ब्राह्मण कौन है :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

27 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (39 बार पढ़ा जा चुका है)

ब्राह्मण कौन है :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि के प्रारम्भ में मनुष्यों की उत्पत्ति हुई मानव मात्र एक समान रहा करते थे , इनका एक ही वर्ण था जिसे "हंस" कहा जाता था | समय के साथ विराटपुरुष के शरीर से चार वर्णों की उत्पत्ति की वर्णन यजुर्वेद में प्राप्त होता है :-- "ब्राह्मणोमुखमासीद् बाहू राजन्या कृता: ! ऊरूतदस्यद्वैश्य: पद्भ्या गुंग शूद्रो अजायत् !! अर्थात विराट पुरुष के मुख से ब्राह्मण , भुजाओं से क्षत्रिय , उदर से वैश्य एवं पैरों से शूद्र की उत्पत्ति भाष्यकारों ने प्रतिपादित किया है | इन चारों ही वर्णों में ब्राह्मण को प्रधान मानते हुए इन्हें हमारे शास्त्रों ने अधिक महत्व दिया है | जिसका कि समय समय पर विरोध भी होता देखा गया है | प्राय: सुनने को मिलता है कि क्या ब्राह्मणकुल में जन्म ले लेने मात्र से कोई ब्राह्मण हो जाता है ?? यह जानने के पहले यह जान लेना परमावश्यक है कि आखिर ब्राह्मण है क्या ?? क्या जीव , शरीर , जाति , ज्ञान , कर्म या धार्मिकता ही ब्राह्मण का परिचय है ?? जी नहीं ! ब्राह्मण इनमें से कुछ भी नहीं है बल्कि ब्राह्मण उसे माना जा सकता है जो आत्मा के द्वैत भाव से युक्त ना हो , जाति गुण और क्रिया से भी युक्त न हो , षडविकारों आदि समस्त दोषों से मुक्त हो , सत्य, ज्ञान, आनंद स्वरुप, स्वयं निर्विकल्प स्थिति में रहने वाला , अशेष कल्पों का आधार रूप , समस्त प्राणियों के अंतस में निवास करने वाला , अन्दर-बाहर आकाशवत संव्याप्त ; अखंड आनंद्वान , अप्रमेय, अनुभवगम्य , अप्रत्येक्ष भासित होने वाले आत्मा का करतल आमलकवत परोक्ष का भी साक्षात्कार करने वाला ! ट काम-रागद्वेष आदि दोषों से रहित होकर कृतार्थ हो जाने वाला | शम-दम आदि से संपन्न ; मात्सर्य , तृष्णा , आशा,मोह आदि भावों से रहित ,दंभ, अहंकार आदि दोषों से चित्त को सर्वथा अलग रखने वाला हो, वही ब्राह्मण है |* *आज चारों वर्णों को इतिहासकारों ने चार जातियों में परिवर्तित कर दिया है | मानवमात्र में वैमनस्यता पैदा करके अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने वालों ने ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य , शूद्र की असलियत जाने बिना इतना ज्यादा भ्रम फैलाया है कि सबके निशाने पर ब्राह्मण ही आ गये हैं | जबकि सभी शास्त्रों / उपनिषदों के रचयिता ब्राह्मणों ने यह कहीं नहीं लिखा कि जन्म से ही ब्राह्मण माना जाय | चाहे गीता में भगवान श्रीकृष्ण का उद्घोष हो या अन्यान्य स्मृतियों के वचन हों प्रत्येक स्थान पर कर्म की ही प्रधानता दर्शाई गयी है | एक ब्राह्मण का क्या कर्म होना चाहिए यह आज के अधिकतर ब्राह्मण भूलते जा रहे हैं यही कारण है कि वे तेजहीन होकर ठोकर खा रहे हैं | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" देख रहा हूँ कि आज मात्र ब्राह्मण ही नहीं अपितु समस्त मानवजाति अपने कर्माचरण को भूलकर विपरीत कर्म करती जा रही है | रही बात ब्राह्मण की तो इतिहास गवाह रहा है कि अन्य वर्णों में जन्म लेकर अनेक विद्वानों ने अपने कर्मों से "ब्राह्मणत्व" को प्राप्त किया है | परंतु आज के युग में ब्राह्मणकुल में जन्म लेकर भा शिखा रखना , यज्ञोपवीत धारण करना लज्जा की बात प्रतीत होती है | आज के समय की यही माँग है कि भारतीय सनातन संस्कृति के हमारे पूर्वजो व ऋषियो ने ब्राह्मण की जो व्याख्या दी है उसमे काल के अनुसार परिवर्तन करना हमारी मूर्खता मात्र होगी | वेदों-उपनिषदों से दूर रहने वाला एवं अपने कर्म में अलिप्त व्यक्ति चाहे जन्म से ब्राह्मण हों या ना हों लेकिन ऋषियों को व्याख्या में वह ब्राह्मण नहीं है | अतः आओ हम हमारे कर्म और संस्कार तरफ वापस बढकर अपने ब्राह्मणत्व को स्थापित करने का प्रयास करें |* *हमारे वेद - पुराणों में वर्ण से ज्यादा कुछ भी नहीं लिखा है | कालान्तर में वर्णों को जातियों में परिवर्तित करने कार्य नव समाज के पुरोधाओं ने सम्पादित किया , जिसका परिणाम हम सब भोग रहे हैं |*

अगला लेख: प्रत्येक नारी है स्कन्दमाता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
15 अक्तूबर 2018
*चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहन |* *कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ||* *महामाई आदिशक्ति भगवती के पूजन का पर्व नवरात्र शनै: शनै: पूर्णता की ओर अग्रसर है | महामाया इस सृष्टि के कण - कण में विद्यमान हैं | जहाँ जैसी आवश्यकता पड़ी है वैसा स्वरूप मैया ने धारण करके लोक
15 अक्तूबर 2018
13 अक्तूबर 2018
*सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च !* *दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे !!* *नवरात्र के चतुर्थ दिवस महामाया कूष्माण्डा का पूजन किया जाता है | "कूष्माण्डेति चतुर्थकम्" | सृष्टि के सबसे ज्वलनशील सूर्य ग्रह के अंतस्थल में निवास करने वाली महामाया का नाम कूष्माण्डा है , जिसका अर्थ है कि :- जि
13 अक्तूबर 2018
20 अक्तूबर 2018
*नवरात्र के छठे दिन मैया कात्यायनी कात्यायन ऋषि के यहाँ कन्या बनकर प्रकट हुईं | नारी का जन्म कन्यारूप में ही होता है इसीलिए सनातन धर्म ने कन्या की पूजा का विधान बनाया है | सनातन धर्म के पुरोधा यह जानते थे कि जिस प्रकार एक पौधे से विशाल वृक्ष तैयार होता है उसी प्रकार एक कन्या ही नारी रूप में परिवर्ति
20 अक्तूबर 2018
28 अक्तूबर 2018
*संसार में पाप और पुण्य दोनों बराबर की संख्या में हैं | इनकी विस्तृत व्याख्या हमारे शास्त्रों - पुराणों में की गई है | यूं तो पाप अनेकों की संख्या में हैं | जुआ, चोरी, झूठ, छल, व्यभिचार, हिंसा आदि सभी पाप हैं | पर सबसे बड़ा पाप कृतघ्नता हैं जिसे सब पापों की जननी कहा जा सकता हैं | इसी के कारण मनुष्य
28 अक्तूबर 2018
20 अक्तूबर 2018
*सनातन धर्म में नारियों का एक महत्वपूर्ण स्थान है | पत्नी के पातिव्रत धर्म पर पति का जीवन आधारित होता है | प्राचीनकाल में सावित्री जैसी सती हमीं लोगों में से तो थीं जिसने यमराज से लड़कर अपने पति को मरने से बचा लिया था | भगवती पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त कर लिया था | भारत की स्त्रियों
20 अक्तूबर 2018
23 अक्तूबर 2018
*हमारे भारत देश में अनेकों महापुरुष हुए हैं जिन्होंने अपने महान गुणों से एक नवीन आदर्श किया है | धर्म को मानने वाले या धारण करने वाले मनुष्यों का सबसे बड़ा गुण होता है क्षम
23 अक्तूबर 2018
27 अक्तूबर 2018
*सनातन धर्म को अलौकिक इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस विशाल एवं महान धर्म में समाज के प्रत्येक प्राणी के लिए विशेष व्रतों एवं त्यौहारों का विधान बनाया गया है | परिवार के सभी अंग - उपांग अर्थात माता - पिता , पति - पत्नी , भाई - बहन आदि सबके लिए ही अलग - अलग व्रत - पर्वों का विधान यदि कहीं मिलता है तो वह
27 अक्तूबर 2018
20 अक्तूबर 2018
*सनातन धर्म में नारियों का एक महत्वपूर्ण स्थान है | पत्नी के पातिव्रत धर्म पर पति का जीवन आधारित होता है | प्राचीनकाल में सावित्री जैसी सती हमीं लोगों में से तो थीं जिसने यमराज से लड़कर अपने पति को मरने से बचा लिया था | भगवती पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त कर लिया था | भारत की स्त्रियों
20 अक्तूबर 2018
20 अक्तूबर 2018
*मानव जीवन में संगति का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है | जिस प्रकार मनुष्य कुसंगत में पड़कर के नकारात्मक हो जाता है उसी प्रकार अच्छी संगति अर्थात सत्संग में पढ़कर की मनुष्य का व्यक्तित्व बदल जाता है | सत्संग का मानव जीवन पर इतना अधिक प्रभाव पड़ता है कि इसी के माध्यम से मनुष्य को समस्याओं का समाधान तो मिल
20 अक्तूबर 2018
22 अक्तूबर 2018
*सनातन धर्म में मनाए जाने वाले प्रत्येक त्योहारों में एक रहस्य छुपा हुआ है | नौ दिन का दिव्य नवरात्र मनाने के बाद दशमी के दिन दशहरा एवं विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है | शक्ति की उपासना का पर्व शारीेय नवरात्रि प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल
22 अक्तूबर 2018
20 अक्तूबर 2018
*एकवेणी जपाकर्ण , पूर्ण नग्ना खरास्थिता,* *लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी , तैलाभ्यक्तशरीरिणी।* *वामपादोल्लसल्लोह , लताकण्टकभूषणा,* *वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा , कालरात्रिर्भयङ्करी॥-------* *नवरात्र की सप्तमी तिथि को देवी कालरात्रि की उपासना का विधान है। पौराणिक मतानुसार देवी क
20 अक्तूबर 2018
22 अक्तूबर 2018
*इस धराधाम पर जब-जब ईश्वर ने अवतार लिया है तब-तब उनकी शक्ति, उनकी माया उनके साथ आई है | यह माया नहीं होती तो अध्यात्म कैसे होता | ईश्वर स्वयं शक्ति को मानते हैं क्योंकि बिना शक्ति के ईश्वर का भी अस्तित्व नहीं है | इसी शक्ति में जब वीर गुण होता है तो यह "महादुर्गा" हो जाती हैं | जब रजोगुण होता है तो
22 अक्तूबर 2018
22 अक्तूबर 2018
*आदिकाल से सनातन धर्म यदि दिव्य एवं अलौकिक रहा है तो उसका कारण हमारे सनातन धर्म के विद्वान एवं उनकी विद्वता को ही मानना चाहिए | संसार भर में फैले हुए सभी धर्मों में सनातन धर्म को सबका मूल माना जाता है | हमारे विद्वानों ने अपने ज्ञान का प्रचार किया सतसंग के माध्यम से इन्हीं सतसंगों का सार निकालकर ग्र
22 अक्तूबर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x