बब्बू (भाग-२, अंतिम)

10 अगस्त 2018   |  pradeep   (80 बार पढ़ा जा चुका है)

बब्बू की याद आज इस दौर में इसलिए आ गई कि आज किसी ऐतिहासिक चरित्र के बारे कुछ कह दो , लिख दो या फिल्म ही बना लो तो एक हंगामा हो जाता है. ना तो हम उस दौर में थे और ना ही हमने देखा है , कुछ उस वक्त के इतिहासकारों ने या कवियों ने उनके बारे में लिखा है जो सच हो भी सकता है और नहीं भी. उन सभी बातो के प्रमाण नहीं है और जो है वो बाद में लोगो ने खुद बा खुद बना डाले है. बब्बू ने क्या महारानी का ज़िक्र इसलिए किया था कि वो एक महान औरत थी? उसे तो मालुम ही नहीं इतिहास के बारे में और उसने लोगो से सूना होगा कि वो अंग्रेजो से लड़ी थी तो उसके दिमाग में शायद वो एक लड़ाकू औरत का किरदार थी. वैसे ही एक कवि ने भी कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया है, " खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी ". कवि ने रानी को मर्दानी कहा, जिसका अर्थ लोग आदमियों की तरह लड़ाकू औरतो के लिए करते है. क्या लोग मर्दानी शब्द को सम्मानपूर्वक इस्तेमाल करते है? कवि ने सम्मानपूर्वक इस्तेमाल किया लेकिन लोग उसे दूसरे ढंग से इस्तेमाल करने लगे. यदि आज के दौर में कोई बब्बू रानी की झाँसी के नाम का इस्तेमाल किसी औरत के लड़ाके स्वभाव के लिए कतरा तो जान से मार दिया जाता. झाँसी की रानी का नाम ले कर हिदुत्व या राष्ट्र प्रेम की बात करना सिवाए मूर्खता के और कुछ नहीं है. ना तो झाँसी की रानी की लड़ाई हिन्दू राष्ट्र के लिए थी, और ना ही भारत की आज़ादी के लिए. झाँसी की रानी की लड़ाई अपने बेटे के अधिकारों के लिए थी. जिन राजाओं को अंग्रेजी हुकूमत ने गद्दी का हकदार इसलिए नहीं माना था कि वो राजाओं के असली बेटे नहीं थे बल्कि गोद लिए हुए थे, उन सब ने मिलकर अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी थी ना की देश के लिए. हिन्दू राजा भी आपस में एक नहीं थे इसलिए अपनी एकता बनाने के लिए उन्होंने बहादुरशाह को अपना और पुरे हिन्दुस्तान का बादशाह कबूल कर बादशाह के साथ मिलकर लड़ने की योजना बनाई थी. अगर उनकी लड़ाई हिंदू राष्ट्र के लिए होती तो वो बहादुरशाह को अपना बादशाह नहीं मानते. वो लड़ाई आम जनता के अधिकारों के लिए नहीं लड़ी जा रही थी वो राजा महाराजाओं के अपने अधिकारों के लिए लड़ी जा रही थी . क्योकि आम जनता के अधिकार तो इस जंग से बहुत पहले ही ये राजा महाराजा अंग्रेज़ो के हाथ बेच चुके थे, अंग्रेजो से पेंशन और पदवी लेकर. जब उनके बच्चो को वो पेंशन और पदवी नहीं दी गई तो उसकी ख़िलाफ़त की. लेकिन आज इस सच को कितने लोग जानते है या जानना चाहते है. आज एक ऐसा राष्ट्रवादी चश्मा पहना दिया गया है जिसमे तर्क करना, इतिहास की सच्चाई बताना शायद जुर्म है , राष्ट्रविरोधी है, हिंदुओं के खिलाफ साज़िश है. इसीलिए शायद बब्बू पागल था जो राष्ट्रवाद या हिदुत्व नहीं जानता था.

अगला लेख: कर्म और त्याग



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
11 अगस्त 2018
दि
दिगपाल, मेरे बचपन का साथी था, दोस्त था या यूँ कहे कि वो मेरा मुण्डू(बेबी सिटर) था. दरअसल दिगपाल हमारी मौसी का नौकर था, उसकी उम्र कितनी थी मैं नहीं जानता पर शायद 12 या 14 साल का रहा होगा. पहाड़ी था या नेपाली ये भी मुझे नहीं पता
11 अगस्त 2018
11 अगस्त 2018
आज रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलिगढ़ में उत्तर प्रदेश के रक्षा औद्योगिक गलियारे का शुभारम्भ करेंगे । मेक इन इंडिया के तहत तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश को रक्षा क्षेत्र में प्रस्तावित गलियारे के लिये चुना गया था। इस गलियारे क
11 अगस्त 2018
09 अगस्त 2018
दि
ना खुल जाए राज, हमको हमसफ़र बनाया है, छिपाने बेवफाई अपनी यूँ हमसे दिल लगाया है. खूबसूरत है जो वो क्योंकर न बेवफा न होंगे, हो दुनियां दीवानी जिनकी वो ही तो बेवफा होंगे.होते हम भी खूबसूरत तो शायद बेवफा होते, बदसूरती ने ही हमको वफ़ा
09 अगस्त 2018
08 अगस्त 2018
सच बोलने से गर डर लगता है यारो, झूठ ऐसा बोलो कि सच सामने आये. सच को बताने की अक्सर ज़रूरत तो नहीं होती, हाकिम ही गर हो झूठा,तो सच बताना ही पडेगा. (आलिम).
08 अगस्त 2018
03 अगस्त 2018
जा
फक्र उनको है बता जात अपनी, शर्मिंदा हम है देख औकात उनकी.किया कीजियेगा अपनी इस जात का, मिलेगा तुम्हे भी कफ़न जो मिलेगा बे-जात को. (आलिम)
03 अगस्त 2018
11 अगस्त 2018
शनिवार 11 अगस्त को अमित शाह की कोलकाता के मेयो रोड पर रैली होनी है लेकिन रैली से पहले कोलकाता में बीजेपी और टीएमसी के बीच पोस्टर वॉर शुरू हो गया है| सभा स्थल में अबजगह तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी की तस्वीरों वाले पोस्टरों और बैनरों को लगा दिया गया है|सभा अमित शाह की
11 अगस्त 2018
06 अगस्त 2018
पू
पूजा, उपासना जो बिना स्वार्थ के किया जाए, बिना किसी फल की इच्छा से किया जाए, जो सच्चे मन से सिर्फ ईश्वर के लिए किया जाए वो पूजा सात्विक है , सात्विक लोग करते है. जो पूजा किसी फल की प्राप्ति के लिए की जाये, अपने शरीर को कष्ट द
06 अगस्त 2018
09 अगस्त 2018
दि
कहते है कि जब दिल और दिमाग के बीच किसी मुद्दे को लेकर जंग चल रही हो तो दिल की बात सुननी चाहिए ना कि दिमाग की. ऐसी ही सोच लोगो को भक्ति की तरफ ले जाती है जहाँ लोग दिमाग से काम लेना बंद कर देते है. भक्ति योग और कर्म योग दोनों ही रास्ते मुक्ति की
09 अगस्त 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x