बब्बू (भाग-२, अंतिम)

10 अगस्त 2018   |  pradeep   (71 बार पढ़ा जा चुका है)

बब्बू की याद आज इस दौर में इसलिए आ गई कि आज किसी ऐतिहासिक चरित्र के बारे कुछ कह दो , लिख दो या फिल्म ही बना लो तो एक हंगामा हो जाता है. ना तो हम उस दौर में थे और ना ही हमने देखा है , कुछ उस वक्त के इतिहासकारों ने या कवियों ने उनके बारे में लिखा है जो सच हो भी सकता है और नहीं भी. उन सभी बातो के प्रमाण नहीं है और जो है वो बाद में लोगो ने खुद बा खुद बना डाले है. बब्बू ने क्या महारानी का ज़िक्र इसलिए किया था कि वो एक महान औरत थी? उसे तो मालुम ही नहीं इतिहास के बारे में और उसने लोगो से सूना होगा कि वो अंग्रेजो से लड़ी थी तो उसके दिमाग में शायद वो एक लड़ाकू औरत का किरदार थी. वैसे ही एक कवि ने भी कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया है, " खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी ". कवि ने रानी को मर्दानी कहा, जिसका अर्थ लोग आदमियों की तरह लड़ाकू औरतो के लिए करते है. क्या लोग मर्दानी शब्द को सम्मानपूर्वक इस्तेमाल करते है? कवि ने सम्मानपूर्वक इस्तेमाल किया लेकिन लोग उसे दूसरे ढंग से इस्तेमाल करने लगे. यदि आज के दौर में कोई बब्बू रानी की झाँसी के नाम का इस्तेमाल किसी औरत के लड़ाके स्वभाव के लिए कतरा तो जान से मार दिया जाता. झाँसी की रानी का नाम ले कर हिदुत्व या राष्ट्र प्रेम की बात करना सिवाए मूर्खता के और कुछ नहीं है. ना तो झाँसी की रानी की लड़ाई हिन्दू राष्ट्र के लिए थी, और ना ही भारत की आज़ादी के लिए. झाँसी की रानी की लड़ाई अपने बेटे के अधिकारों के लिए थी. जिन राजाओं को अंग्रेजी हुकूमत ने गद्दी का हकदार इसलिए नहीं माना था कि वो राजाओं के असली बेटे नहीं थे बल्कि गोद लिए हुए थे, उन सब ने मिलकर अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी थी ना की देश के लिए. हिन्दू राजा भी आपस में एक नहीं थे इसलिए अपनी एकता बनाने के लिए उन्होंने बहादुरशाह को अपना और पुरे हिन्दुस्तान का बादशाह कबूल कर बादशाह के साथ मिलकर लड़ने की योजना बनाई थी. अगर उनकी लड़ाई हिंदू राष्ट्र के लिए होती तो वो बहादुरशाह को अपना बादशाह नहीं मानते. वो लड़ाई आम जनता के अधिकारों के लिए नहीं लड़ी जा रही थी वो राजा महाराजाओं के अपने अधिकारों के लिए लड़ी जा रही थी . क्योकि आम जनता के अधिकार तो इस जंग से बहुत पहले ही ये राजा महाराजा अंग्रेज़ो के हाथ बेच चुके थे, अंग्रेजो से पेंशन और पदवी लेकर. जब उनके बच्चो को वो पेंशन और पदवी नहीं दी गई तो उसकी ख़िलाफ़त की. लेकिन आज इस सच को कितने लोग जानते है या जानना चाहते है. आज एक ऐसा राष्ट्रवादी चश्मा पहना दिया गया है जिसमे तर्क करना, इतिहास की सच्चाई बताना शायद जुर्म है , राष्ट्रविरोधी है, हिंदुओं के खिलाफ साज़िश है. इसीलिए शायद बब्बू पागल था जो राष्ट्रवाद या हिदुत्व नहीं जानता था.

अगला लेख: कर्म और त्याग



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
28 जुलाई 2018
वि
कुछ व्यक्तित्व इतने आकर्षक होते हैं कि हम उनकी मदद नहीं कर सकते लेकिन उनकी प्रशंसा और सम्मान करते हैं| वे अपने व्यक्तित्व या उनके कर्मों के वजह से समाज में एक बड़ा अंतर डालते हैं। उनकी सराहना करने के लिए, यू
28 जुलाई 2018
06 अगस्त 2018
पू
पूजा, उपासना जो बिना स्वार्थ के किया जाए, बिना किसी फल की इच्छा से किया जाए, जो सच्चे मन से सिर्फ ईश्वर के लिए किया जाए वो पूजा सात्विक है , सात्विक लोग करते है. जो पूजा किसी फल की प्राप्ति के लिए की जाये, अपने शरीर को कष्ट द
06 अगस्त 2018
26 जुलाई 2018
क्रिकेटर इमरान खान प्रधान मंत्री के पद के करीब डॉ शोभा भारद्वाज 25 जुलाई के आम चुनावों की गहमागहमी रही मतदाताओं नें नेशनल असेम्बली एवं राज्य विधान सभाओं के लिए मतदान किया चुनाव नतीजे स्पष्ट करते हैं इमरान खान की पार्टी तह
26 जुलाई 2018
08 अगस्त 2018
मे
अपनी बर्बादियों का हमने यूँ जश्न मनाया है, सितमगर को ही खुद का राज़दार बनाया है. गम नहीं है मुझे खुद अपनी बर्बादी का,सितमगर ने मुझको अपना दीवाना बनाया है.दीवानगी का आलम कुछ यूँ है मेरे यारो, उनकी दिलज़ारी पे हमको मज़ा आया है. लोग त
08 अगस्त 2018
08 अगस्त 2018
सनातन धर्म में कर्म और धर्म दोनों की ही व्याख्या की गई है , पर तथाकथित हिन्दू इन दोनों ही शब्दों का अर्थ अपनी सुविधा के अनुकूल प्रयोग करते रहे है. सनातन धर्म की सुंदरता इसमें है कि उसमे सभी विचार समा जाते है. यही कारण है कि लोग
08 अगस्त 2018
12 अगस्त 2018
कलम के सिपाही की विरासत को यूँ बदनाम ना करो, सिपाही हो कलम के तुम यूँ किसी के प्यादे ना बनो.ये दो लाइने कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद को समर्पित है, और उन पत्रकारों , लेखकों, कवियों और शायरों को उनका धर
12 अगस्त 2018
08 अगस्त 2018
सच बोलने से गर डर लगता है यारो, झूठ ऐसा बोलो कि सच सामने आये. सच को बताने की अक्सर ज़रूरत तो नहीं होती, हाकिम ही गर हो झूठा,तो सच बताना ही पडेगा. (आलिम).
08 अगस्त 2018
10 अगस्त 2018
दिलकशी उनकी मूड और मॉडलिंग कब तलक यूँ जी को मेरे तड़पायेगी.है हज़ारो दीवाने नुमाइशी के उनके, आशिकी हमारी नज़र उनको क्यों आएगी, खामोश है हम भी देख उनकी बेरुखी, बयां करने से पहले जान यूँही जायेगी. (आलिम)
10 अगस्त 2018

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x