हमारे अपने सफाई कर्मचारी

03 अक्तूबर 2018   |  शोभा भारद्वाज   (65 बार पढ़ा जा चुका है)

हमारे अपने सफाई कर्मचारी  - शब्द (shabd.in)

हमारे अपने सफाई कर्मचारी

डॉ शोभा भारद्वाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छता अभियान से जोड़ने के लिए जाने माने महानुभावों ,समाज के विभिन्न वर्गों के करीब 2000 लोगों को पत्र लिख कर सफाई अभियान का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है इनमें पूर्व न्यायाधीश, अवकाश प्राप्त अधिकारी, वीरता पुरस्कार के विजेता, राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के पदक विजेता ,सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उप मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और उप राज्यपालों कुछ प्रमुख धार्मिक नेताओं, जनता के चहेते फिल्मी कलाकारों ,हास्य कलाकारों ,प्रसिद्ध खिलाड़ियों, लेखकों, पत्रकारों को सफाई अभियान का हिस्सा बनाया | सभी उत्साह पूर्वक अभियान का हिस्सा बने |आज से पहले अधिकतर आम लोगों को अपने घर के बाहर कूड़ा करकट साफ़ करने में शर्म आती थी लेकिन जब बड़ी हस्तियों और देश के प्रधान मंत्री के हाथों में झाडू देखा उनका संकोच दूर हो गया यदि किसी दिन सफाई कर्मचारी नहीं आता है घर की गृहणी अपने घर के बाहर सीढियों और खुले हिस्सों को स्वयं गर्व से साफ़ कर लेती हैं |

जितने भी धर्म एवं धर्म प्रचारक है साफ़ सफाई पर विशेष जोर देते हैं हिन्दू धर्म हो या अन्य धर्मों को मानने वाले घरों की गृहिणी का सुबह उठ कर पहले स्नान करना रसोई की सफाई कर तब भोजन पकाना , नमाज से पहले वजू करना इतवार के दिन चर्च जाने से पहले नहाना साफ कपड़े पहन कर चर्च जाना | हर पर्व से पहले घरों की साफ़ सफाई की जाती है दिवाली ,ईद ,क्रिसमस ,पारसियों के नव वर्ष का उत्सव नौरोज गुरू पर्व हैं, जैन धर्म में जैन मुनियों को आहार के लिए आमंत्रित करने पर घर की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है, भगवान का भोग शुद्ध मन एवं नहा धोकर बनाया जाता है जितने भी धर्मिक पर्व है उसके आयोजन से पहले साफ़ सफाई महत्वपूर्ण है |

महात्मा गांधी साफ़ सफाई को ईश्वर की भक्ति के बराबर मानते थे वह ऐसे स्वच्छ भारत का स्वप्न देखते थे जिसमें सभी नागरिक मिल कर सफाई अभियान चलायें |स्वयं सफाई करना उन्होंने दक्षिणी अफ्रिका में सीखा था | गोरे भारतीयों को उनकी कई गंदी आदतों के कारण बहुत नफरत से देखते थे जैसे कहों भी शौच करना ,गाँधी जी जब भी भारतीयों के घर जाते उन्हें अपने परिवेश को साफ रखने की सलाह देते लेकिन यह अभ्यास उन्हें तब हुआ जब वह अपने बीबी बच्चों को लेने भारत आये | इस बीच बम्बई में प्लेग का प्रकोप हुआ प्लेग खतरनाक छूत की बीमारी है, उस जमाने में यह बड़ी बड़ी बस्तियों को अपनी चपेट में ले लेती हैं बिमारियों के फैलने का मूल कारण समझा शौचालयों की गंदगी है लेकिन जब सफाई कर्मचारियों की बस्तियों का निरीक्षण किया वह बहुत साफ़ सुथरी थीं | गाँधी जी ने की बार पूरे भारत का दौरा किया जहाँ भी गये उन्होंने वहाँ गंदगी देखी रेलवे स्टेशनों और धर्मशालाओ में गंदगी और बू देहातों की कच्ची सड़कों का और भी बुरा हाल था बाहर गंदगी घर लिपे पुते |वह जहाँ भी जाते लोगों को समझाते जब तक आप अपने हाथ में झाड़ू और बाल्टी नहीं उठाओगे तब तक आपके आसपास की गंदगी इसी तरह बढ़ती रहेगी | विक्टोरिया क्रास पाने में जितने साहस की जरूरत है सफाई रखने के लिए उतने ही साहस की जरूरत है | 76 वर्ष की आयु में वह बड़े गर्व से कहते थे मुझे सफाई से कोई परहेज नहीं हैं मैं स्वयं साफ़ सफाई करता हूँ चाहो तो मेरा भी बहिष्कार कर दो| सफाई कर्मचारियों को सिर पर मेला ढोते देख कर उन्हें आत्मिक कष्ट होता था एक अंग्रेज ने उनसे पूछा यदि एक दिन के लिए आपको वायसराय बना दिया जाए आप क्या करेंगे उन्होंने कहा राजभवन के आस पास की बस्तियों को साफ़ करूंगा यदि दुबारा फिर से बना दिया आगे की बस्तियाँ साफ़ करूंगा |दक्षिण अफ्रिका की जेल में एक बार उन्होंने अपनी मर्जी से शौचालयों की सफाई का काम किया दुबारा फिर जब वह जेल गये जेल अधिकारियों ने उन्हें यही काम सौप दिया |

अब भारत में सिर पर मेला ढोने की प्रथा लगभग खत्म हो चुकी है सस्ते सुलभ शौचालयों का चलन बढ़ रहा हैं | गांधी जी के प्रयत्नों का परिणाम हैं मोदी जी ने उनके इसी स्वप्न को पूरा करने के लिए स्वच्छता को अभियान का रूप दिया है घरों में सुलभ शौचालय है |एक पुनर्वास बस्ती में सरकार द्वारा कमोड रख कर शौचालयों का प्रबंध किया लेकिन सबसे पहले बाशिंदों ने कमोड निकाल कर फेक दिया , हाथ में लोटा लेकर खुले स्थानों पर गंदगी फैलाते कई बार दिलचस्प नजारा देखने को मिलता हैं सूट का कोट पहने पैंट कंधे पर रखे उन परिवारों में किसी के दामाद महोदय पानी की बोतल लिए खुले स्थान को खोजते दिखाई देते हैं | लेकिन अब इन बस्तियों में सीवर हैं अत : दबाब देकर उनसे शौचालय बनवाये गये | मुम्बई में ऐसा भी समय था अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्लेन का दरवाजा खुलते ही आसपास के वातावरण की बू से पता चल जाता था यात्री मुम्बई पहुंच गये अब वह क्षेत्र ऐसे नहीं रहे |

देहातों में मोदी जी का कृत संकल्प है हर घर में शौचालय होना चाहिए इसे ग्राम वासी मुश्किल से स्वीकर कर रहे हैं उन्हें समझाया जा रहा है घर में शौचालय का न होना महिलाओं के लिए कितना कष्टदायी हैं उनका नित्यकर्म के लिए जाना सुबह सबेरे या शाम को अन्धेरा होने के बाद ही सम्भव हो सकता है कई बार महिलाये या नाबालिग बच्चियाँ हादसों का शिकार हो जाती हैं |महिलाये भय से पानी नहीं पीती घर में कोई व्यवस्था नहीं है इससे पेशाब संबंधित कई बिमारियों से कष्ट पाती हैं | अब महिलाएं जागरूक हो चुकी है वह दबाब दे रहीं है उनके लिए घर में शौचालय सबसे जरूरी हैं इसके लिए श्री अभिताप बच्चन जी जोर शोर से प्रचार कर रहे हैं उनका प्रचार रंग ला रहा है|

देश इतनी तरक्की कर चुका है आज भी गटर के सफाई कर्मचारी बंद नालों ,गटरों एवं सीवरों की सफाई के लिए खतरा उठाते हैं कई बार सीवरों में उठने वाली गैस उनकी मृत्यू का कारण बनती है उनको बचाने का प्रयत्न करने वाले भी नहीं बच पाते कितना अमानवीय है गटर में गंदगी से लथपथ होकर काम करना यह अधिकतर दिहाड़ी मजदूर हैं इनकी और बहुत कम ध्यान दिया जाता है यह अनेक बिमारियों के शिकार होकर मर जाते हैं जरूरत हैं ऐसे उपकरणों की जिनकी सहायता से सीवरों की गंदगी निकाली जा सके | नालों में लोग कूड़े के साथ कांच पटक जाते हैं कूड़ा पानी के बहाव को रोकता है सफाई के दौरान कई बार कांच के टुकड़े के सफाई के लिए उतरे सफाई कर्मी के पैर में घुस ज़ाते हैं बहता खून और पैरों से चिपकी गंदगी कितना कष्ट दायक है अपने घर का कूड़ा ठिकाने लगाने के आतुर कभी परिणाम के बारे में नहीं सोचते | जरूरत है सफाई मशीनों की जबकि इनको बदन पर सरसों का तेल मलवा कर गटरों में उतार दिया जाता है |

अबकी बार गांधी जयंती स्वच्छता दिवस के रूप में मनाई गयी नौएडा स्थित सूर्या संस्थान में सफाई कर्मचारियों को हम सबने श्री गोपाल जी के साथ सम्मानित किया उनके द्वारा तैयार किये गये पकौड़े सबने उनके साथ मिल कर स्वाद से खाये काश हम अपने इन भाईयों को अपना समझ सकें इनके बच्चे पढ़ाई में क्यों पिछड़ जाते हैं या पढ़ने से बचते हैं छोटे बच्चों को सही अक्षर ज्ञान कराना , उन विषयों पर ख़ास ध्यान देना जिन विषयों में बच्चे पिछड़ रहे हैं उन्हें पढ़ाई से होने वाले स्वर्णिम भविष्य के लिए उत्साहित करना सच्चे अर्थों में गांधी जी एवं बाबा साहेब अम्बेडकर जी का स्वप्न था तभी समाज के इस वर्ग को आरक्षण का लाभ मिल सकेगा नहीं तो आरक्षण का लाभ उठाये लोगों के बच्चों तक ही सीमित रहेगा |गरीब सफाई कर्मियों के बच्चों की हालत वैसी ही बनी रहेगी |

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रेणु
07 अक्तूबर 2018

वाह !!!! बड़ी सुखद खबर है शोभा जी | मन को कुछ| राहत पहुंची

रेणु
06 अक्तूबर 2018

आदरणीय शोभा जी -- आपके माध्यम से मुझे भी अपनी बात कहने का मौक़ा मिलाहै -- सो कहना चाहूंगी की बरसात में जब भी कहीं सीवर के रुकने की खबर सुनती हूँ तो बहुत चिंता में भावुक हो जाती हूँ | ना जाने किसका अंतिम बुलावा आया होगा ? ये बात मन की झझकोरती है आज विज्ञान ने कितनी तरक्की कर ली | राशन एक काल पर घर पंहुच जाता है -- रोबोट ऑप्रेशन कर रहे हैं तो फिर अमानवीयता से भरपूर इस सीवर सफाई के लिए क्यों मशीनों का सहारा नहीं लिया जाता ????? गरीब घरों के होनहार युवा ही क्यों बलि चढ़ाये जाते हैं ? वो भी उन परिवारों के जिनकी पीढियां खप गयी दूसरों की गन्दगी को समेटते ? सीमा पर वीर सैनिक जान देते हैं -- उन्हें कितना सम्मान मिलता है पर दूसरों की गंदगी में फंस प्राण न्यौछावर कर रहे इन युवाओं को कैसा सम्मान ? एक दिन खबर अखबार में छपी दुसरे दिन भुला दी गयी | स्वच्छता अभियान का कला पन्ना क्यों कोई पढना चाहेगा ? सबलोग अपनी अंगदी सीवर के हवाले कर निश्चिंत हो जाते हैं कोई नहीं सोचता कि जिनके हवाले ये सीवर हैं उनकी स्थिति क्या होगी ?
आपने जो बात लिखी उसे पढ़कर मन उदास हो गया | सचमुच ऐसे भुग्तभोगी कहाँ जाएँ ? अपनों कीछाया से महरूम होने का दुःख सबके लिए सामान है कोई गरीब हो या अमीर !!!!!!!!!!!!!! आभार !!

शोभा भारद्वाज
06 अक्तूबर 2018

प्रिय रेनू सीवर सफाई कर्मचारियों में खास कर ठेके दारी प्रथा है लाभ ठेकेदार ले जाते है यह जान पर खेल कर केवल पांच हजाए कमा पाते हैं श्री अभीताप बच्चन जी ने अबकी बार सीवर सफाई वालों के लिए मशीनें देने का बीड़ा उठाया है

शोभा भारद्वाज
05 अक्तूबर 2018

प्रिय रेणू एक सीवर साफ़ करने वाला मेरे डाक्टर पति के पास आया उसने आँखों में आंसू भर कर कहा डाक्टर साहब मुझे बचा लीजिये असके बचने की कोई उम्मीद नहीं थी दीपक की टिमटिमाती लो भर था न कोई बीमा न कोई उसके बच्चे की सुरक्षा का इंतजाम खबर मिली वह दो दिन बाद मर गया |मैं आज तक आशा से ताकती नजर को भूल नहीं सकी |

रेणु
04 अक्तूबर 2018

आदरणीय शोभा जी -- आपके लेख को पढ़कर मन बहुत भावुक हो गया | आपने कितनी सरलता और करुणा भाव से सब तथ्यों को उजागर किया है | सादर आभार एवं कोटिश नमन !!!!!!!!!!!

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