से मई 2004 तक रहा | प्रधानमन्त्री का कार्यकाल पूरा होने के बाद चुनाव में एनडीए हार गयी अटल जी सर्व मानी नेता थे वह विपक्ष में बैठे लेकिन अस्वस्थता के कारण उन्होंने सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लिया |


अपने कार्यकाल में अटल जी ने पाकिस्तान से मित्रता बढ़ाने की कोशिश की उन्होंने दिल्ली लाहौर बस सेवा ‘सदाय सरहद’ शुरू की वह बस द्वारा महत्व पूर्ण लोगों का प्रतिनिधि मंडल साथ लेकर स्वयं भी लाहौर गये | पाकिस्तान में जनता की चुनी हुई नवाज शरीफ साहब की सरकार थी उन्होंने उनका स्वागत किया गया वह 24 घंटे पाकिस्तान में रहे पाकिस्तानी जनता ने खुले दिल से उनका स्वागत किया | अटल जी का पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ाने का राजनीतिक कदम था उन्होंने वहाँ की जनता को सम्बोधित करते हुए कहा इतिहास बदला जा सकता है लेकिन भूगोल बदला नहीं जा सकता आप दोस्त बदल सकते हैं लेकिन पड़ोसी बदल नहीं सकते हमें अच्छे पड़ोसी की तरह रहना चाहिए, पर जनरल मुशर्रफ पाक सेना के साथ मिल कर कारगिल में युद्ध के अपने मंसूबे बना रहे थे कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना की हार हुई वह संकट की घड़ी में चट्टान की तरह अटल रहे युद्ध के समय भी अटल जी ने लाहौर बस सेवा बंद नहीं की लेकिन 13 दिसम्बर 2001 में संसद परिसर में पाकिस्तानी आतंकियों ( फिदायीन हमला ) द्वारा किये गये अटैक के बाद रोका गया |


कूटनीतिकता का परिचय देते हुए उन्होंने आगरा शिखर बैठक में पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष एवं राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को भी आमंत्रित किया जबकि कारगिल युद्ध के वही मास्टर माइंड थे |


उनका एक महत्वपूर्ण कार्य युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के शव को उनके गावं या शहर जहाँ के वह निवासी हैं पहुंचाना है |सम्मान पूर्वक तिरंगे से लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर उनके निवास पर पहुंचता है भारी भीड़ नारे लगाती हुई शव यात्रा में शामिल होती है देश का शहीद के परिवार से साक्षत्कार होता है कई बार दुधमुहे बच्चे को अपने पिता को मुखाग्नि देते देख कर हर आँख़ें भर आती हैं देश की रक्षा की कीमत समझ में आती है कैसे हमारी सेना निरंतर आतंकियों से लड़ रही है |शहीद के परिवार को भी तुरंत आर्थिक सहायता दी जाती हैं|


कश्मीर नीति पर वह जम्हूरियत ,इंसानियत और कश्मीरियत के समर्थक थे | जिससे अलगाव वादी भी उनका सम्मान करते थे |


उन्होंने अमेरिका के साथ दोस्ती बढ़ाई लेकिन गुटनिरपेक्षता की नीति के समर्थक रहे उन्होंने अफ्रिका ,पश्चिमी एशिया एवं समाजवादी देशों से भी मधुर सम्बन्ध बनाये |उनका सबसे बड़ा योगदान ‘स्माईलिंग बुद्धा’ है |पोखरन में गुपचुप ढंग से दूसरा परमाणु परीक्षण इस तरह से किया गया जिसकी विश्व को भनक तक नहीं लगी जब अटल जी ने विश्व को सूचित किया परमाणु परिक्षण शान्ति के लिए किया गया है भारत पर कई प्रतिबन्ध लगाए गये लेकिन अटल जी ने दृढता से परिस्थिति का मुकाबला किया रहे प्रतिबंधों के बावजूद भी दो वर्ष बाद अमेरिकन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भारत की यात्रा की अमेरिका से हमारी नजदीकियाँ बढ़ती जा रही हैं | आज वह हमारे बीच नहीं हैं वह ऐसी शख्शियत थे जिनका विपक्ष भी सम्मान करता था उनकी समालोचना चुटीले व्यंगों पर सदन ठहाके लगाता था |उत्तम स्टेट्समैन के लिए आज हर भारत वासी की आँखों में आंसू हैं यही उनके लिए श्रद्धा सुमन हैं |

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रेणु
20 अगस्त 2018

आदरणीय शोभा जी ,बहुत ही सारगर्भित लेख है आपका ।दिवंगत नेता के विराट व्यक्तित्व की पहचान यही है कि उनके जाने से rajnainik खेमा तो सूना हुआ ही उससे ज्यादा शोक साहित्यिक जगत और आम लोगों में व्याप्त हो गया ।विनम्र श्रद्धांजलि आदरणीय अटल जी को ।शत शत नमन !!!!!

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