महाशिवरात्रि :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

03 मार्च 2020   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (1788 बार पढ़ा जा चुका है)

महाशिवरात्रि :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*भारतीय संस्कृति इतनी दिव्य व विशाल रही है कि यहाँ वर्ष के प्रति दिन, कोई न कोई उत्सव / त्यौहार मनाया जाता रहा है | ये त्योहार विविध कारणों तथा जीवन के विविध उद्देश्यों से जुड़े थे | इन्हें विविध ऐतिहासिक घटनाओं, विजय श्री तथा जीवन की कुछ अवस्थाओं जैसे फसल की बुआई, रोपाई और कटाई आदि से जोड़ा गया था | प्रत्येक अवस्था एवं प्रत्येक परिस्थिति के अनुसार हमारे पास एक त्योहार था | इन्बीं त्यौहारों में सबसे महत्वपूर्ण पर्व है फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी/चतुर्दशी को मनाया जाने वाला "महाशिवरात्रि" का पावन पर्व | वैसे तो प्रत्येक चंद्र मास का चौदहवाँ दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का एक दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है | वर्षपर्यन्त पड़ने वाली सभी शिवरात्रियों में से, महाशिवरात्रि, को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है | महाशिवरात्रि का धार्मिक - आध्यात्मिक - यौगिक महत्व के साथ वैज्ञानिक महत्व भी है | इस रात ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार अवस्थित होता है कि मनुष्य के भीतर ऊर्जा का प्राकृतिक रूप से ऊपर की और जाती है | यह एक ऐसा दिन है जब प्रकृति मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक ले जाने में सहायता करती है | इस समय का उपयोग करने के लिए हमारे पूर्वजों ने इस पावन रात्रि में पूरी रात जागरण करके भगवान शिव की आराधना करते हुए अपनी ऊर्जा को संरक्षित करने का प्रयास किया था | पूरी रात मनाए जाने वाले इस उत्सव में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि ऊर्जाओं के प्राकृतिक प्रवाह को उमड़ने का पूरा अवसर मिले – आप अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए – निरंतर जागते रहते हैं | इसके अतिरिक्त महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व भी है | रात्रि को अज्ञानता का प्रतीक माना गया है अज्ञानता में ज्ञान का प्रस्फुटन इस अंधकारमय रात्रि में जागरण करते हुए भगवान शिव की आराधना के माध्यम से ही हो सकता है | वैसे तो भगवान शिव को संहारक कहा गया है परंतु शिव का अर्थ कल्याणकारी होता है , भगवान शिव के समान दानी एवं कल्याणकारी कोई अन्य देवता नहीं है | महाशिवरात्रि मनाने के कई कारण हमारे धर्मग्रंथों में वर्णित हैं परंतु सबका उद्देश्य एक ही है मानवकल्याण |*


*आज के दिन सम्पूर्ण विश्व में भक्तजन जप - तप और व्रत रखते हैं और इस दिन अनेक धामों में जाकर लोग भगवान के शिवलिंग रूप के दर्शन करते हैं | इस पवित्र दिन पर सम्पूर्ण विश्व विशेषकर हमारे देश के प्रत्येक हिस्सों में शिवालयों में बेलपत्र , धतूरा , दूध , दही , शर्करा आदि से शिव जी का अभिषेक किया जाता है | देश भर में महाशिवरात्रि को एक महोत्सव के रुप में मनाया जाता है क्योंकि ऐसी भी मान्यता है कि आज के ही दिन देवों के देव महादेव का विवाह हुआ था | इसी मान्यता को आत्मसात करते हुए आज सायंकालीन बेला में लगभग देश के सभी हिस्सों भगवान शिव भव्य बारात शोभायात्रा भी निकाली जाती है | हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है | जगत में रहते हुए मनुष्य का कल्याण करने वाला व्रत है महाशिवरात्रि | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" इतना जानता हूँ कि पूर्ण श्रद्धा एवं भक्ति से इस व्रत को रखने से साधक के सभी दुखों , पीड़ाओं का अंत तो होता ही है साथ ही मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है | शिव की साधना से धन -धान्य , सुख - सौभाग्य और समृद्धि की कमी कभी नहीं होती | मनुष्य को स्वयं के साथ - साथ सम्पूर्ण जगत के कल्याण के लिए मनसा , वाचा , कर्मणा भगवान आशुतोष शिव की आराधना करनी चाहिए | हमारे धर्मशास्त्रों में प्रदोषकाल अर्थात सूर्यास्त होने के बाद और रात्रि होने के पहले (मध्य की अवधि) अर्थात सूर्यास्त होने के बाद के २ घंटे २४ मिनट की अवधि प्रदोष काल कहलाती है | इसी समय भगवान आशुतोष प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते है | इसी समय सर्वजनप्रिय भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था | यही कारण है कि प्रदोषकाल में शिव पूजा या शिवरात्रि में औघड़दानी भगवान शिव का जागरण करना विशेष कल्याणकारी कहा गया है | हमारे सनातन धर्म में बारह ज्योतिर्लिंगों का वर्णन प्राप्त होता है | हमारी मान्यता है कि प्रदोष काल में महाशिवरात्रि तिथि में ही सभी ज्योतिर्लिंगों का प्रादुर्भाव हुआ था इसीलिए शिवपूजा में प्रदोषकाल का विशेष महत्व बताया गया है |*


*महाशिवरात्रि के दिन प्रदोषकाल में भगवान शिव का पूजन करके रात्रि जागरण करते हुए इस दुर्लभ मानव जीवन को धन्य बनाने का प्रयास प्रत्येक सनातनी को अवश्य करना चाहिए |*

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