राधाष्टमी:----- आचार्य अर्जुन तिवारी

17 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (137 बार पढ़ा जा चुका है)

राधाष्टमी:----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में भाद्रपद मास बहुत ही विशेष स्थान व महत्व रखता है | अनेक व्रत , पर्व व देवों के अवतरण दिवस होने के कारण ही यह मास विश्ष महत्त्वपूर्ण हो जाता है | बलराम जी का जन्मोत्सव हलछठ हो या कन्हैया जी की जन्माष्टमी या फिर गणेश भगवान का अवतरण दिवस गणेश चतुर्थी सब भाद्रपद मास में ही मनाये जाते है | इसी क्रम में भाद्रपद शुक्लपक्ष की अष्टमी को मध्यान्ह काल में चौरासी कोसीय ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी , रासविहारिणी आद्यशक्ति भगवती राधा जी का अवतरण यज्ञभूमि से हुआ है | राधा जी का नाम स्मरण आते ही उनके दिव्य प्रेम एवं त्याग की कथायें कानों में गूंजने लगती हैं एवं हृदय आनंदित हो उठता है | राधा जी स्वयं प्रकृति स्वरूपा आद्याशक्ति हैं | संसार को अनेकों रीति - नीति की शिक्षा देने के साथ ही महाभारत के युद्धस्थल से संसार के प्राणियों को अद्भुत जीवन दर्शन का उपदेश करते हुए दिव्य गीता का ज्ञान प्रदान करने वाले "योगेश्वर श्री कृष्ण" की पूजा सम्पूर्ण विश्व में होती है , परंतु श्री राधे जू सरकार वह शक्ति हैं जिनकी पूजा स्वयं कन्हैया जू सरकार करते हैं | जो भी मनुष्य राधा जी की पूजा किये बिना भगवान श्री कृष्ण का सानिध्य चाहते हैं वे दिवास्वप्न देख रहे हैं | प्रेम क्या है ?? प्रेम कैसे किया जाता है ?? और प्रेम की पराकाष्ठा त्याग है ऐसा अलोकिक उदाहरण यदि आपको कहीं देखने को मिलेगा तो वह कृष्णप्रिया राधे सरकार जू के दिव्य चरित्र में ही देखने को मिल सकता है , संसार के सभी ग्रंथों एवं अनेकानेक चरित्रों को पढने के बाद प्रेममयी , प्रेममूर्ति श्री राधा जी का चरित्र ही सर्वोपरि मिलेगा | श्री राधे जू सरकार ने समस्त मानव जाति को यह शिक्षा देने का प्रयास किया है कि प्रेम तभी सफल हो सकता है जब निष्कपट हो एवं उसमें त्याग की भावना हो |* *आज के युग में लोग अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं | आज का प्रेम एवं आज के प्रेमी कैसे हैं यह बताने की आवश्यकता नहीं हैं | आज के युग में प्रेम कम शारीरिक आकर्षण के प्रति मोह अधिक है | आज पार्कों में या किसी अन्य सार्वजनिक स्थानों पर प्राय: किशोरवय प्रेमी जोड़ों को देखा जा सकता है जो अपने प्रेम में इस हद तक डूबे हुए होते हैं कि उन्हें आसपास की दुनियां की कोई फिक्र नहीं होती | क्या यही प्रेम है ??? मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि इसे प्रेम नहीं बल्कि निर्लज्जता की पराकाष्ठा ही कहना उचित होगा | एक तरफ श्री राधा जी ने प्रेम में त्याग का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कन्हैया के मथुरा जाने के समय उनसे शिकायत तक नहीं की वहीं आज जब किसी प्रेमी की बात तथाकथित प्रेमिका नहीं मानती है तो उसके मुंह पर तेजाब फेंक दिया जाता हे या जब प्रेमिका अपने प्रेमी को नहीं प्राप्त कर पाती है तो उसके विरुद्ध पुलिस थाने में जाकर स्वयं के शोषण का आरोप सिद्ध करने लगती है | कुछ दिन पहले साथ - साथ जीने मरने की कसमें खाने वाले ये कलियुगी प्रेमी शायद प्रेम करते ही नहीं बल्कि मात्र शारीरिक आकर्षण से बंधे होते हैं ! क्योंकि प्रेम वही सच्चा होता है जिसमें कुछ भी पाने की किंचित मात्र आकांक्षा न होकर सिर्फ देने का भाव हो | और यही आदर्श राधारानी सरकार ने प्रस्तुत किया था |* *जिसके बिना हमारे सांवले सरकार अधूरे हैं , जिनकी पूजा के बिना कृष्ण जी कोई पूजा नहीं स्वीकार करते हैं , ऐसी प्रेममयी राधिका सरकार के "अवतरण दिवस" "राधाष्टमी" की प्रेमपूर्ण बधाई |*

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