हमारी संस्कृति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

21 दिसम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (38 बार पढ़ा जा चुका है)

हमारी संस्कृति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*संपूर्ण विश्व में यदि कहीं पुण्य भूमि है तो वह हमारा देश भारत है , जहां आध्यात्मिकता अपने उच्च शिखर को प्राप्त करती है | आदिकाल से ही इस देश में धर्म संस्थापकों ने समय-समय पर जन्म या अवतार लेकर के संपूर्ण संसार को सत्य की , आध्यात्मिकता की एवं सनातनता की पवित्र धारा से बारंबार स्नान कराया है | हमारे देश भारत की मिट्टी में राम , कृष्ण , सत्यवादी हरिश्चंद्र , छत्रपति शिवाजी , पृथ्वीराज चौहान , महाराणा प्रताप जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया है | यहीं पर वेदों का विन्यास करने वाले महर्षि वेदव्यास , शुकदेव स्वामी , बाल्मीकि जैसे पुराणवेत्ता प्रकट हुये , तो महाप्रभु चैतन्य , सूरदास , तुलसीदास , मीरा , शबरी जैसे भक्तों ने जन्म लेकर की सनातन की भक्तिमयी धारा को प्रवाहमान किया है | यह सत्य है कि संपूर्ण पृथ्वी पर यदि कोई पुण्यभूमि है तो हमारा देश भारत है , क्योंकि इस पुण्यभूमि पर जीवों बार बार को आना ही पड़ता है | मानवता का विकास एवं मानव जीवन जीने के लिए आवश्यक क्षमा , धृति , दया , शुद्धता आदि का सर्वाधिक विकास हमारे देश भारत में ही हुआ है | हमें गर्व है कि हम ऐसे देश के वासी हैं | हमारे देश की संस्कृति एवं सभ्यता ने संपूर्ण विश्व को नारी का सम्मान करना सिखाया | आज भी संपूर्ण विश्व में यदि नारी का सम्मान कहीं होता है या नारी अपनी मर्यादा में रहती है तो वह हमारा देश भारत ही है | ऐसी संस्कृति सभ्यता एवं मर्यादा आप को अन्यत्र नहीं देखने को मिलेगी |* *आज हमारा देश भारत इतनी दिव्यता होने के बाद भी अपनी संस्कृति सभ्यता एवं मर्यादा को भूलता चला जा रहा है | यह हमारे देश का दुर्भाग्य है की आज सारी मान्यताएं राजनीतिक दलों के द्वारा प्रायोजित राजनीतिक षडयंत्र की भेंट चढ़ती चली जा रही है | राम , रहीम का यह देश कुछ चंद लोगों के चंगुल में कसमसाता हुआ दिख रहा है | आज इस प्रकार यहाँ धार्मिक , सामाजिक मान्यताओं को राजनीति की दृष्टि से देखा जाने लगा है वह आने वाले भविष्य के लिए सुखद नहीं कहा जा सकता है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" देख रहा हूं कि जिस प्रकार पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध में हमारे देश का युवा एवं युवतियां रहन सहन एवं अपने पहनावे को परिवर्तित कर रहे हैं वह समाज को किस दिशा में ले कर जा रहा है इसको बताने की आवश्यकता नहीं है | आए दिन होने वाली घटनाएं इसका प्रमुख कारण कही जा सकती है | हमें आदिकाल से संयमी एवं शांतप्रिय माना जाता रहा है , परंतु आज हमारा संयम एवं शांतिप्रियता समाप्त होती दिख रही है | हमें यह कहने में किंचित भी कष्ट नहीं हो रहा है कि आज हम विलासी एवं सभ्यता रहित जीवन जीने के आदी होते जा रहे हैं जा रहे हैं जो कि हमारी मान्यताओं के विपरीत है |* *यदि हम स्वयं को नहीं जान पा रहे हैं इसका अर्थ यही निकाला जा सकता है कि हमने न तो अपने इतिहास को पढ़ा है और न ही अपने महापुरुषों के आदर्शों को जानने का प्रयास किया | आइये लौट चलें अपने प्राचीन भारत की ओर |*

अगला लेख: अहिंसा परमो धर्म: :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
18 दिसम्बर 2018
*सनातन धर्म में तपस्या का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है | किसी भी अभीष्ट को प्राप्त करने के लिए उसका लक्ष्य करके तपस्या करने का वर्णन पुराणों में जगह जगह पर प्राप्त होता है | तपस्या करके हमारे पूर्वजों ने मनचाहे वरदान प्राप्त किए हैं | तपस्या का वह महत्व है , तपस्या के बल पर ब्रह्माजी सृजन , विष्णु ज
18 दिसम्बर 2018
03 जनवरी 2019
राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच जमकर बहस हुई। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने भाजपा के साढ़े चार साल के शासन के दौरान राज्य में हिंसा की घटनाएं बढ़ने का आरोप लगाया तो वहीं बीजेपी की ओर से अरुण जेटली ने कांग्रेस पर पलटवार किया। आजाद ने जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग करने समेत
03 जनवरी 2019
15 दिसम्बर 2018
*सनातन धर्म इस धरती का सबसे प्राचीन धर्म होने के साथ ही इतना दिव्य एवं विस्तृत है कि इसकी व्याख्या करना संभव नहीं हो सकता | सनातन धर्म के किसी भी ग्रंथ या शास्त्र में मानव मात्र में भेदभाव करने का कहीं कोई वर्णन नहीं मिलता है | आदिकाल से यहाँ मनुष्य कर्मों के अनुसार वर्ण भेद में बंट गया | ब्राम्हण ,
15 दिसम्बर 2018
11 दिसम्बर 2018
*योनियों भ्रमण करने के बाद जीव को इन योनियों में सर्वश्रेष्ठ मानव योनि प्राप्त होती है | मनुष्य जन्म लेने के बाद जीव की पहचान उसके नाम से होती है | मानव जीवन में नाम का बड़ा प्रभाव होता है | आदिकाल में पौराणिक आदर्शों के नाम पर अपने बच्चों का नाम रखने की प्रथा रही है | हमारे पूर्वजों का ऐसा मानना थ
11 दिसम्बर 2018
08 दिसम्बर 2018
*परमात्मा द्वारा बनाई हुई सृष्टि आदिकाल से गतिशील रही है | गति में निरंतरता बनाए रखने के लिए इस संसार की प्रत्येक वस्तु कहीं न कहीं से नवीन शक्तियां प्राप्त करती रहती है | इस संसार में चाहे सजीव वस्तु हो या निर्जीव सबको अपनी गतिशीलता बनाए रखने के लिए आहार की आवश्यकता होती है | किसी भी जीव को अपनी गत
08 दिसम्बर 2018
02 जनवरी 2019
राफेल डील मामले पर लोकसभा में हुई चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कई सवाल खड़े किए और आरोप लगया कि इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झूठ बोला है। राहुल के सवालों को जवाब देने के लिए सत्ता पक्ष से वित्त मंत्री अरुण जेटली खड़े हुए और उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी
02 जनवरी 2019
11 दिसम्बर 2018
*ईश्वर ने मनुष्य को इस संसार में सारी सुख सुविधाएं प्रदान कर रखी है | कोई भी ऐसी सुविधा नहीं बची है जो ईश्वर ने मनुष्य को न दी हो | सब कुछ इस धरा धाम पर विद्यमान है आवश्यकता है कर्म करने की | इतना सब कुछ देने के बाद भी मनुष्य आज तक संतुष्ट नहीं हो पाया | मानव जीवन में सदैव कुछ ना कुछ अपूर्ण ही रहा ह
11 दिसम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x