मेरी



एक सपना

जिंदगी तू बता दे, ये सपने तो है पर रास्ता कहाजब गले मौत के लगने ही है , तो दर्द से मुलाकात न करा जख्म तो बहुत है पर , मरहम लागू कौन सा ये लहू की लाली को भी मिट जाना, फिर क्यों सुरमे से है, सजना सवारना इस मुकद्दर ने भी



मेरी माँ

मेरी आवाज भी वो है मेरा अंदाज़ भी वो हैमेरी सुबह और मेरी शाम भी वो है।होता नही दिन उसके बिना मेरामेरी जिंदगी की शुरुआत भी वो हैउसके बिना मैं अधूरीमेरी कहानी भी वो हैमेरा किस्सा भी वो हैमेरी कविता की रवानी है वोमेरी जान मेरी जिंदगानी है वोकहती है मुझे तू शैतान बहुत है ।जिद्दी है तू नादान बहुत हैअब उसे



प्याज

ख्याल होगा। प्याज के दाम दोबारा बढ़े थे। पांच रुपए में एक प्याज लेने पर आंखों से आंसू झरे थे। तभी निम्न लिखित रचना कल्पना में आयी थी। पढ़ें।एक कवि नेसम्पादक को अकेला पायाइधर-उधर देखाकिसी को ईर्द-गिर्द न पाझट कक्ष मेें घुस आयासम्पादक ने सर उठायाअवांछित तत्व को सामने देखबुरा सा मुंह बनायाकंधे से लटके



कही हम बदल न जाये

गिरते-संभलते जैसे तैसे जीवन मे चलना सीखा था,खुदा ईशवर बस नाम ही सुनाये कभी कहा दिखा था।बचपन से माँ की ममता देखते पले बड़े,आज भी ममता के आंचल के कारण है खड़े।ईश्वर की माया देखी जो मा मिली है।जिसके कारण जिंदगी आज खिली खिली है।जन्म से जिसकी सूरत देखी,जिसको सबसे पहले पहचाना,लगता नही आज भी मैंनेउसे भले ढं



राहुल मनचंदा और श्रुति कंवर &टीवी के शो "मेरी हानिकारक बीवी" में प्रवेश करने वाले है | आई डब्लयू एम बज

आई डब्लू एम बज्ज़ विशेष रूप से &टीवी के “मेरी हानिकारक बीवी” के विकास और शो से जुड़ी जानकारी के बारे में रिपोर्ट कर रहा है।पहले हमने शो के 3 महीने के लीप लेने के बारे में बताया था जो शो में एक नया मोड़ लाएगा। हमने सुमन राणा के बारे में भी जानकारी दी, जिन्होंने ज़ी टीवी क



ये



'अपरिभाषित ज़िन्दगी'

क्या कहूँ, कि ज़िन्दगी क्या होती है कैसे यह कभी हँसती और कभी कैसे रो लेती है हर पल बहती यह अनिल प्रवाह सी होती है या कभी फूलों की गोद में लिपटीखुशियों के महक का गुलदस्ता देती हैऔर कभी यह दुख के काँटो का संसार भी हैहै बसन्त सा



मैं तेरे साथ जी न सका ,अकेला मर तो सकता हूँ

मैं तेरे साथ जी नहीं सका, अकेलामर तो सकता हूँ डॉ शोभा भारद्वाज रिसेटेलमेंट कालोनी के छोटेप्लाट में बने चार मंजिला घर में हा –हाकार मचा था उस घर के जवान बेटे ने फांसीलगा ली थी घर का कमाऊ बेटा तीन भाई पाँच बहनों का भाई अंधे पिता ,बीमार माँ कासहारा जिसने भी सुना हैरान रह गया फांसी के बाद लम्बी गर्दन



मेरी उडान

मैं चाहें जितना उडूं वो उतार ही देगा चलाके तीर मेरे दिल पे मार ही देगा मेरे नसीब में ताउम्र शोहरतें ही नहीं खुदा जो देगा बुलंदी उधार ही देगा मैं खुद भी जीतने के ख्वाब मार बैठा हूँ मैं जानता हूँ मुझे तू तो हार ही देगा मुझे खुद अपने ही चेहरे पे ऐतबार नहीं छुपाऊं लाख ग़मों को उभार ही देगा मैं रिस्क



हर बात मेरी एक प्रश्न बन गई l

हर बात मेरी एक प्रश्न बन गई lश्वेत चादर मेरी कृष्ण बन गई llहर बात मेरी एक प्रश्न बन गई lअश्रुओं ने कही जिंदगी की कहानी,शत्रु बन गए चक्षु और पानी,जिंदगी से लड़ता रहा मौत से ना हार मानी,त्रासदी भी मुझे छूकर एक जश्न बन गई lहर बात मेरी एक प्रश्न बन गई lश्वेत चादर मेरी कृष्ण बन गई llअधरों की मूक स्वीकृति



भगवान शिव

महादेव को शब्दों में बांधना असंभव है फिर भी मैंने एक प्रयत्न किया है कि मैं जगत के स्वामी देवाधिदेव महादेव को अपनी कविता के माध्यम से आप सबके समझ उनके स्वरूप का वर्णन करने का प्रयत्न करूँ।हर हर महादेव



मेरी कामना - निज रास्ता

** मेरी कामना - निज रास्ता **यह है मेरी कामना; मिल ही जाए मुझे मेरा रास्ता; मिल ही जाए तुझे तेरा रास्ता; मिल ही जाए मुझे मेरा रास्ता, मेरा निज रास्ता; मिल ही जाए तुझे तेरा रास्ता, तेरा निज रास्ता। मिटा दे भटकन ऐसा रास्ता; होश संग मदहोश रखे ऐसा रास्ता। मिल ही जाए



अपनी परेशानी

जब था छोटागाँव में, घर मेंसबका प्यारा, सबका दुलाराथोडा सा कष्ट मिलने परमाँ के कंधे पररखकर अपना सिरसरहोकर दुनिया से बेखबरबहा देता, अपने सारे अश्कमाँ के हाथ की थपकियाँदेती सांत्वनासाहस व झपकियाँसमय ने, परिस्थितियों नेउम्र से पहले बड़ा कर दियाअब जब भीजरूरत महसूस करतासांत्वना, आश्वासन कीमाँ के पास जाता



तुम अच्छी हो - श्रेष्ठ औरों से

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रिक्त पात्र - शून्य

रिक्त पात्र – शून्य क्या करना है पूर्ण पात्र का, उसका कोई लाभ नहीं है |रिक्त पात्र हो, तो उसमें कितना भी अमृत भर जाना है ||1||सकल सृष्टि है टिकी शून्य पर, और शून्य से आच्छादित है |शून्य से है पाता प्रकाश जग, पूर्ण हुआ तो अन्धकार है |क्या करना है आच्छादन का, मुझको तो प्रक



मेरे मानस का शुभ्रहंस

मैंनेदेखा खिड़कीकी जाली के बीच से आती रेशमकी डोर सी प्रकाश की एक किरण को मुझ तकपहुँचते ही जो बदल गई एकविशाल प्रकाश पुंज में औरलपेट कर मुझे उड़ा लेचली एक उन्मुक्त पंछी की भाँतिउसी प्रकाश-किरणके पथ से / दूर आकाश में जहाँकोई अनदेखा भर रहाथा वंशी के छिद्रों में / अलौकिक सुरों के आलाप जहा



पूर्व प्रधान मंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी जी को अर्पित श्रद्धा सुमन

पूर्व प्रधान मंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी को अर्पित श्रद्धा सुमन डॉ शोभा भारद्वाज स्वर्गीय प्रथम प्रधान मंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू ने संसद में अटल जी के पहले भाषण पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था एक दिन अटल देश के प्रधान मंत्री पद पर पहुंचेगे |श्री अ



शत शत नमन

घर घर में दीप जलाने हित जो खुद जलताथा हर एक पल वो दीप आज बुझ गया, मगर ज्योतित कर ये संसार गया |||भारत की अतुलित वाणी की गोदी सूनी होगई आज कर अटल सत्य का वरण आज वह परमतत्व मेंलीन हुआ || माँ भारती के वरद पुत्र - शत शत नमन काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ हा



कजरारी बरसात

रात भर से रुकरुक कर बारिश हो रही है - मुरझाई प्रकृति को मानों नए प्राण मिल गए हैं... वो बातअलग है कि दिल्ली जैसे महानगरों में तथा दूसरी जगहों पर भी - जहाँ आबादी बढ़ने केसाथ साथ “घरों” की जगह “मल्टीस्टोरीड अपार्टमेंट्स” के रूप में कंकरीट के घनेजंगलों ने ले ली है... बिल्डिंग



रात भर छाए रहे बादल

रात भर छाए रहे बादल / प्रतीक्षा में भोर की और उनसे झरती नेह रस की हलकी हलकी बूँदें भिगोती रहीं धरा बावली को नेह के रस में...बरखा की इस भीगी रुत में पेड़ों की हरी हरी पत्तियों / पुष्पों से लदी टहनियों के मध्य से झाँकता सवेरे का सूरज बिखराता है लाल गुलाबी प्रकाश इस धरा पर..



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