गाय का महत्त्व :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

02 अगस्त 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (4277 बार पढ़ा जा चुका है)

गाय का महत्त्व :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*संसार का अद्भुत एवं प्राचीन सभ्यताओं का उदय सनातन धर्म के अन्तर्गत ही हुआ | सनातन धर्म दिव्य एवं अद्भुत इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि इसकी प्रत्येक मान्यता को यदि सूक्ष्मदृष्टि से देखा जाता है तो उसके मूल में वैज्ञानिकता अवश्य समाहित होती है | सनातन धर्म में वैसे तो प्रत्येक वृद्धा स्त्री को माता कहा जाता है परंतु मुख्य रूप से तीन माताओं का मानव जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है | १- अपनी माता , २- धरती माता , एवं ३- गौमाता | इन तीनों का स्थान इसलिये महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यदि अपनी माता न होती तो मनुष्य का जन्म न होता , यदि धरती माता न होती तो मनुष्य आधारहीन होता , और यदि गौमाता न होती तो मनुष्य पालन न हो पाता | पौराणिक ग्रंथों में गौमाता को विशेष स्थान देते हुए इनके शरीर में समस्त देवी देवताओं का वास बताया गया है | गौ माता की दोनों सींगों ब्रह्मा एवं विष्णु तथा दोनों सींगोंं के मध्य में भगवान शिव का वास एवं समस्त शरीर में अन्य अन्य देवी-देवता निवास करते हैं | कहने का तात्पर्य यह है कि किसी देवी देवता का दर्शन करने के लिए उनके स्थान विशेष या मंदिर विशेष में जाना पड़ता है परंतु यदि गौ माता का दर्शन एवं पूजन कर लिया जाता है तो सभी देवी देवताओं के दर्शन एवं पूजन का लाभ मनुष्य को प्राप्त हो जाता है | इस सृष्टि में अद्भुत प्राणी गाय को कहा गया है क्योंकि पूर्वकाल में यही मनुष्य के जीवन का आधार थी | दूध , दही , घी तो लाभकारी था ही परंतु इसके साथ ही गोबर एवं गोमूत्र से अनेक प्रकार के कीटाणुओं का विनाश भी होता था | गाय के महत्व को स्वीकार करते हुए वैज्ञानिकों ने बताया है कि गाय जहां बैठती है वहां नकारात्मकता समाप्त हो जाती है , इसके साथ ही गाय ही ऐसा प्राणी है जो ऑक्सीजन को ग्रहण करके ऑक्सीजन ही छोड़ती है | गाय की रीढ़ की हड्डी में सूर्यकेतु नाड़ी होती है जिस पर सूर्य की किरणों के सहयोग से स्वर्ण का उत्पादन होता है और यह स्वर्ण उसके दूध के द्वारा मनुष्य को प्राप्त होता है जो मनुष्य को निरोगी बनाता है | पूर्व काल में भोजन बनने के बाद प्रथम रोटी गाय के लिए निकालने का विधान हमारे महापुरुषों ने यदि बनाया तो इसका कारण एक ही था कि हमारे घर में दो - चार देवी देवताओं का वास या उनकी प्रतिमाएं हो सकती है परंतु जब गाय को पहली रोटी खिलाई जाती है तो समस्त देवी देवताओं का भोग लग जाता है | गाय की दिव्यता नकारा नहीं जा सकता |*


*आज समाज परिवर्तित हो चुका है , कृषि करने वाले लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं जिससे आज गौ माता पर भी संकट आ गया है | गौमाता ही नहीं आज का स्वार्थी मनुष्य जब अपने जन्म देने वाली माता का तिरस्कार कर दे रहा है तो गौ माता तो उसको मात्र पशु ही दिखाई पड़ती होगी | कुछ लोग यह भी कहते हुए सुने जाते हैं कि गाय तो हिंदुओं की माता है उन सभी लोगों को प्राचीन अथर्ववेद का अध्ययन करना चाहिए जहां स्पष्ट लिखा है "गाव: विश्वस्य मातरम्" अर्थात गाय पूरे विश्व की माता है | आज कुछ लोग धर्म के नाम पर गौ हत्या करने को अपना अधिकार समझते हैं उन सभी धर्म विशेष के लोगों को मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि वे अपने धर्म की पुस्तक "किताब - ए - मस्तरक" को पढ़े जहाँ स्पष्ट लिखा है कि :- तुम पर लाजिम है गाय का दूध , दही और घी ! खबरदार करते हुए गोमांस को बीमारी का घर बताते हुए हराम कहा गया है | यही नहीं "फतवे हुमांयूनी" के भाग -१ में तो गाय की कुर्बानी को इस्लाम के विरुद्ध कहा गया है | परंतु आज गौमाता को सिर्फ हिन्दू की पूज्य माना जाता है | आज गौ माता मानव मात्र से तिरस्कृत होकरके अपना जीवन व्यतीत कर रही हैं | स्थिति यह है कि सनातन हिंदू धर्म को मानने वाले ही गौ माता का तिरस्कार कर रहे हैं | उसी का परिणाम है कि आज घर घर में रोग एवं व्याधियां व्याप्त हैं | वैज्ञानिक भी बताते हैं कि यदि गाय के गोबर से घर को लीपा जाता है तो अनेक प्रकार के कीटाणु एवं बैक्टीरिया समाप्त हो जाती है , परंतु आज गाय के गोबर को हाथ लगाने से लोगों को घिन तक आने लगी है | यह मनुष्य का दुर्भाग्य है कि मुफ्त में मिलने वाले प्रकृति प्रदत्त गाय नामक जीव को तिरस्कृत जीवन जीना पड़ रहा है | आज भी जिस घर में गाय है उस घर की तेजस्विता देखते ही बनती है | सनातन धर्म इसीलिए वैज्ञानिक धर्म कहा जाता है क्योंकि सृष्टि में उपलब्ध समस्त जड़ एवं प्राणी मात्र को मानव कल्याणक मान करके उचित स्थान प्रदान किया है |*


*गौ माता आज यदि उपेक्षित हो रही है तो उसका कारण कोई अन्य ना हो करके सनातन हिंदू ही है इस बात को समझकर की इस पर विचार करना ही होगा |*

अगला लेख: आंतरिक प्रकृति एवं पर्यावरण :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
26 जुलाई 2019
*आदिकाल से मनुष्य का सम्बन्ध प्रकृति एवं पर्यावरण से रहा है | घने जंगलों में प्रकृति की गोद में ही बैठकर ऋषियों ने तपस्या करके लोककल्याणक वरदान प्राप्त किये तो इसी प्रकृति की गोद में बैठकर हमारे पूर्वज महापुरुषों ने मनुष्य को सरल एवं सुगम जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त करने वाले ग्रंथों की रचना की | प्र
26 जुलाई 2019
29 जुलाई 2019
*आदिकाल से ही भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता संपूर्ण विश्व को दिशा निर्देश देती रही है | हमारे मनीषियों ने माता -;पिता एवं जन्मभूमि की महत्ता को बताते हुए लिखा है :- "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" अर्थात :- अपनी माता और जन्मभूमि का स्थान स्वर्ग से भी महान है | हमारे सनातन धर्म के धर्मग्रंथों एवं व
29 जुलाई 2019
04 अगस्त 2019
*सनातन धर्म के प्रत्येक पर्व त्योहार हर्षोल्लास से मनाये जाते है | हमारे प्रत्येक उत्सव एवं त्यौंहारों में भिन्नता होने के बाद भी प्रत्येक पर्व में एक समानता भी है कि कोई भी पर्व - त्यौहार या पूजन - अनुष्ठान हो उसका प्रारम्भ "दीप प्रज्ज्वलन" अर्थात दीपक जलाकर ही किया जाता हौ | जब तक उस दीपक में घी य
04 अगस्त 2019
05 अगस्त 2019
*सनातन धर्म आदिकाल से ही अपनी दिव्यता के लिए जाना जाता है | सनातन का सिद्धांत है कि ईश्वर सर्वत्र समान रूप से व्याप्त है | इसी को प्रतिपादित करते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा कि :- "ईश्वर सर्व भूतमय अहई" इसी सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए हमारे महापुरुषों में सनातन के सिद्धांत बनाये थे | सनातन की
05 अगस्त 2019
31 जुलाई 2019
*समस्त मानव जीवन तीन कालों में विभाजित है :- १- भूतकाल २- वर्तमानकाल एवं ३- भविष्यकाल | जो व्यतीत हो गया वह भूतकाल , जो चल रहा है वह वर्तमानकाल एवं जो आने वाला है वह भविष्यकाल कहलाता है | मनुष्य का मन बहुत ही चंचल होता है , यह या तो भूतकाल के स्वर्णिमकाल का स्मरण किया करता है या फिर भविष्य की योजनाय
31 जुलाई 2019
04 अगस्त 2019
*सनातन धर्म के प्रत्येक पर्व त्योहार हर्षोल्लास से मनाये जाते है | हमारे प्रत्येक उत्सव एवं त्यौंहारों में भिन्नता होने के बाद भी प्रत्येक पर्व में एक समानता भी है कि कोई भी पर्व - त्यौहार या पूजन - अनुष्ठान हो उसका प्रारम्भ "दीप प्रज्ज्वलन" अर्थात दीपक जलाकर ही किया जाता हौ | जब तक उस दीपक में घी य
04 अगस्त 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x