कहां गए फिल्मों से गांव ?

12 सितम्बर 2019   |  शिल्पा रोंघे   (7815 बार पढ़ा जा चुका है)

कहां गए फिल्मों से गांव ?

एक दौर था जब ग्रामीण परिवेश पर बनीं फ़िल्में खूब पसंद की जाती थी। तत्कालीन ग्रामीण भारत के स्वाभाविक चित्रण वाली फ़िल्म मदर इंडिया तो ऑस्कर अवार्ड तक भारत की मिट्टी की खुशबू बिखेर आई। सिर्फ एक वोट कम पड़ने की वजह से ये फ़िल्म पीछे रह गई। फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी मारे गए गुल्फाम पर आधारित फिल्म तीसरी कसम, दो बीघा जमीन, उपकार, जैसी फिल्में उस दौर में बनीं जब खेती किसानी ही लोगों की आजीविका का साधन हुआ करता था और ज्यादातर लोग गांवों में ही रहा करते थे, इन फ़िल्मों में उस दौर के जीवन संघर्ष और गरीबी का वर्णन मिलता है। वहीं गंगा जमुना और मेरा गांव मेरा देश, शोले जैसी फिल्म में डकैती की समस्या को उठाया गया है। गुजरात की दुग्ध क्रांति पर बनीं स्मिता पाटिल अभिनीत फिल्म मंथन, डिंपल कपाड़िया की फिल्म रुदाली ग्रामीण परिवेश पर बनीं उत्कृष्ट फिल्मों में से एक है। वहीं 80 के दशक में बनीं नदिया के पार हल्की फुल्की मनोरंजक प्रेम कथा है। आजादी के बाद भी काफी बड़ी संख्या में लोग गांवों में रहा करते थे. शहरीकरण के चलते गांवों से लोग शहरों की तरफ पलायन करने लगे। ऐसे में शहर फ़िल्मी कहानियों का हिस्सा बनते गए उसके बाद विदेशी शहर फ़िल्मी कहानियों में दिखने लगे। इसके बावजूद भी गांवों का महत्व कम नहीं हुआ हैं अपने इस लेख में हम उन फ़िल्मों की बात करने वाले है जो नए ज़माने में भी गांव की कहानी को लेकर सफल है। आगे पढ़ने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करे........
https://silverscreenshilpa.blogspot.com/2019/09/blog-post.html


कहां गए फिल्मों से गांव ?

अगला लेख: इन हीरोइन्स से प्रेरणा लेकर बने मराठी दुल्हन



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
12 सितम्बर 2019
हॉलीवुड हो या बॉलीवुड पोलका डॉट का ट्रेंड कभी पुराना नहीं होता है। सत्तर के दशक में ये ट्रेंड काफी पॉपुलर हुआ। अब पोलका डॉट फ़िल्मी परंपरा का हिस्सा बन चुका है। शायद ही कोई ऐसी बॉलीवुड डीवा होगी जिसने पोलका डॉट वाला ड्रेस ना पहना हो। अपने लेख के ज़रिए हम बताने वाले ही कि
12 सितम्बर 2019
12 सितम्बर 2019
जबसे नोटबंदी हुई है तबसे एक नहीं बल्कि कई ऐसे नेता सामने आए हैं जिनके पास अरबों-खरबों की प्रॉपर्टी थी। पिछले कई समय से कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार इनकम टैक्स के घेरे में फंसे हुए हैं और अब उनकी बेटी भी इस घेरे में आ गई है। डीके शिवकुमार ने अपनी बेटी ऐश्वर्या शिवकुमर के नाम से कई कंपनियों में अलग-अलग
12 सितम्बर 2019
02 सितम्बर 2019
90 के दशक की बहुत सारी एक्ट्रेसेस रही हैं जिनका सिक्का उस समय तो खूब चलता था लेकिन धीरे-धीरे उनका चार्म खत्म होने लगा। उस दौर की अभिनेत्रियों पर अंडरवर्ल्ड का साया भी रहता था। मगर फिर भी वे इस डर के साये में अच्छे से जिंदगी को जीना नहीं भूलती थीं, उन्हीं में से एक थीं एक्ट्रेस सोनम जो 90 के दशक में
02 सितम्बर 2019
11 सितम्बर 2019
चाहे टसर साड़ी हो, या लाल बार्डर और सफेद रंग साड़ी हो, या कॉटन साड़ी हो बंगाल की साड़ी पहनने के अनुठे स्टाईल से महिलाएं प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाती है। रही बात बंगाली दुल्हन की तो उसकी तो शोभा ही निराली होती है. हम अपने ब्लॉग के माध्यम से बॉलीवुड की उन बालाओं का जिक्र
11 सितम्बर 2019
09 सितम्बर 2019
कहानी-बदलती निगाहेंवक्त के साथ लोग भी बदल जाते है,लेकिन स्मिता से मुझें ऐसी उम्मीद नहीं थी. मुझे यकीन ही नहीं हो
09 सितम्बर 2019
18 सितम्बर 2019
बॉलीवुड में अक्सर एक्ट्रेसेस Oops मोमेंट का शिकार हो जाती हैं और मीडिया को बातें करने का मौका मिल जाता है। ऐसा आलिया भट्ट, कंगना रनौत, तब्बू और भी कई एक्ट्रेसेस के साथ हो चुका है लेकिन ऐसा वे कभी जानबूझ कर नहीं करती हैं। अब ये दौर स्टारकिड्स का जमाना है और अमृता सिंह श्रीदेवी, चंकी पांडे सहित कई सित
18 सितम्बर 2019
11 सितम्बर 2019
चाहे टसर साड़ी हो, या लाल बार्डर और सफेद रंग साड़ी हो, या कॉटन साड़ी हो बंगाल की साड़ी पहनने के अनुठे स्टाईल से महिलाएं प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाती है। रही बात बंगाली दुल्हन की तो उसकी तो शोभा ही निराली होती है. हम अपने ब्लॉग के माध्यम से बॉलीवुड की उन बालाओं का जिक्र
11 सितम्बर 2019
09 सितम्बर 2019
अपने स्कूल के आम के पेड़ के नजदीक खड़ा थी तन्वी, ये वही पेड़ था जिस पर वो आम तोड़ने जा चढ़ी थी। नन्ही तन्वी जो बमुश्किल १० साल की थी.जैसे तैसे चढ़ तो गई लेकिन उतरना जैसे टेढ़ी
09 सितम्बर 2019
05 सितम्बर 2019
Old is Gold...इस बारे में तो आपने सुना ही होगा ? पुरानी चीजों की कद्र एक समय के बाद होती है। 90 के दशक में बड़े होने वाले सभी बच्चों में एक खास तरह का उत्साह रहता था। उस दौर में बच्चों के पास क्रिएटिविटी करने के बहुत मौके हुआ करते थे। 90 के दशक के बच्चों को खाली समय में बहुत कुछ करने को होता था, जिस
05 सितम्बर 2019
11 सितम्बर 2019
बॉलीवुड में कई ऐसी फ़िल्में है जिसमें मुस्लिम कल्चर को बड़े ही खूबसूरत तरीके से दिखाया गया है। कई फ़िल्मों में निकाह की रस्म भी दिखाई गई है। अगर आप भी भविष्य में दुल्हन बनने जा रही है तो बॉलिवुड की दुल्हन से इन्सपिरेशन ले सकती है। हमारे लेख
11 सितम्बर 2019
12 सितम्बर 2019
हॉलीवुड हो या बॉलीवुड पोलका डॉट का ट्रेंड कभी पुराना नहीं होता है। सत्तर के दशक में ये ट्रेंड काफी पॉपुलर हुआ। अब पोलका डॉट फ़िल्मी परंपरा का हिस्सा बन चुका है। शायद ही कोई ऐसी बॉलीवुड डीवा होगी जिसने पोलका डॉट वाला ड्रेस ना पहना हो। अपने लेख के ज़रिए हम बताने वाले ही कि
12 सितम्बर 2019
16 सितम्बर 2019
बात मराठी वेडिंग की हो तो मुंडावलया का जिक्र कैसे नाहो भला, इसे ना सिर्फ दुल्हन बल्कि दुल्हे के माथे पर भी बांधा जाता है। ये मोतियोंसे बनी होती है इसके बिना मराठी दुल्हन का श्रृंगार अधूरा ही माना जाएगा। महाराष्ट्रीय स्टाइल में बनी नथ विशेष
16 सितम्बर 2019
09 सितम्बर 2019
तहज़ीब और अदब के शहर लखनऊ की शान चिकनकारी कला के दीवाने तो आप भी होंगे। कहा जाता है कि ये कढ़ाई कला मुगलकाल में काफी प्रचलित हुई । कहा जाता है
09 सितम्बर 2019
11 सितम्बर 2019
बात राजस्थान की हो तो ज़हन में राजा और रजवाड़ों, भव्य महलों की कल्पना दिल में उभर आती है.अगर आप भी भविष्य में दुल्हन बननें का मन बना रही हैं तो आप भी राजस्थानी लुक अपना सकती है.आप बॉलीवुड की हीरोइन्स से इन्सपिरेशन लेकर खुद को रॉयल लुक दे सकती हैं. आगे पढ़ने के लिए लिं
11 सितम्बर 2019
09 सितम्बर 2019
लोक कलाओं के मामलें में भारत की संपन्नता का कोई मुकाबला नहीं है। हस्तकला के ज़रिए पारंपरिक वस्त्र बनाए जाने की
09 सितम्बर 2019
13 सितम्बर 2019
चंदेरी मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित ऐतिहासिक महत्व रखने वाला शहर है. चंदेरी नाम की ही साड़ियां यहां करीब सात सौ साल पहले बनाना शुरू की गई थी. यूं तो चंदेरी साड़ी का इतिहास पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि इन साड़ियों की परंपरा भगवान कृष्ण के भांजे शिश
13 सितम्बर 2019
03 सितम्बर 2019
जब किसी को अचनाक दौलत मिलती है तो वो शायद उसकी कद्र नहीं करे लेकिन जब किसी गरीब को शोहरत मिलने लगती है या फिर जब वो पाई-पाई का मोहताज होता है तब उसे वो मुकाम मिल जाता है जिसके बारे में उसने सोचा भी नहीं तो वो लोग उस शोहरत को मिलने के जरिए को कभी नहीं भूलते हैं। पिछले कुछ समय से इंटरनेट सेशन बनी रानू
03 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
आज के समय में लड़कियों की सेफ्टी के कई कदम उठाए जा रहे हैं फिर भी वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हर कोई 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का समर्थन करता है लेकिन क्या सच में वे बहू-बेटी या दूसरी महिलाओं की इज्जत करते हैं? यहां लड़कियों को माल कहा जाता है जबकि वे भी आम लड़कों की तरह अपनी जिंदगी जीती हैं।
17 सितम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x