जय जवान जय किसान

05 नवम्बर 2019   |  pradeep   (418 बार पढ़ा जा चुका है)

लाल बहादुर शास्त्री, जिनका प्रधानमंत्री काल बहुत कम रहा, पर जनता के दिलो-दिमाग पर बहुत गहरा असर छोड़ गया. कल तक उनके विरोधी भी आज उनकी बात करते है, उनको महान बताते है. उनके दिए नारे " जय जवान, जय किसान " की बात करते है. आज की राजनीति ने उस नारे में से जय किसान निकाल दिया अब सिर्फ बचा है जय जवान. पिछले कुछ सालों में जितने जवान सरहद पर नहीं मरे उससे ज्याद किसानों ने आत्महत्या की है. जवानों की बात करना उन पर गर्व करना आज राष्ट्रवाद है , किसानों की बात करना राष्ट्रद्रोह है. दुश्मन से तो जवान बचा लेंगे पर भुखमरी से कौन बचाएगा? एक महान व्यक्ति का जिसका तुमने विरोध ही किया था जब तक वो जीवित रहे आज उनके नारे का अपमान मत करो. आज एक नया नारा है " जय जवान जय धनवान". किसान कर्ज ना चुकाने पर जान दे रहे है और धनवानों के कर्ज माफ़ हो रहे है. गरीबो पर टैक्स बढ़ाया जा रहा है धनवानों का घटाया जा रहा है. क्या यह लाल बहादुर शास्त्री की सोच थी? अपनी सोच को ज़बर्दस्ती शास्त्री जी या सरदार पटेल पर मत थोपो. सरदार पटेल ख़ुद किसान नेता थे, और लाल बहदुर शास्त्री एक गरीब परिवार से आते थे, शास्त्री जी ने कभी भी कही भी यह नहीं कहा कि मैं गरीब परिवार से आता हूँ इसलिए मेरा समर्थन करो. उन्होंने अपनी गरीबी का प्रचार नहीं किया. आज की स्थिति यह है कि अपनी गरीबी का प्रचार और धनवानों का साथ. नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक जितने भी सरकारें बनी, चाहे किसी भी पार्टी की कोई भी पूंजीवाद के ख़िलाफ़ नहीं था पर वो जनता के साथ थे, हिन्दुस्तान का आज का पूंजीवाद पूरी दुनियां के पूंजीवाद से अलग है, जिसे पूंजीवाद नहीं बल्कि सामंतवाद नाम देना चाहिए. भारत की जनसंख्या का 80 प्रतिशत लोग यह जानता ही नहीं कि पूंजीवाद क्या होता है और समाजवाद क्या, वो तो सिर्फ नारे लगाना जानता है. 100-200 रूपये में नारे लगाने वाले मिल जाते है उनसे किसी के भी समर्थन में नारे लगवा लो, सोशल मिडिया में प्रचार करने वाले कुछ 100 रूपये में मिल जाते है. इन सब से कोई ना तो पूंजीवाद ही समझ सकता है और ना ही समाजवाद, लेकिन इनके बहकावे में ज़रूर आ सकता है. झूठी कहानियां बना कर सोशल मिडिया में चलाना, एक आम बात बन चुकी और मज़ा इस बात का है कि जानते हुए भी कि यह झूठ है हम उसे फैलाने में लग जाते है. गाँधी जी ने सात पाप बताये थे जिसमे एक था " आदर्शहीन राजनीति " आज वही हो रही है. पार्टी अध्यक्ष ही पार्टी वर्कर को झूठ फैलाने को उकसा रहे है. राजनीति में जो मर्जी करो पर कम से कम महान पुरूषों का नाम लेकर राजनीति मत करो. पटेल और शास्त्री को इस गन्दी राजनीति में मत खींचो, उनको अपने साथ जोड़ कर उनका अपमान मत करो. (आलिम)

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