नाज मेरी बच्ची पार्ट -2

07 जुलाई 2021   |  शोभा भारद्वाज   (394 बार पढ़ा जा चुका है)

एक दिन डेली अखबार डान में खबर आई काल गर्ल का इंटरनेशल रैकेट पकड़ में आया है जिसमें कई लड़कियां हैं जिनसे जिस्म फरोशी का धंधा करवाया जाता है| पुलिस लाइन से फोन आया आप चाहें तो दोनों भाई आकर देख लें शायद आपको आपकी बेटी मिल जाये खबर मिलते ही दोनों भाई और भाभी पुलिस लाइन पहुंचे बड़े हाल में कई लडकियाँ बैठी थीं सबके चेहरे पर नकाब था अचानक एक लड़की चीखती हुई डाक्टर साहब के पैरों से लिपट कर चीखने लगी ‘बाबी’- बाबी उसने नकाब उतार कर फेक दिया वही तीखे नैन नक्श नाजुक सी लड़की उनकी अपनी बच्ची नाज थी बाप बेटी रोते रोते बेहाल हो गये जिसने देखा उसकी आँखों से आंसू टपकने लगे. डाक्टर साहब की गोद में नाज बेहोश हो गयी वह थर-थर काँप रहे थे बेटी के गम ने उन्हें तोड़ दिया था उम्र से अधिक बूढ़े हो गये थे .

छोटा भाई और भाभीजान एक – एक लड़की का नकाब हटा कर अपनी हिना को ढूंढ रहे थे वह उनमें नहीं मिली .इनको ले जाने वाली रजिया बी कहीं दिखाई नहीं दी हाँ दो लम्बे आदमी भी पकड़ में आये थे . सूफिया ने लंबी सांस ली नाज ने पूछा बाबा अम्मी क्यों नहीं आई हैं ?डाक्टर साहब सिसकने लगे वह समझ गयी अम्मी दुनिया में नहीं है .रो-रो कर जब सब शांत हुए चचाजान ने पूछा बेटी हिना दिखाई नहीं दी उसको कतर के शेख को बेच दिया वह उसके हरम में दाखिल कर ली गयी है नाज ने रोते हुए कहा चची जान को गश आ गया हाय |

नाज ने कुछ ठहरने के बाद नफरत से कहा रजिया आखिरी पेपर के दिन हमें लेने आई वह रो –रो कर दोनों हाथों से गाल पीट रही थी हमकों गाड़ी में बिठाकर अपने से चिपका कर बोली बेटियों अब मेरे अलावा तुम्हारा कोई नहीं है तुम्हारे बड़े अब्बा के मरने के बाद उनके दुश्मन कुछ दिन शांत रहे लेकिन शाम होते ही ऐसी खूँरेजी हुई रात के समय गुडों के साथ हमला कर दिया किसी को नहीं छोड़ा तुम्हारे दोनों चाचा ,ताया जी डाक्टर साहब उनके लड़कों का कारिंदों समेत कत्ल कर दिया औरतों को भी नहीं छोड़ा जागीर और हवेली पर उन्होंने कब्जा कर लिया तुम्हारे ताऊ के लड़के ने किसी तरह जान बचाई उसने मुझे फोन किया रजिया बी बच्चियों को बचा लो अब वह तुम दोनों को पकड़ने और कोठियों व्यापार पर कब्जा करने आ रहे हैं मैं इन यतीम बच्चियों को किसी भी तरह बचाऊँगी मेरी समझ में नहीं आ रहा था मेरे दबंग बाबा चाचा हमारे भाई कारिंदे कैसे मारे जा सकते हैं उनके पास बंदूकें थीं सुबह अम्मी और चची जान से बात हुई है फिर वह हमें कैसे मार सकते हैं घर से कुछ दूरी पर पुलिस चौकी है रजिया के पास हर बात का जबाब था रोते रोते हम थक गयी रजिया की गोद में लेटे- लेटे हम बेहाल थीं |

न जाने कितना सफर तय किया आँखें खुलीं हम दोनों बहने गाड़ी की सीट पर लेटी चादर में लिपटी थी गाड़ी रुकी एक आफिसनुमा कमरा था रजिया ने हमारे और अपने ड्राईवर के पासपोर्ट दिखाये हम दूसरे देश की सीमा को पार कर गये हमारी समझ में तब नहीं आया कौन सा देश है |रास्ते में अब हमारे हर सवाल का जबाब रजिया हूँ हाँ में दे रही थी गाड़ी में ही उन्होंने हमें खाना खिलाया हमसे खाया नहीं जा रहा था | कई घटे सफर करते करते एक बड़े घर के सामने गाड़ी खड़ी हुई रजिया हमें अंदर ले गयी वहाँ हमसे कुछ छोटी कुछ बड़ी 20 लड़कियां थी रजिया के मुताबिक़ हम सब यतीम थी हमने रजिया से कई बार कहा लाहौर में हमारे कई रिश्तेदार हैं हमें उनके यहाँ ले चलो |उसका जबाब था मुझे मरना नहीं है | वहाँ की हर लड़की की अलग – अलग कहानी थी कुछ खरीदी गयीं थी कुछ को उठा कर लाया गया था समझ नहीं आ रहा था हमें क्यों लाया गया है ?

हमारे लिए तीन टीचर रोज आती थीं एक हमें अंग्रेजी सिखाती थी एक फ्रेंच एक रशियन बैले कभी रक्स ( डांस )परन्तु हिना सबसे लंबी पतली थे उसे बैली डांस सिखाया ,मुझे अंग्रेजी गाने गिटार के साथ सिखाये .स्कूल जाने का मतलब नहीं था दोनों वक्त गोश्त, फलों और सब्जियों का जूस खाने में दिया जाता खाने की मेज पर डाईट चार्ट लगा था. अचानक उस शहर में शोर मचा जलूस निकाले जा रहे थे फिर सब शांत सुना निजाम बदल गया है टीवी के प्रोग्राम बदल गये एक दिन हम दोनों बहनों का निकाह रजिया ने अपने बेटे से करा दिया हमें पाकिस्तान से गाड़ी चला कर लाने वाला रजिया का बेटा था वह पहले से शादी शुदा था बड़े घर की ऊपरी मंजिल पर दोनों बेटे अपने परिवार समेत रहते थे हमारी शादी नाम मात्र की थी बकायदा निकाहनामा लिखवाया गया .काफी समय बाद हमें फ्रांस घूमने के लिए ले जाया गया वहाँ हिना को कतर के शेख के हाथों दीनारें लेकर बेच दिया जाते समय हिना मुझे छोड़ ही नहीं रही थी मुश्किल से अलग की गयी |रजिया से मैने कई बार पूछा उसका जबाब था वह शेख के हरम में मौज से रह रही है |

हमें बहुत बड़े होटल में ठहराया गया था रात को एक फ़्रांसिसी को मुझे सपुर्द कर दिया मेरी काली आँखे काले बाल मेरे दुश्मन बन गये नाज शर्म से सिर झुका कर बिलखने लगी मेरा शौहर कहलाने बाला दलाल था कुछ देर के लिए वह चुप हो गयी .बाबा मैं उनके लिए सोने की खान थी| एक रात एक पाकिस्तानी गाहक आया वह बहुत बड़ा अफसर था उसे रिश्वत के तौर पर मुझे पेश किया उसने पूछा कहां की हो पाकिस्तान की हूँ हमें शक था मैने उसे रो – रो कर बताया मैं लाहौर से लाई गयी हूँ मैं अमुक स्कूल में पढ़ती थी अब्बा आर्मी के डाक्टर और चचाजान का नाम बताया उसने लिख लिया उस नेक दिन को हैरानी हुए उनके वतन की लड़कियां इंटरनेशनल रैकेट की शिकार हो रही हैं उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखा वह कुछ पल के लिए रुके मैने बताया मेरी बहन हिना को यह कहते हैं कतर का शेख ले गया उन्होंने मुझे अपना इंटरनेशनल नम्बर याद कराया अपने अब्बा को जब मिलो उन्हें बताना जाते समय कहा मैं पाकिस्तान एम्बेसी को खबर करूंगा किसी को जिक्र नहीं करना अल्लाह की मर्जी तुम लोग दोजख की जिन्दगी से निकल जाओगी .

कुछ देर बाद उन लोगों को शायद पता चल गया कुछ गड़बड़ है तुरंत हम दस लड़कियों को यूरो रेल से बेल्जियम ले गये वहाँ भी नहीं ठहरे योरोप के अलग – अलग देशों में भटकते हुए आखिर हमें इस्लामाबाद लाये वहाँ से लाहौर कुछ देर बाद न जाने अब कहाँ ले जायेगे अब हम कई लड़कियां हैं | बाबा इनकी पहुंच बहुत दूर तक है .चचाजान को भलेमानस का नाम नम्बर लिखवाया चचाजान ने कहा हमारा व्यापार दूर – दूर तक है इनकी मदद से अपनी बच्ची को ढूंढना मुश्किल नहीं है . हर पाकिस्तानी सिफारत खाने से सम्पर्क करूंगा . डाक्टर साहब बेहाल थे उन्होंने कहा यह कितनी भी पहुंच वाले क्यों न हों मैं तुम्हे अभी ले जाऊंगा नाज रोने लगी अब्बा मैं किसी लायक नहीं रही मेरा इन्होने निकाह करवाया है यह मुझे नहीं छोड़ेंगे फिर अखबारों में हमारे चर्चे हैं फोटो छप गयी है बाबा मैं आपके लिए बोझ बन जाउंगी परिवार के लायक नहीं हूँ किस –किस की बातें सुनेंगे हमें लोग गंदे नाम से पुकारते हैं बाबा ,नाज चीखने लगी .मेरी बेटी तू अपने बाबा को इतना कमजोर समझती है देख तेरा बाबा इनका क्या हाल करता है तुझे लिए बिना नहीं जाऊँगा बच्ची |

कई लड़कियां पकड़ी गयीं थी लेकिन अधिकतर को देखने कोई नहीं आया जो आये थे उनमें बेटी को ले जाने की हिम्मत नहीं थी डाक्टर साहब थानेदार से मिलने गये उन्होंने बताया आज रात ही इन लड़कियों को कहीं और ले जाया जायेगा ऊंची पहुंच वाले हैं लेकिन आपकी बेटी को मैं ले जाने नहीं दूंगा इन्हें समझा दूँगा आर्मी के डाक्टर है तुम पर भारी पड़ेंगे | फिर भी डाक्टर साहब को विश्वास नहीं हुआ वह पास के होटल में ठहर गये सुबह अजान के बाद पुलिस लाइन पहुंच गये हाल खाली था केवल नाज वहाँ बैठी थे |चलो मेरी बच्ची अपने घर ,पुलिस लाइन के कूड़े दान में उन्होंने नकाब फेक दिया . घर पहुंचने के बाद नाज की माँ के कपड़े निकाल कर नाज को अभी पहनने के लिए दिए उसके कपड़े बाहर फिकवा दिए दिन में नये कपड़े मंगाये गये . नाज गहरे डिप्रेशन में थी मनोवैज्ञानिक डाक्टर से उसका इलाज करवाया वह रात को चीख कर उठती थी बाबा को बचाओ |

उसका नये सिरे से पासपोर्ट बनवाया गया कनाडा में बसे अपने बचपन के डाक्टर दोस्त उसका वहाँ क्लीनिक था उनसे फोन पर बात की वीजा आ गया डाक्टर साहब ने अपनी कोठी बेच दी वहीं सैटल होने का प्लान बना लिया उनके दोस्त का बेटा अच्छी पोस्ट पर कनाडा में नौकरी करता था उसकी कनेडियन पत्नी ने उससे तलाक लेकर लन्दन के गोरे से शादी कर ली थी उनका 12 वर्ष का बेटा दादा के साथ रहता था | छह महीने बीत गये एक दिन डाक्टर साहब के दोस्त ने बड़े संकोच से अपने बेटे आरिफ के लिए नाज का हाथ माँगा कुछ देर तक डाक्टर साहब चुप रहे उन्होंने नाज के साथ क्या हुआ था बिना छुपाये सब कुछ बता दिया दोस्त का जबाब था इसमें नाज कहाँ कसूरवार है आरिफ खुले दिमाग का है यदि उसे एतराज नहीं हैं तो फिर क्या मुश्किल है नाज आरिफ का निकाह हो गया नाज को अच्छा शौहर दो बाबा एक प्यारा बेटा मिल गया कहानी का अंत सुना कर सूफिया चुप हो गयी परन्तु हिना का क्या हुआ ?

हिना कतर में थी शेख ने उससे निकाह कर लिया था जबकि उसकी कई बीबियाँ थीं फिर भी शेख ने उसे जाने नहीं दिया निकाह के बाद उसका हक था हाँ उसने परिवार से मिलने दिया |

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