गुरु का मकर में गोचर

23 मार्च 2020   |  डॉ पूर्णिमा शर्मा   (265 बार पढ़ा जा चुका है)

गुरु का मकर में गोचर

गुरु का मकर में गोचर

आज जब सारा विश्व कोरोना वायरस के आक्रमण से जूझ रहा है ऐसे में कुछ लोगों का आग्रह कि गुरु के मकर राशि में गोचर के सम्भावित परिणामों के विषय में लिखें – हमें हास्यास्पद लगा | किन्तु फिर भी, मित्रों के अनुरोध पर प्रस्तुत है गुरुदेव के मकर राशि में गोचर के सम्भावित परिणामों पर एक दृष्टि |

सोमवार 29 मार्च 2020, चैत्र शुक्ल षष्ठी को 27:55 (अर्द्धरात्र्योत्तर तीन बजकर पचपन मिनट) के लगभग आयुष्मान योग और कौलव करण में गुरुदेव अपनी स्वयं की धनु राशि से निकल कर शनि की मकर राशि में प्रविष्ट हो जाएँगे | मकर राशि में इस समय शनि स्वराशि में तथा मंगल अपनी उच्च राशि में भ्रमण कर रहे हैं | गुरु इस समय उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर है | एक ओर यहाँ आकर देवगुरु बृहस्पति गुरु-चाण्डाल योग यानी राहु-केतु से मुक्त हो जाएँगे तो वहीं दूसरी ओर अपनी नीच की राशि में राश्यधिपति के साथ पहुँच जाएँगे – जिनके साथ न इनकी मित्रता है न ही शत्रुता | मकर में ही गुरु का मित्र मंगल भी गोचर कर रहा है और चार मई तक वहीं भ्रमण करेगा | मकर अंगारक मंगल की उच्च राशि है जिसके कारण मंगल की उग्रता में और अधिक वृद्धि होने की सम्भावना है | ऐसे में सम्भव है मंगल से सम्बन्धित ज्वर, पित्त तथा रक्त विकार जैसी समस्याओं में तेज़ी आ जाए |

मकर राशि में भ्रमण करते हुए चौदह मई 2020 को रात्रि 7:47 के लगभग गुरु वक्री होना शुरू हो जाएगा और तीस जून 2020 को सूर्योदय से पूर्व पाँच इक्कीस के लगभग वापस अपनी राशि धनु में पहुँच जाएगा | तेरह सितम्बर 2020 को प्रातः 6:35 के लगभग धनु राशि में ही मार्गी होता हुआ 20 नवम्बर 2020 को दिन में 13:24 के लगभग पुनः मकर राशि में आ जाएगा | 11 जनवरी 2021 से 12 फरवरी 2021 तक गुरु अस्त भी रहेगा | मकर, धनु और पुनः मकर राशि में विचरण करने की अवधि में गुरु 29 मार्च 2020 से उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर भ्रमण करेगा | उसके बाद वक्री चाल में 26 जुलाई को वापस पूर्वाषाढ़ नक्षत्र पर आ जाएगा | जहाँ से तीस अक्तूबर से पुनः उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर, सात जनवरी 2021 से श्रवण नक्षत्र पर तथा पाँच मार्च 2021 से धनिष्ठा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 5/6 अप्रैल 2021 को अर्द्धरात्रि में 00:25 के लगभग शनि की दूसरी राशि कुम्भ में प्रविष्ट हो जाएगा |

मकर राशि के लिए गुरु तृतीयेश और द्वादशेश है | गुरु की एक राशि धनु के लिए मकर राशि द्वितीय भाव है तथा दूसरी राशि मीन के लिए मकर राशि एकादश भाव है | मकर राशि में विचरण करते हुए गुरु की दृष्टियाँ क्रमशः वृषभ राशि, कर्क राशि तथा तुला राशियों पर रहेंगी | इनमें से वृषभ राशि के लिए गुरु अष्टमेश तथा एकादशेश है, कर्क के लिए षष्ठेश तथा भाग्येश है और तुला राशि के लिए गुरु तृतीयेश तथा षष्ठेश है |

ये “शिवविंशति” अर्थात भगवान शिव के सम्वत्सरों का युग चल रहा है और इस कड़ी में अभी तक परिधावी सम्वत्सर चल रहा था, जिसके कारण वर्षा में कमी के कारण महँगाई में वृद्धि और रोगों तथा अन्य प्रकार के उपद्रवों में वृद्धि की सम्भावना की जाती है | अब 25 मार्च से नव सम्वत्सर का आरम्भ हो जाएगा, जिसका नाम होगा प्रमादी तथा अश्विनी कुमारों को इस सम्वत्सर का देवता माना गया है | आयुर्वेदाचार्य अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य तथा समस्त प्रकार के दुःख दारिद्र्य को दूर करके सुख सौभाग्य और स्वास्थ्य प्रदान करने वाले माने जाते हैं | इस वर्ष का राजा होगा बुध और मन्त्री चन्द्रमा | सूर्योदय प्रातः 6:19 पर होगा और इस समय मीन लग्न तथा लग्न में सूर्य और चन्द्र दोनों विराजमान होंगे और चन्द्रमा रेवती नक्षत्र पर होगा | इस प्रकार देखा जाए तो यह संयोग अत्यन्त शुभ रहने की सम्भावना है | यही नहीं यह संयोग आर्थिक विकास, विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी में उन्नति, सामाजिक व्यवस्था और स्वास्थ्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में बहुत अनुकूल सिद्ध हो सकता है |

किन्तु, जैसा कि ऊपर लिखा है, गुरुदेव 28 को अपनी नीच राशि मकर में प्रस्थान कर जाएँगे | यदि सामान्य रूप से देखें तो प्रमादी नाम के सम्वत्सर में प्रजा में आलस्य में वृद्धि तो मानी जाती है लेकिन रोग व्याधि आदि से धीरे धीरे मुक्ति भी मानी जाती है | साथ ही अभी तक गुरुदेव गुरु-चाण्डाल योग में थे और अब नीच की राशि में राश्यधिपति शनि तथा उच्च के अंगारक के साथ पहुँच जाएँगे | चार मई को मंगल यहाँ से निकल कर कुम्भ में पहुँचेगा और तीस जून से गुरु वक्री होकर धनु में जाने लगेगा | इस आधार पर हम कह सकते हैं कि पूरा अप्रैल जब तक मंगल मकर में रहेगा - कोरोना के मामलों में वृद्धि हो सकती है और तीस जून से परिस्थितियों में सुधार की सम्भावना की जा सकती है | किन्तु फिर बीस नवम्बर से पाँच अप्रैल 2021 तक गुरु वापस मकर में लौट जाएगा | उस समय हो सकता है फिर से यह बीमारी सर उठाए |

लेकिन, जैसा कि सदा कहते आए हैं, ज्योतिष सम्भावनाओं का विज्ञान है | हज़ारों वर्ष पूर्व लिखे गए सूत्रों को नवीन परिस्थितियों के साथ अध्ययन करके तथा व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर ज्योतिषी कुछ फल कथन करते हैं और इन सभी फल कथनों का उद्देश्य होता है केवलमात्र मार्गदर्शन – इसे ब्रह्म वाक्य समझ कर नहीं बैठ जाना चाहिए | इसे हम इस प्रकार समझ सकते हैं कि हमें पहले से बता दिया जाता है कि जहाँ हमें पहुँचना है वहाँ के मार्ग में बहुत बड़ी खाई है और हम उसमें गिरकर चोट खा सकते हैं तो उस स्थिति में हम सँभल कर चलेंगे ताकि गिरने का भय न रहे, या यदि गिर भी जाएँ तो उतनी अधिक चोट न लग सके जितनी अचानक से गिरने में लग सकती थी | किन्तु यदि हमें उस खाई का पहले से पता ही नहीं होगा तो निश्चित रूप से हम ऐसे गिरेंगे की संभलना मुश्किल हो जाएगा | और वर्तमान में कोरोना जैसे खाई से बचने का एक ही उपाय है कि इससे घबराए बिना डॉक्टर्स के बताए दिशा निर्देशों का पालन करें और सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए जितना सम्भव हो घरों के भीतर रहें, बार बार अपने हाथों को अच्छी तरह धोते रहें, बाज़ार से लाई दूध की थैली आदि को भी साबुन से धोने के बाद ही प्रयोग करें, सब्ज़ी लाने के बाद भी पहले उन्हें भली भाँति धोकर साफ़ कर लें उसके बाद ही उनको काम में लाएँ... इत्यादि इत्यादि...

सरकारों द्वारा लगभग सभी राज्यों को Lockdown कर दिया गया है – यानी सीमाओं को सील कर दिया गया है और जन साधारण से अपील की गई है कि बहुत ही आवश्यक हो तभी घरों से बाहर निकलें | हमें स्वयं ही कड़ाई से इस Lockdown को सफल बनाने के लिए सरकार को सहयोग देना चाहिए | यदि हम अपने व्यक्तिगत स्वार्थों तथा कुछ समय की समस्याओं (जो कि वास्तव में हैं नहीं – क्योंकि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बन्द नहीं की गई है) को भुलाकर इस प्रकार के दिशा निर्देशों का पालन दृढ़ संकल्प, पूर्ण मनोयोग और पूरी ज़िम्मेदारी के साथ करते रहे तो निश्चित रूप से हम कोरोना की इस खाई से बाहर निकल आने में सफल हो सकेंगे, और धीरे धीरे इस संक्रमण पर जन साधारण की विजय होगी और ज्योतिष वर्ग द्वारा जो सम्भावना व्यक्त की गई है कि अभी कुछ समय के लिए कोरोना से संक्रमित मरीज़ों की संख्या में वृद्धि हो सकती है वह सम्भावना सम्भावना बनकर ही रह जाएगी और सभी राशियों के लिए गुरु का मकर में गोचर शुभ देने वाला सिद्ध हो सकेगा...

तो संकल्प लें कि हमें कोरोना को हराना है पूर्ण साहस और समझदारी के साथ... इसी संकल्प और कामना के साथ कल से प्रारम्भ करेंगे गुरु के मकर राशि में गोचर के सभी बराह राशियों पर होने वाले सम्भावित प्रभावों की संक्षिप्त समीक्षा...

अगला लेख: १६ से २२ मार्च तक का सम्भावित साप्ताहिक राशिफल



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