एक विवाह ऐसा भी

02 सितम्बर 2018   |  आकांक्षा श्रीवास्तव   (76 बार पढ़ा जा चुका है)

शादी ....शादी वो है जिसे लोग एक खुशी के लड्डू से जोड़ रखे है। इतना ही नही यहाँ तक यह भी कहा जाता है जो खाए वो भी ,जो न खाए वो भी पछताए। आज मेरी कहानी शादी के ऊपर ही आधारित है एक ऐसा विवाह जहाँ खुशियों की लरी लगी हुई थी। लेकिन ऐसा क्या हुआ उस शादी में आप यह लेख पूरा जरूर पढ़िएगा। दिल्ली के शर्मा जी ,उनके इकलौते बेटे की शादी पड़ गयी। आज कल तो लोग प्यार मोहब्बत के चक्कर मे शादी के ख्वाब भी बड़ी तेजी से बुनते है। कुछ यूही हुआ शर्मा जी के बेटे पूरव के साथ। जैसे घर वालो ने उसकी शादी तय की उसने लड़की को सामने देखने की चाह रख दी। घर परिवार वालो ने आपसी सहमति के साथ राधिका और पूरव को मिलने की सहमति दे दी। दोनों एक रेस्टूरेंट में मिले,पूरव राधिका को देखते मानो खुशी से झूम उठा हो। राधिका अभी भी बी नार्मल व्यवहार कर रही थी। पूरव घर आते माँ से जल्दी शादी करने को कह दिया। बेटे की खुशी देख माँ बाप भी लड़की वालों से जल्दी करने की बात तय कर ली ।अब शादी व्याह में तो समय लगना तो लाज़मी ही होता है।जनाब पूरव को कौन समझाता। पूरव ने राधिका को शादी के चार माह एक हफ्ते पहले से बात करना शुरू कर दिया। हर पल वो उसकी खूबसूरती की तारीफ करता। हर पल उसके सुकून की बात करता ...मानो पूरव को कितनी ज्यादा जल्दी हो शादी की। इन्ही दौरान पूरव को सिंगापुर जाना पड़ गया। उसने राधिका को भी पूछ लिया क्या तुम चलोगी मेरे साथ। राधिका ने जाने से साफ मना कर दिया। पूरव ने सोचा शायद ये सही न हो अभी वो सिंगापुर अपने ऑफिस के काम से चला गया। इधर राधिका दिनोरात रोती,उधर पूरव राधिका को लेकर हजारो सपने बुनता जिसका कोई सीमा नही। आफिस में बैठी हुई हर लड़की उसे राधिका दिखती। हाहाहा आप सोच रहे होंगे कि ऐसा तो फिल्मों में ही होता है,नही जनाब कभी कभी हकीकत भी कुछ होता है। कुछ उन्ही फिल्मी अंदाज में पूरव की कहानी भी होती जा रही थी। पूरव आज सिंगापुर से तीन माह के बाद लौट रहा था...अचानक उसे विवाह पिक्चर का गाना याद आ गया पूरव मुस्कुराते हुए गाना देखने लगा...हमारी शादी में अभी बाकी है हफ्ते चार...इस गाने को सुनते ही पूरव के भी दिल मे ये बात आ गयी क्यों न राधिका भी मुझे एयरपोर्ट पर लेने आए। फिर पूरव माथे को ठोकते हुए बोला मैं भी न ...। पूरव एयरपोर्ट से घर आ गया। लगभग सारी तैयारियां हो ही चुकी थी। आखिर वो मिलन की जल्दी आ ही गयी, जिस मिलन के लिए पूरव ने हजारो सपने राधिका के नाम कर दिए। शादी की धूम धाम...भीड़ भाड़ में आज पूरव की एक बार भी राधिका से बात न हो पाई । पूरव बेहद बेचैन था। उसे लगा अब तो राधिका के साथ ही तो रहना है ,वो भी तो व्यस्त हो गी। इतना सोच कर पूरव भी खुद की शादी खूब एन्जॉय करने लगा। खूब डांस भी किया...,बारात आख़िर में मेर्रिज हाल पहुँची.,द्वार चार लगते ही पूरव को स्टेज पर बैठाया गया। पूरव का मन नही लग रहा था उसे तो उस लड्डू की जल्दी थी जो उसे बेताब कर रखा था। पूरव खुशी के मारे समझ नही पा रहा था,बार बार इन्ही ख्यालो में खोया था कि राधिका आज तो बेहद खूबसूरत लग रही होगी। उन परियो की तरह जो बेहद खूबसूरत होती है। अचानक घराती में कुछ रंग फिके ओर परेशानी सी दिखने लगी। पूरव के मा बाप राधिका के मॉ बाप से उनकी परेशानी का कारण जानना चाहा। राधिका के माँ बाप पूरव के माँ बाप के पैर पकड़ रोने लगे। पूरव के माँ बाप समझ नहीं पाए आखिर क्या बात है, उनकी विनती करने पर जब उन्हें वो झटका लगा तो वो अपने बेटे पूरव को स्टेज की ओर देखें....पूरव बेहद खुशी के साथ राधिका का इंतजार करने लगा। राधिका के न आने पर पूरव के मन मे भी कुछ चिंता हुई आखिर क्या बात है? क्यों सन्नाटा हो रहा। धीरे धीरे रिस्तेदारो के आगे माँ बाप ओर राधिका के माँ बाप भी हाथ जोड़ रिश्तेदार से विदाई करने लगे। पूरव को शक हुआ उसने झट से स्टेज से उतर राधिका के पास जाने की बात कही। राधिका की माँ पूरव का पैर पकड़ रोने लगी...। आखिर क्यों ऐसा हुआ? ऐसी क्या बात हो गयी जो इतनी खुशी के बीच अचानक तेजी से सन्नाटा पसरने लगा?पूरव ने उनसे कारण पूछा, तब उन्होंने राधिका की चिट्ठी पूरव को थमाई ,जिसे पूरव पढ़ते ही जमीन पर गिर गया। उस चिट्ठी में लिखा था; पूरव मुझे माफ़ करना। मुझे तुम्हारे साथ ऐसा करना सही नही लगरहा। हो सके तो मुझे माफ़ करना जो मैं तुम्हे इस शादी की बात मना न कर सकी। क्योंकि मैं मजबूर थी.. मेरे माँ बाप ने लड़का अच्छा और घर परिवार अच्छा देख शादी तुम्हारे साथ तय कर दी । मगर पूरव किसी ने भी ये न जानना चाहा कि मैं कितनी खुश हूं इस शादी से। जब तुम भी मिलने की चेष्टा किये तो मुझे लगा शायद तुमसे कह पाऊ मगर तुम्हारी खुशी को देख मैं कुछ कह न सकी। ऐसे करते करते मैं बहुत बार तुमसे अपने दिल की बात कहना चाही मगर तुमने कभी सुनने की कोशिश न की। हार कर मैंने ये फैसला लिया, जो मेरे जीवन के लिए मेरी खुशियों के लिए बेहद जरूरी है। पूरव में साहिल से प्यार करती हूं,हम दोनों ने कोर्ट मेर्रिज भी कर ली है। मैं ये बात माँ पापा को बहुत बार समझने की कोशिश की मगर वो समझने की कभी कोशिश नही किये। मैं क्या करती पूरव ...। जानती हूं तुम आज बेहद टूट जाओगे मगर मैं क्या करूँ तुमने भी कभी मुझे समझने के बजाए सिर्फ और सिर्फ मेरे खूबसूरती लिबास से दिल लगा लिया। तुमने भी मेरे दिल की आवाज सुनना पसंद नही किया। मैं आप सब से दूर ऑस्ट्रेलिया जा रही हु। जिसे मैं चुनी हू वो भी नेक इंसान है,जो मेरे इस खूबसूरती लिबास के साथ मेरे दिली इच्छा को भी सुनता समझता है। देखा पढ़ा आपने, ऐसे विवाह का क्या?? जानती हूं कुछ क्या 83% लोग राधिका को ही गलत कहेंगे। लेकिन किसी ने राधिका की ख़ुशी का जरा भी अंदाजा न लगाया। आखिर वो जिसे अपना हमसफ़र मानती है,उसके साथ व्याह न कर किसी ओर के साथ..ये जबरदस्ती पहले के समय मे जरूर होती थी, मगर अब नही। शादी एक समझौता नही,की जिससे चाहा कर दी शादी। दिल का मिलन, ओर जीवन भर की खुशी का समझौता होता है। यदि जल्द ही ये बात लोगो ने समझना शुरू कर दिया तो शायद ऐसे केस सुनने में भी कम आएगा। आकांक्षा श्रीवास्तव

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