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पैसा बहुत कुछ तो है पर सबकुछ नहीं है....

पैसा बहुत कुछ तो है पर सबकुछ नहीं है…..मनुष्य स्वभाव से ही बहुत लालची और महत्त्वाकांक्षी होता है। अर्थ, काम, क्रोध, लोभ और माया के बीच इस तरह फँसता है कि बचकर निकलना मुश्किल हो जाता है। यह उस दलदल के समान है जिसमें से जितना ही बाहर निकलने का प्रयास किया जाता इंसान उस दलदल में और फँसता जाता है। इस सं



23 जनवरी 2019

शांति का जीवन।

हममें से अधिकांश लोग अपने जीवन में शांति और सुगमता चाहते हैं - जीवन तनावपूर्ण, अराजक, भारी, विचलित करने वाला, थकावट भरा हो सकता है।हम उस सब से दूर होना चाहते हैं, पागलपन से बाहर निकलें, और अधिक से अधिक शांति की जगह पर पहुंचें।मैं साझा करने जा रहा हूं कि कैसे एक सरल विधि में शांति का जीवन पाएं। एक मि



आज़ादी

हमारे देश की आज़ादी को 70 साल हो गये। लेकिन आज़ादी क्या है इसके बारे में लोगों ने अपनी अपनी परिभाषाएँ व धारणाएं  बना रखी है । आज़ादी आज़ादी चिल्लाते हुए कुछ लोग आजकल भी यहाँ वहाँ दिख जाते हैं । कुछ लोग कहते हैं हम अभी भी पूर्ण आज़ाद नहीं हुए हैं । आलंकारिक या दार्शनिक रूप से आज़ादी शब्द का प्रयोग या राजन



विवादित राजनीति का स्थापित नाम

कांग्रेस की केंद्र सरकार के तमाम घोटालों के बाद जब अन्ना हज़ारे का जबरदस्त आंदोलन खड़ा हुआ तो उसकी तुलना जेपी द्वारा किये गए इमरजेंसी के दौरान आंदोलन से की गयी. इस आंदोलन के आउटपुट के रूप में देखा जाय 'अरविन्द केजरीवाल' ही दिखते हैं. व्यवस्था बदलने की इस लड़ाई से एकमात्र अरविन्द की उत्पत्ति ही हो सकी.





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