अपेक्षायें ही दुख का कारण हैं :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सृष्टि का निर्माण प्रकृति से हुआ है | प्रकृति में मुख्य रूप से पंचतत्व एवं उसके अनेकों अंग विद्यमान है जिसके कारण इस सृष्टि में जीवन संभव हुआ है | इसी सृष्टि में अनेक जीवो के मध्य मनुष्य का जन्म हुआ अन्य सभी प्राणियों के अपेक्षा सुख-दुख की अ



शरणागति का भाव

*इस संसार में मनुष्य अपना जीवन यापन करने के लिए अनेकानेक उपाय करता है जिससे कि उसका जीवन सुखमय व्यतीत हो सके | जीवन इतना जटिल है कि इसे समझ पाना सरल नहीं है | मनुष्य का जन्म ईश्वर की अनुकम्पा से हुआ है अत: मनुष्य को सदैव ईश्वर के अनुकूल रहते हुए उनकी शरण प्पाप्त करने का प्रयास करते रहना चाहिए | इसी



अपना क्या है ???

*इस संसार में जन्म लेने के बाद मनुष्य संसार को अपना मानने लगता है | माता - पिता , भाई - बहन , घर एवं समाज के साथ पति - पत्नी एवं बच्चों को अपना मान कर उन्हीं के हितार्थ कार्य करते हुए मनुष्य का जीवन व्यतीत हो जाता है | परंतु यह विचार करना चाहिए कि मनुष्य का अपना क्या है ? जन्म माता पिता ने दिया ! श



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग १८

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *अठारहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*सत्रहवें भाग* में आपने पढ़ा :*अतुलित बल धामा ! अञ्जनिपुत्र पवनसुत



चींटी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि में परमात्मा अनेक जीवों की रचना की है , छोटे से छोटे एवं बड़े से बड़े जीवो की रचना करके परमात्मा ने इस सुंदर सृष्टि को सजाया है | परमात्मा की कोई रचना व्यर्थ नहीं की जा सकती है | कभी कभी मनुष्य को यह लगता है कि परमात्मा ने आखिर इतने जीवों की रचना क्यों की | इस सृष्टि में जितने भी जीव हैं अप



पितृ विसर्जन अमावस्या :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में प्रत्येक तिथियों के विशेष देवता बताए गए हैं , अमावस्या तिथि के देवता पितर होते हैं | वर्ष भर की प्रत्येक अमावस्या को पितरों का पूजन श्राद्ध तर्पण आदि किया जाता रहा परंतु आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या का विशेष महत्व है क्योंकि भाद्रपद पूर्णिमा से अश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक सोलह



पंचबलि :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*अाश्विन कृष्ण पक्ष में पितरों के प्रति श्रद्धास्वरूप मनाया जाने वाला पितृपक्ष अपनी संपूर्णता की ओर अग्रसर है , इसलिए इस के विधान के विषय में प्रत्येक जनमानस को अवश्य जानना चाहिए | प्रायः लोग पितृपक्ष में अपने पितरों के लिए तर्पण एवं ब्राह्मण भोजन करा के पितरों के प्रति अपनी श्रद्धा समर्पित करते है



श्राद्ध में क्षौरकर्म क्यों आवश्यक :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*संसार में अनेकों धर्म हैं जो अपनी कट्टरता के लिए प्रसिद्ध है परंतु इन सब के बीच में सनातन धर्म इतना दिव्य है जिसमें कट्टरता नाम की चीज नहीं है | यह इतना लचीला है कि लोग इसे अपने अनुसार मोड़ लेते हैं | सनातन धर्म में अनेकों व्रत / उपवास एवं उनके नियम बताए गये हैं जिसका पालन करने से मनुष्य को उसका फ



कब करें किसका श्राद्ध :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में आश्विन कृष्ण पक्ष पितरों के लिए विशेष रूप से पितृपक्ष के रूप में मनाया जाता है | ऐसी मान्यता है कि इन दिनों सभी पितर गण बिना आवाहन किए ही पृथ्वीलोक पर विचरण करने के लिए आते हैं तथा अपने परिवार के लोगों के द्वारा अर्पित श्राद्ध तर्पण आदि से तृप्त होकर पुनः पितृलोक को चले जाते हैं इसी



हव्य एवं कव्य :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार को कर्म प्रधान कहा गया है | जो जैसा कर्म करता है उसको वैसा ही फल प्राप्त होता है यहां तक कि मृत्यु के बाद कर्म की भूमिका के कारण ही जीव को अनेक गतियां प्राप्त होती है | अपने कर्म के अनुसार मृत्यु के उपरांत कोई देवता , कोई पितर , कोई प्रेत , कोई हाथी / चींटी या वृक्ष आदि बन जाता है | ऐसे म



मातृ नवमी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आश्विन मास का कृष्ण पक्ष पितरों के लिए समर्पित है | श्रद्धा से अपने पूर्वजों को याद करने एवं उनका तर्पण आदि करने के कारण इसको श्राद्ध पक्ष कहा जाता है | जिस प्रकार सनातन धर्म में विभिन्न देवी-देवताओं के लिए विशेष दिन निश्चित किया गया है उसी प्रकार अपने पितरों के लिए भी अाश्विन कृष्ण पक्ष को विशेष द



शरीर के प्रकार :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*ईश्वर के द्वारा बनाई गयी यह सृष्टि बहुत ही रहस्यमय है | यहां पग पग पर एक नया रहस्य दिखाई पड़ता है | मनुष्य ने अपने बुद्धि बल से अनेक रहस्यों को उजागर भी किया है | ईश्वर के द्वारा प्राप्त विवेक से मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी कहा गया है | सृष्टि के समस्त रहस्य खोजने के लिए तत्पर मनुष्य स्वयं के रहस्य क



तत्त्व विभाग :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*समस्त सृष्टि के कण - कण में ब्रह्म समाया हुआ है जिसे लोग ईश्वर , भगवान या परमात्मा के नाम से जानते हैं | ब्रह्म अर्थात ईश्वर स्वतंत्र है , वह परम शुद्ध और समस्त गुणों से परे है | वह सृष्टि के रचयिता , संरक्षक और विनाशक हैं | समय-समय पर अनेकों रूप धारण करके सृष्टि के संचालन , पालन एवं संहार का कार्



संतान सप्तमी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारा देश भारत एवं हमारी भारतीय संस्कृति इतनी दिव्य है जिसका वर्णन कर पाना असंभव है | हमारे पूर्वज महापुरुषों ने मानव मात्र के कल्याण के लिए इतने नियम एवं विधान बता दिए हैं जिसे करने के बाद मनुष्य को और कुछ करने की आवश्यकता ही नहीं हैं | जीवन के प्रत्येक अंग , जीवन



लोलार्क षष्ठी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*भारत देश पुरातन काल में विश्व गुरु कहा जाता था क्योंकि हमारे देश में सनातन धर्म के माध्यम से मानव मात्र के कल्याण के लिए अनेकों मान्यताएं एवं विधान बनाए गए थे | विश्व का कोई भी ऐसा देश नहीं होगा जिसने भारत की इन मान्यताओं एवं विधानों से शिक्षा न ग्रहण की हो | विश्व गुरु होने के साथ-साथ हमारा देश भा



रहस्य

ए जिंदगी तू है तो रहस्य... तुझे तरस कहूं ,तुझे ओस कहूं तुझे पारस कहूं, तुझे नूर कहूं तुझे धारा कहूं, तुझे किनारा कहूं तुझे धानी चुनर कहूं , तुझे काली ओढ़नी कहूं तुझे आस कहूं, तुझे विश्वास कहूं तुझे रंग कहूं, तुझे जंग कहूं तुझे पतंग कहूं, तुझे बहता नीर कहूं तुझे उपहार कहूं, तुझे अभिशाप कहूं तुझे कर्म



वीरान हवेली का राज

रात के 10 बजेथे। 18 साल की रज्जो अपनी साइकिल से खेतसे गुजरने वाले रास्ते से तेज-तेज गति में निकल रही थी। तभी धनिया वहां कुछ काम कररहा था, बोला “ अरे इतनी रात को क्या काम है तुझे ? क्या प्रेमी से मिलने जा रही है जो अंधेरे का वक्त चुना है तुने, कुछ डरहै कि नहीं तुझे, औरत ज



हनुमान चालीसा (तात्त्विक अनुशीलन) भाग - ६ :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *छठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*पाँचवें भाग* में आपने पढ़ा :---*श्री गुरु चरण सरोज रज ,**निज मन मुक



हनुमान चालीसा (तात्त्विक अनुशीलन ) भाग - ५ :- आचार्य अर्जुन तिवारी

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *पंचम् - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*चतुर्थ भाग* तक आपने पढ़ा:--*श्री गुरु चरण सरोज रज**निज मन मुकुर सुध



हनुमान चालीसा (तात्त्विक अनुशीलन) भाग - ४ :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *भाग - चतुर्थ* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*तृतीय भाग* तक आपने पढ़ा :---*"श्री गुरु चरण"* की व्याख्या ! अब आगे



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