राधाष्टमी:----- आचार्य अर्जुन तिवारी

17 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (122 बार पढ़ा जा चुका है)

राधाष्टमी:----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में भाद्रपद मास बहुत ही विशेष स्थान व महत्व रखता है | अनेक व्रत , पर्व व देवों के अवतरण दिवस होने के कारण ही यह मास विश्ष महत्त्वपूर्ण हो जाता है | बलराम जी का जन्मोत्सव हलछठ हो या कन्हैया जी की जन्माष्टमी या फिर गणेश भगवान का अवतरण दिवस गणेश चतुर्थी सब भाद्रपद मास में ही मनाये जाते है | इसी क्रम में भाद्रपद शुक्लपक्ष की अष्टमी को मध्यान्ह काल में चौरासी कोसीय ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी , रासविहारिणी आद्यशक्ति भगवती राधा जी का अवतरण यज्ञभूमि से हुआ है | राधा जी का नाम स्मरण आते ही उनके दिव्य प्रेम एवं त्याग की कथायें कानों में गूंजने लगती हैं एवं हृदय आनंदित हो उठता है | राधा जी स्वयं प्रकृति स्वरूपा आद्याशक्ति हैं | संसार को अनेकों रीति - नीति की शिक्षा देने के साथ ही महाभारत के युद्धस्थल से संसार के प्राणियों को अद्भुत जीवन दर्शन का उपदेश करते हुए दिव्य गीता का ज्ञान प्रदान करने वाले "योगेश्वर श्री कृष्ण" की पूजा सम्पूर्ण विश्व में होती है , परंतु श्री राधे जू सरकार वह शक्ति हैं जिनकी पूजा स्वयं कन्हैया जू सरकार करते हैं | जो भी मनुष्य राधा जी की पूजा किये बिना भगवान श्री कृष्ण का सानिध्य चाहते हैं वे दिवास्वप्न देख रहे हैं | प्रेम क्या है ?? प्रेम कैसे किया जाता है ?? और प्रेम की पराकाष्ठा त्याग है ऐसा अलोकिक उदाहरण यदि आपको कहीं देखने को मिलेगा तो वह कृष्णप्रिया राधे सरकार जू के दिव्य चरित्र में ही देखने को मिल सकता है , संसार के सभी ग्रंथों एवं अनेकानेक चरित्रों को पढने के बाद प्रेममयी , प्रेममूर्ति श्री राधा जी का चरित्र ही सर्वोपरि मिलेगा | श्री राधे जू सरकार ने समस्त मानव जाति को यह शिक्षा देने का प्रयास किया है कि प्रेम तभी सफल हो सकता है जब निष्कपट हो एवं उसमें त्याग की भावना हो |* *आज के युग में लोग अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं | आज का प्रेम एवं आज के प्रेमी कैसे हैं यह बताने की आवश्यकता नहीं हैं | आज के युग में प्रेम कम शारीरिक आकर्षण के प्रति मोह अधिक है | आज पार्कों में या किसी अन्य सार्वजनिक स्थानों पर प्राय: किशोरवय प्रेमी जोड़ों को देखा जा सकता है जो अपने प्रेम में इस हद तक डूबे हुए होते हैं कि उन्हें आसपास की दुनियां की कोई फिक्र नहीं होती | क्या यही प्रेम है ??? मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि इसे प्रेम नहीं बल्कि निर्लज्जता की पराकाष्ठा ही कहना उचित होगा | एक तरफ श्री राधा जी ने प्रेम में त्याग का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कन्हैया के मथुरा जाने के समय उनसे शिकायत तक नहीं की वहीं आज जब किसी प्रेमी की बात तथाकथित प्रेमिका नहीं मानती है तो उसके मुंह पर तेजाब फेंक दिया जाता हे या जब प्रेमिका अपने प्रेमी को नहीं प्राप्त कर पाती है तो उसके विरुद्ध पुलिस थाने में जाकर स्वयं के शोषण का आरोप सिद्ध करने लगती है | कुछ दिन पहले साथ - साथ जीने मरने की कसमें खाने वाले ये कलियुगी प्रेमी शायद प्रेम करते ही नहीं बल्कि मात्र शारीरिक आकर्षण से बंधे होते हैं ! क्योंकि प्रेम वही सच्चा होता है जिसमें कुछ भी पाने की किंचित मात्र आकांक्षा न होकर सिर्फ देने का भाव हो | और यही आदर्श राधारानी सरकार ने प्रस्तुत किया था |* *जिसके बिना हमारे सांवले सरकार अधूरे हैं , जिनकी पूजा के बिना कृष्ण जी कोई पूजा नहीं स्वीकार करते हैं , ऐसी प्रेममयी राधिका सरकार के "अवतरण दिवस" "राधाष्टमी" की प्रेमपूर्ण बधाई |*

अगला लेख: नारी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
04 सितम्बर 2018
!! भगवत्कृपा हि के वलम् !! *भगवान श्री कृष्ण का चरित्र इतना अलौकिक है कि इसको जितना ही जानने का प्रयास किया जाय उतने ही रहस्य गहराते जाते हैं , इन रहस्यों को जानने के लिए अब तक कई महापुरुषों ने प्रयास तक किया परंतु थोड़ा सा समझ लेने के बाद वे भी आगे समझ पाने की स्थिति में ही नहीं रह गये क्
04 सितम्बर 2018
04 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का अवतार पूर्णावतार कहा जाता है क्योंकि वे १६ कलाओं से युक्त थे | "अवतार किसे कहते हैं यह जानना परम आवश्यक है | चराचर के प्रत्येक जड़ - चेतन में कुछ न कुछ कला अवश्य होती है | पत्थरों में एक कला होती है दो कला जल में पाई जाती है | अग्नि में तीन कलायें पाई जाती हैं तो वायु में चार क
04 सितम्बर 2018
08 सितम्बर 2018
*सम्पूर्ण सृष्टि नारी एवं पुरुष के संयोग से उत्पन्न हुई है | पुरुष में भी जिसका आचरण अतुलनीय हो जाता है उसे "पुरुषोत्तम" की संज्ञा दी जाती है | सनातन साहित्यों में वैसे तो पुरुषोत्तम शब्द का प्रयोग कई स्थानों पर भिन्न भिन्न चरित्रों के लिए किया गया है , परंतु चर्चा मात्र दो की ही प्राय: होती है | जि
08 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*मानव जीवन में गुरु का कितना महत्त्व है यह आज किसी से छुपा नहीं है | सनातन काल से गुरुसत्ता ने शिष्यों का परिमार्जन करके उन्हें उच्चकोटि का विद्वान बनाया है | शिष्यों ने भी गुरु परम्परा का निर्वाह करते हुए धर्मध्वजा फहराने का कार्य किया है | इतिहास में अनेकों कथायें मिलती हैं जहाँ परिवार / समाज से उ
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*ईश्वर ने सृष्टि की सुंदर रचना की, जीवों को उत्पन्न किया | फिर नर-नारी का जोड़ा बनाकर सृष्टि को मैथुनी सृष्टि में परिवर्तित किया | सदैव से पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली नारी समय समय पर उपेक्षा का शिकार होती रही है | और इस समाज को पुरुषप्रधान समाज की संज्ञा दी जाती रही है | जबकि यह न तो सत्य
03 सितम्बर 2018
07 सितम्बर 2018
भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने महाभारत के युद्ध से पूर्व अर्जुन के लिए थे। भगवान श्री कृष्ण का व्यवहारिक ज्ञान का सार आज भी उन तमाम युवाओं के प्रेरणासोत्र हैं जो इस प्रतियोगी युग में सफलता पाने की कामना रखते है।श्रीकृष्ण द्वारा दी गयी शिक्षा
07 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म में त्यौहारों की कमी नहीं है | नित्य नये त्यौहार यहाँ सामाजिक एवं धार्मिक समसरता बिखेरते रहते हैं | ज्यादातर व्रत स्त्रियों के द्वारा ही किये जाते हैं | कभी भाई के लिए , कभी पति के लिए तो कभी पुत्रों के लिए | इसी क्रम में आज भाद्रपद कृष्णपक्ष की षष्ठी (छठ) को भगवान श्री कृष्णचन्द्र जी के
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*संसार में मनुष्य एक अलौकिक प्राणी है | मनुष्य ने वैसे तो आदिकाल से लेकर वर्तमान तक अनेकों प्रकार के अस्त्र - शस्त्रों का आविष्कार करके अपने कार्य सम्पन्न किये हैं | परंतु मनुष्य का सबसे बड़ा अस्त्र होता है उसका विवेक एवं बुद्धि | इस अस्त्र के होने पर मनुष्य कभी परास्त नहीं हो सकता परंतु आवश्यकता हो
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*सनातन वैदिक धर्म ने मानव मात्र को सुचारु रूप से जीवन जीने के लिए कुछ नियम बनाये थे | यह अलग बात है कि समय के साथ आज अनेक धर्म - सम्प्रदायों का प्रचलन हो गया है , और सनातन धर्म मात्र हिन्दू धर्म को कहा जाने लगा है | सनातन धर्म जीवन के प्रत्येक मोड़ पर मनुष्यों के दिव्य संस्कारों के साथ मिलता है | जी
03 सितम्बर 2018
04 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का अवतार पूर्णावतार कहा जाता है क्योंकि वे १६ कलाओं से युक्त थे | "अवतार किसे कहते हैं यह जानना परम आवश्यक है | चराचर के प्रत्येक जड़ - चेतन में कुछ न कुछ कला अवश्य होती है | पत्थरों में एक कला होती है दो कला जल में पाई जाती है | अग्नि में तीन कलायें पाई जाती हैं तो वायु में चार क
04 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का नाम मस्तिष्क में आने पर एक बहुआयामी पूर्ण व्यक्तित्व की छवि मन मस्तिष्क पर उभर आती है | जिन्होंने प्रकट होते ही अपनी पूर्णता का आभास वसुदेव एवं देवकी को करा दिया | प्राकट्य के बाद वसुदेव जो को प्रेरित करके स्वयं को गोकुल पहुँचाने का उद्योग करना | परमात्मा पूर्ण होता है अपनी शक्त
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत ! अभियुत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ! धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे - युगे !! भगवान श्री कृष्ण एक अद्भुत , अलौकिक दिव्य जीवन चरित्र | जो सभी अवतारों में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने यह घोषणा की कि मैं परमात्मा हूँ
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
बेटा दुनिया से जा चुका था लेकिन मां मानने को तैयार नहीं। वो बेटे के शव को ऑटो में लादकर इंदौर से उज्जैन पहुंच गई। रामघाट के समीप सिद्ध आश्रम के पास शिप्रा किनारे शव लेकर बैठने की जिद करने लगी। इस भरोसे में कि महाकाल जिंदा कर देंगे।ऑटो चालक ने होमगार्ड जवान को इसकी जानकारी
03 सितम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x