भगवान का वांग्मय स्वरूप है श्रीमद्भागवत :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

14 नवम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (521 बार पढ़ा जा चुका है)

भगवान का वांग्मय स्वरूप है श्रीमद्भागवत :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि के आदिकाल में वेद प्रकट हुए , वेदों का विन्यास करके वेदव्यास जी ने अनेकों पुराणों का लेखन किया परंतु उनको संतोष नहीं हुआ तब नारद जी के कहने से उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की | श्रीमद्भागवत के विषय में कहा जाता है यह वेद उपनिषदों के मंथन से निकला हुआ ऐसा नवनीत (मक्खन) है जो कि वेद और उपनिषद से भी अधिक उपयोगी है | यह ज्ञान , भक्ति और वैराग्य का पोषक तत्व है , इसकी कथा से न केवल जीव का उद्धार होता है अपितु इससे मोक्ष भी प्राप्त हो जाता है | सनातन धर्म में अनेकों ग्रंथ के मध्य मानव जीवन में उपयोगी चार प्रमुख धर्म ग्रंथ महाभारत , रामायण , गीता एवं श्रीमद्भागवत हैं | इन चारों ग्रंथों का अलग-अलग अध्ययन करने से अच्छा है कि श्रीमद्भागवत का स्वाध्याय किया जाय क्योंकि चारों ग्रंथ भागवत जी में ही समाविष्ट हैं | महाभारत में जीवन की परंपराएं क्या है ? आचार संहिता क्या है ? एवं संबंधों का निर्वहन कैसे किया जाय यह बताया गया है , वहीं गीता में मानव जीवन में मनुष्य को क्या और कैसे करना चाहिए यह शिक्षा प्राप्त होती है | यह दोनों ही ग्रंथ श्रीमद्भागवत के दूसरे से लेकर आठवीं स्कन्ध तक समाहित है | श्रीमद्भागवत के नवें स्कन्ध में श्रीराम कथा आती है | रामायण हमें रहना सिखाती है , किस मर्यादा का कैसे पालन किया जाय ? परिवार में किस-किस का कैसा चरित्र होना चाहिए , यह शिक्षा हमें रामायण से मिलती है | अंतिम चरण में श्रीमद्भागवत मानव जीवन को सही दिशा देते हुए कैसे मोक्ष प्राप्त करना है यह सिखाती है | श्रीमद्भागवत अपने आप में अद्वितीय ग्रंथ है | दस से लेकर बारहवें स्कंध तक भगवान की लीलाओं का वर्णन है | इस प्रकार सनातन धर्म के चार मुख्य ग्रंथ अकेले श्रीमद्भागवत में समाहित हैं | श्रीमद्भागवत साक्षात कन्हैया का स्वरूप माना जाता है जिसके श्रवण कीर्तन एवं अध्ययन से मनुष्य को जीवन जीने के साथ ही मोक्ष की भी शिक्षा प्राप्त होती है | श्रीमद्भागवत का अध्ययन एवं पारायण करने से जीवन की समस्त आधि - व्याधियाँ समाप्त हो जाती हैं एवं मनुष्य का मोह दूर हो जाता है , और यह अकाट्य सत्य है जिस दिन मनुष्य का मोह दूर हो जाता है समझ लो उसी दिन उसका मोक्ष हो गया |*


*आज के आधुनिक युग में श्रीमद्भागवत महापुराण का पारायण भी आधुनिकता के रंग में रंग गया है | आज समाज में आधुनिकता एवं चकाचौंध का इतना वर्चस्व है कि यजमान अधिक से अधिक धूम धड़ाका करके श्रीमद्भागवत का अनुष्ठान करवाना चाहता है , वही विद्वानों ने भी इसको व्यापार बना लिया है | जहां पूर्व काल में श्रीमद्भागवत का पारायण मोक्ष प्राप्ति के उद्देश्य किया जाता था वहीं आज समाज में अपनी प्रतिष्ठा एवं वर्चस्व स्थापित करने के लिए अनेक संगीत साधनों के साथ श्रीमद्भागवत का भव्य आयोजन किया जा रहा है | श्रीमद्भागवत के आंतरिक रहस्य विषय में अधिकतर आधुनिक विद्वान भी शायद ना जानते हों | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" बताना चाहूंगा कि श्रीमद्भागवत कोई साधारण ग्रंथ नहीं है यह साक्षात परमात्मा का स्वरूप है | प्रथम और दूसरा स्कंध भगवान के चरण हैं , तीसरा और चौथा स्कन्ध भगवान की जंघा है , पांचवा स्कंध भगवान की नाभि , छठा वक्षस्थल , सातवां और आठवां स्कंध भगवान के बाहु हैं , नवें स्कन्ध को भगवान का कंठ तो दसवें स्कंध को भगवान का मुख कहा गया है | ग्यारहवाँ स्कंध भगवान का ललाट और भगवान की मूर्द्धा बारहवें स्कन्ध को कहा गया है | इस प्रकार साक्षात भगवान इस ग्रन्थ में समाहित हैं | भगवान का वांग्मय स्वरूप भागवत के स्कन्धों में बंटा हुआ है , तो भागवत में बसे हुए हैं साक्षात भगवान | इस रहस्य को जो भी व्यक्ति जान जाता है उसका जीवन धन्य हो जाता है | कहने का तात्पर्य मात्र इतना है कि भागवत मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि मोक्ष का साधन है | भागवत हमें शिक्षा देती है कि अपने कर्तव्यों से भाग मत , परंतु आज प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों से विमुख हो रहा है यही कारण है कि आज मनुष्य कर्तव्य विमुख होकर के दुखी है | जहां अन्य सभी धर्म ग्रंथों को ग्रंथ कहा जाता है वहीं श्रीमद्भागवत को "भागवत भगवान" की उपमा दी गयी है , इसका सीधा सा अर्थ है भगवान स्वयं इस महान ग्रन्थ में समाहित हैं | आवश्यकता है श्रीमद्भागवत के रहस्य को जानने एवं समझने की |*


*प्रत्येक मनुष्य को ज्ञान , भक्ति वैराग्य एवं त्याग की शिक्षा अकेले श्रीमद्भागवत से प्राप्त हो जाती है | वेदव्यास जी ने मानवमात्र के कल्याण के लिए इस अद्वितीय ग्रन्थ की रचना की है , जिसे श्रवण कर मनुष्य सद्गति प्राप्त कर सके |*

अगला लेख: पंचकोसी परिक्रमा का महत्त्व :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
01 नवम्बर 2019
*इस संसार में मनुष्य एक चेतन प्राणी है , उसके सारे क्रियाकलाप में चैतन्यता स्पष्ट दिखाई पड़ती है | मनुष्य को चैतन्य रखने में मनुष्य के मन का महत्वपूर्ण स्थान है | मनुष्य का यह मन एक तरफ तो ज्ञान का भंडार है वहीं दूसरी ओर अंधकार का गहरा समुद्र भी कहा जा सकता है | मन के अनेक क्रियाकलापों में सबसे महत्
01 नवम्बर 2019
26 नवम्बर 2019
❌ *इस संसार परमात्मा ने अनेकानेक जीवो का सृजन किया | पशु - पक्षी ,कीड़े - मकोड़े और जलीय जंतुओं का सृजन करने के साथ ही मनुष्य का भी सृजन परमात्मा ने किया | सभी जीवो में समान रूप से आंख , मुख , नाक , कान एवं हाथ - पैर दिखाई देते हैं परंतु इन सब में मनुष्य को उस परमात्मा ने एक अमोघ शक्ति के रूप में बु
26 नवम्बर 2019
07 नवम्बर 2019
🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻 *हमारे देश में हिंदू संस्कृति में बताए गए बारहों महीने में कार्तिक मास का विशेष महत्व है , इसे दामोदर मास अर्थात भगवान विष्णु के प्रति समर्पित बताया गया है | कार्तिक मास का क्या महत्व है इसका वर
07 नवम्बर 2019
27 नवम्बर 2019
*ईश्वर की बनायी यह सृष्टि बहुत ही विचित्र है , यहां एक ही भाँति दिखने वाले मनुष्यों के क्रियाकलाप भिन्न - भिन्न होते हैं | मनुष्य के आचरण एवं उसके क्रियाकलापों के द्वारा ही उनकी श्रेणियां निर्धारित हो जाती है | वैसे तो मनुष्य की अनेक श्रेणियां हैं परंतु मुख्यतः दो श्रेणियों में मनुष्य बंटा हुआ है |
27 नवम्बर 2019
17 नवम्बर 2019
*इस सकल सृष्टि में समस्त जड़ चेतन के मध्य मनुष्य सिरमौर बना हुआ है | जन्म लेने के बाद मनुष्य को अपने माता - पिता एवं सद्गुरु के द्वारा सत्य की शिक्षा दी जाती है | यह सत्या आखिर है क्या ? तीनो लोक चौदहों भुवन में एक ही सत्य बताया गया है वह है परमात्मा | जिसके लिए लिखा भी गया है :-- "ब्रह्म सत्यं जगत
17 नवम्बर 2019
16 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य येन - केन प्रकारेण ईश्वर प्राप्ति का उपाय किया करता है | ईश्वर का प्रेम पिराप्त करने के लिए मनुष्य पूजा , अनुष्ठान , मन्दिरों में देवदर्शन तथा अनेक तीर्थों का भ्रमण किया करता है जबकि भगवान को कहीं भी ढूंढ़ने की आवश्यकता नहीं है मानव हृदय में तो ईश्वर का वास है ह
16 नवम्बर 2019
11 नवम्बर 2019
*मानव जीवन में षट्कर्मों का विशेष स्थान है | जिस प्रकार प्रकृति की षडरितुयें , मनुष्यों के षडरिपुओं का वर्णन प्राप्त होता है उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में षट्कर्म भी बताये गये हैं | सर्वप्रथम तो मानवमात्र के जीवन में छह व्यवस्थाओं का वर्णन बाबा जी ने किया है जिससे कोई भी नहीं बच सकता | यथा :- जन्म ,
11 नवम्बर 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x