मृत्युलोक :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

07 जनवरी 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (32 बार पढ़ा जा चुका है)

  मृत्युलोक :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर जन्म लेकर के मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक आने को क्रियाकलाप संपादित करता रहता है एवं अपने क्रियाकलापों के द्वारा समाज में स्थापित होता है | कभी-कभी ऐसा होता है कि मनुष्य जन्म लेने के तुरंत बाद मृत्यु को प्राप्त हो जाता है और कभी कभी युवावस्था में उसकी मृत्यु हो जाती है | ऐसी स्थिति में या किसी दुर्घटना में मृत्यु हो जाने पर लोग इसे अकाल मृत्यु की संज्ञा दे देते हैं | जबकि सत्य यह है कि इस पृथ्वी पर जन्म लेने के पहले ही मनुष्य की मृत्युतिथि निश्चित हो जाती है | हमारे शास्त्रों में लिखा कि :-- आयु: वित्तम् च धर्मम् च , विद्या निधनमेव च ! पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थ्यैव हि देहिन: !! अर्थात :- जीव के गर्भ में आने पर पर ही उसकी आयु , धन , धर्म , विद्या एवं मृत्यु तिथि का सृजन हो जाता है | मनुष्य जन्म लेने के बाद पल प्रतिपल अपनी मृत्यु की ओर अग्रसर होता रहता है , परंतु माया में भूलकर मनुष्य यह विचार करता है कि हम युवा हो गए हैं | वह यह नहीं जानता है कि वह जितनी आयु का हुआ है उसकी कुल आयु में से इतने वर्ष कम हो गये हैं | मनुष्य अपने परिवार / समाज में इतना व्यस्त हो जाता है कि वह अपनी मृत्यु को भूला रहता है | मनुष्य की आयु का निर्धारण उसके पूर्व जन्मों के प्रारब्ध के अनुसार होता हैं | इस जन्म में सब कुछ पूर्व निर्धारित होता है परंतु आगे होने वाले जन्म को सुधारने के लिए मनुष्य को सकारात्मक कार्य करते रहना चाहिए , जिससे कि उसका आने वाला जन्म और भी दिव्य बनकर उसे प्राप्त हो | पूर्ण आयु के पहले मृत्यु हो जाने पर उससे दुर्मरण या अकाल मृत्यु कहा जाता है | मनुष्य की मृत्यु भले ही पूर्व निर्धारित होती है परंतु लोक भाषा में उसे अकाल मृत्यु ही कहा जाता है |* *आज समाज में इस प्रकार के अनेक मनुष्य मिल जाएंगे जो न तो अपने कर्मों को देखते हैं और न हीं अपने कर्तव्य का पालन करते हैं | किसी भी विपरीत परिणाम के लिए ऐसे लोग ईश्वर को दोषी मानते हैं जबकि दोषी ईश्वर नहीं होता है बल्कि दोषी आपके कर्म व आप स्वयं होते हैं | कुछ लोग अधिक से अधिक धन कमाने के लिए नैतिक अनैतिक सभी प्रकार के कार्य करने को भी तत्पर हो जाते हैं , जबकि उनके भाग्य में जितना धन आना होता है वह पहले ही लिखा जा चुका होता है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" इतना ही कहना चाहता हूं कि यदि मनुष्य किसी भी कारणवश अकाल मृत्यु को प्राप्त होता है तो यह मान लेना चाहिए उसकी आयु पहले से इतनी ही निर्धारित की गई थी , उसके पूर्व जन्मों के कर्मों के अनुसार उसको इतने ही दिन की आयु प्राप्त हुई थी एवं उसकी मृत्यु का कारण भी पहले से निश्चित होता है | मनुष्य ऐसे अवसरों पर विह्वल होकर के अपना विवेक को खो देता है और ईश्वर को दोषी मानने लगता है | जबकि हम जहां निवास कर रहे हैं इसका नाम ही मृत्युलोक है जिसका अर्थ होता है मौत का घर | जब हमारा जन्म ही मौत के घर में हुआ है तो पूर्णकालिक मृत्यु हो या अकाल मृत्यु यह दोनों ही स्वाभाविक है |* *मनुष्य को अपने एक एक पल का सकारात्मकता से सदुपयोग करते रहना चाहिए क्योंकि इस संसार को छोड़कर कब जाना पड़ जाए यह कोई नहीं जानता |*

अगला लेख: अहंकारी विद्वता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
10 जनवरी 2019
*इस धरा धाम पर मनुष्य के अतिरिक्त अनेक जीव हैं , और सब में जीवन है | मक्खी , मच्छर , कीड़े - मकोड़े , मेंढक , मछली आदि में भी जीवन है | एक कछुआ एवं चिड़िया भी अपना जीवन जीते हैं , परंतु उनको हम सभी निम्न स्तर का मानते हैं | क्योंकि उनमें एक ही कमी है कि उनमें ज्ञान नहीं है | इन सभी प्राणियों में सर्
10 जनवरी 2019
22 जनवरी 2019
*हमारा देश भारत सामाजिक के साथ - साथ धार्मिक देश भी है | प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को धार्मिक दिखाना भी चाहता है | परंतु एक धार्मिक को किस तरह होना चाहिए इस पर विचार नहीं करना चाहता है | हमारे महापुरुषों ने बताया है कि धार्मिक ग्रंथों की शिक्षाओं और उसके चरित्रों को केवल उसके शाब्दिक अर्थों में नहीं ले
22 जनवरी 2019
24 दिसम्बर 2018
*सनातन धर्म इतना दिव्य एवं विस्तृत है कि यहाँ मानव जीवन में उपयोगी सभी तत्वों का विशेष ध्यान रखा गया है | सनातन धर्म में अन्य देवी - देवताओं की पूजा के साथ ही प्रकृति पूजन का विशेष ध्यान रखा गया है , इसी विषय में आज हम बात करेंगे २५ दिसंबर अर्थात "तुलसी पूजन दिवस" की | मानव जीवन के लिए तुलसी कितनी उ
24 दिसम्बर 2018
25 दिसम्बर 2018
*ईश्वर ने सुंदर सृष्टि की रचना की | अनेकों प्रकार की योनियों की रचना करके कर्म के अनुसार जीव को उन योनियों में जन्म दिया | इन्हीं योनियों में सर्वश्रेष्ठ मानवयोनि कही गयी है | प्रत्येक जीव को जीवन जीने के लिए आहार की आवश्यकता होती है जहां जंगली जानवर मांसाहार करके अपना जीवन यापन करते हैं वही मनुष्य
25 दिसम्बर 2018
24 दिसम्बर 2018
*संपूर्ण धरा धाम पर भारत ही एक ऐसा देश है जो अनेकों प्रकार की सभ्यताएं एवं संस्कृति य स्वयं में समेटे हुए है | इस देश को "विविधता में एकता" वाला देश कहा जाता है | क्योंकि यहां पर विभिन्न धर्मों व संप्रदायों के लोग एक साथ निवास करते हैं | इन सभी मतावलम्बियों की अपनी - अपनी भाषाएं , अपने - अपने रीति -
24 दिसम्बर 2018
27 दिसम्बर 2018
*मानव जीवन में इन तीन बातों का होना अनिवार्य हैः-- सत्संग, भगवद् भजन और परोपकार | इन तीनों में भी सत्संग की बड़ी भारी महिमा है | सत्संग का अर्थ है, सत् वस्तु का ज्ञान | परमात्मा की प्राप्ति और प्रभु के प्रति प्रेम उत्पन्न करने तथा बढ़ाने के लिए सत्पुरूषों को श्रद्धा एवं प्रेम से सुनना एवं बीच - बी
27 दिसम्बर 2018
11 जनवरी 2019
हम सभी जानते हैं कि पैसा खुशी नहीं खरीद सकता है ... लेकिन कई बार हम ऐसा कार्य करते हैं जैसे कि हम थोड़े अधिक पैसे के साथ खुश हैं। हम अमीर बनने के लिए इच्छुक हैं (जब हम जानते हैं कि अमीर खुश नहीं हैं या तो); हमें उस नवीनतम गैजेट या शैली को प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। हम अधिक पैसा कमा
11 जनवरी 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x