मैं और मेरा शहर

16 जुलाई 2018   |  गौरीगन गुप्ता   (108 बार पढ़ा जा चुका है)

मैं और मेरा शहर सौन्दर्यीकरण का अद्भुत नमूना शोरगुल भरें, चकाचौंध करते जातपात, धर्म वाद से परे पर अर्थ वाद की व्यापकता बचपन की यादों से जुडा मेरी पहचान का वो हिस्सा जानकर भी अनजान बने रहते आमने सामने पड जाते तो कलेजा उडेल देते प्रदूषण, शोर, भीड़ भरा शहर ना पक्षियों की चहचहाहट भोर होने का एहसास कराती ना उगते सूरज की रोशनी नयी उमंगों से भरती मेहमानों को आगाह देता कौवा नहीं पडोसी क्या खलल डाले दरारों से चैन की सांस घुसती तक नहीं बस, तडके ही लम्बी लम्बी लाइनें मटके, बाल्टी लिए पानी भरने की मारामारी स्कूल बस पकडने को गणवेश में भागते बच्चे जोश भरे सब अपने अपने काम काज को निकल पकडते कठिन चुनौतियों से भरा जीवन नित्य नए जटिलताओं से जूझते सुख सुविधाओं की दौड़ में गला काट प्रतियोगिता में जोशीले मिजाज ,समय को पकडते तनाव भरा, उद्धेश्य परक जीवन आधुनिकीकरण का चोला ओढे पर मानसिक शांति नसीब नहीं तंग दिल वाले बसते सिर उठाती ईमारतो में कुढे में दफन आत्मा एहसासों का दमन होता पत्थर दिल इंसान बनता खोखली मुस्कुराहट ओढे वक्त का रोना रोते व्यस्तता से प्यार या व्यस्त रहना मजबूरी कि शव पर चार आसूं बाहने की फुर्सत नहीं भाईचारे की भावना से परे आभासी रिश्ते बन जाते रोज कुचलते सपनों पर ढाढस कोई बधाता नहीं बस, बसता है इन शहरों में कीडेमकोडे की तरह बिलबिलाती भीड गाडिय़ों के होर्न, रंग-बिरंगी रोशनी जहां चांद तारों की चमक दिखती नही फिर भी ,भीड़ में मेरा कद छोटा जरूर हुआ पर, आस की डोर छोडी नहीं।

अगला लेख: मैं और मेरे गुरु



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
11 जुलाई 2018
तड़के सुबह से ही रिश्तेदारों का आगमन हो रहा था.आज निशा की माँ कमला की पुण्यतिथि थी. फैक्ट्री के मुख्यद्वार से लेकर अंदर तक सजावट की गई थी.कुछ समय पश्चात मूर्ति का कमला के पति,महेश के हाथो अनावरण किया गया.कमला की मूर्ति को सोने के जेवरों से सजाया गया था.एकत्र हुए रिश्तेदार समाज के लोग मूर्ति देख विस्म
11 जुलाई 2018
23 जुलाई 2018
लाठी की टेक लिए चश्मा चढाये,सिर ऊँचा कर मां की तस्वीर पर,एकटक टकटकी लगाए,पश्चाताप के ऑंसू भरे,लरजती जुवान कह रही हो कि,तुम लौट कर क्यों नहीं आई,शायद खफा मुझसे,बस, इतनी सी हुई,हीरे को कांच समझता रहा,समर्पण भाव को मजबूरी का नाम देता,हठधर्मिता करता रहा,जानकर भी, नकारता र
23 जुलाई 2018
10 जुलाई 2018
हँसमुखी चेहरे पर ये कोलगेट की मुस्कान,बिखरी रहे ये हँसी,दमकता रहे हमेशा चेहरा,दामन तेरा खुशियों से भरा रहे,सपनों की दुनियां आबाद बनी रहे,हँसती हुई आँखें कभी नम न पड़े,कालजयी जमाना कभी आँख मिचौली न खेले,छलाबी दुनियां से ठग मत जाना,खुशियों की यादों के सहारे,दुखों को पार लगा लेना,कभी ऐसा भी पल आये जीवन
10 जुलाई 2018
06 जुलाई 2018
आपने अमीर लोगों के बारे में तो सुना ही होगा, लेकिन क्या कभी आपने अमीर शहरों के बारे में सुना है। हम आपको जीडीपी के आधार पर भारत के 10 बड़े शहरो के बारे में बताएंगे। अर्थव्यवस्था के नाम पर भारत को मजबूत बनाने में इन्हीं अमीर शहरों का बहुत बड़ा योगदान रहता है।10. विशाखापट्न
06 जुलाई 2018
04 जुलाई 2018
क्
एक बार पलक झपकने भर का समय ..... , पल - प्रति पल घटते क्षण मे, क्षणिक पल अद्वितीय अद्भुत बेशुमार होते, स्मृति बन जेहन मे उभर आआए वो बीते पल, बचपन का गलियारा, बेसिर पैर भागते जाते थे, ऐसा लगता था , जैसे समय हमारा गुलाम हो, उधेड़बुन की दु
04 जुलाई 2018
07 जुलाई 2018
टे
सुर्ख अंगारे से चटक सिंदूरी रंग का होते हुए भी मेरे मन में एक टीस हैं.पर्ण विहीन ढूढ़ वृक्षों पर मखमली फूल खिले स्वर्णिम आभा से, मैं इठलाया,पर न मुझ पर भौरे मंडराये और न तितली.आकर्षक होने पर भी न गुलाब से खिलकर उपवन को शोभायमान किया.मुझे न तो गुलदस्ते में सजाया गया और न ही माला में गूँथकर द
07 जुलाई 2018
15 जुलाई 2018
जीवन पानी का बुलबुला, पानी के मोल मत समझो, जीवन का हैं दूसरा नाम , प्रकृति का अमूल्य उपहार, जीवनदायिनी तरल, पानी की तरह मत बहाओ, पूज्यनीय हमारे हुए अनुभवी, घाट- घाट का पानी पीकर, जिन्हें हम, पिन्डा पानी देते, तलवे धो- धोकर हम पीते, ×---×----×-----×---×--× सामाजिक प्राणी है, जल में रहकर, मगर
15 जुलाई 2018
17 जुलाई 2018
या
समय समय की बात यातना का जरिया बदला आमने सामने से ना लेते देते अब व्हाटसअप, फेसबुक से मिलती। जमाना वो था असफल होने पर बेटे ने बाप की लताड से सीख अव्वल आकर बाप का फक्र से सीना चौडा करता, पर अब तो, लाश का बोझ कंधे पर डाल दुनियां से ही अलविदा हो चला। सासूमां का बहू को सताना सुधार का सबक होता था नखरे
17 जुलाई 2018
09 जुलाई 2018
भ्
कैसे- कैसे भ्रम पाल रखे हैं. .... सोते से जाग उठी ख्याली पुलाव पकाती उलझनों में घिरी मृतप्राय जिन्दगी में दुख का कुहासा छटेगा जीने की राह मिलेगी बोझ की गठरी हल्की होगी जीवन का अल्पविराम मिटेगा हस्तरेखा की दरारें भरेगी विधि का विधान बदलेगा उम्मीद के सहारे नैय्या पार लग जायेगी बचनों मे विवशता का पुल
09 जुलाई 2018
27 जुलाई 2018
विगत एक हफ्ते के भीतर देश की राजधानी दिल्ली के पास एनसीआर में नवनिर्मित या निर्माणाधीन या पुरानी बिंल्डिग अचानक ढ़ह जाने की लगातार चार घटनाएँ हो गई जिस कारणं सम्पत्ति के अलावा जानमाल का भी बड़ा नुकसान हो गया। ये घटनाएं 17, 21, 22 जुलाई 2018 के बीच गाजियाबाद, शाहबेरी, मसूरी, साहिबाबाद में हुई हैं। शाहब
27 जुलाई 2018
10 जुलाई 2018
बह्र- १२२ १२२ १२२ १२२ काफ़िया- आने रदीफ़- लगा है“गज़ल”यहाँ भी वही शोर आने लगा हैजिसे छोड़ आई सताने लगा है किधर जा पड़ूँ बंद कमरे बताओ तराने वहीं कान गाने लगा है॥ सुलाने नयन को न देती निगाहें खुला है फ़लक आ डराने लगा है॥बहाने बनाती बहुत मन मनातीअदा वह दिशा को नचाने लगा है॥ खड़ी
10 जुलाई 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x