रहस्य

ए जिंदगी तू है तो रहस्य... तुझे तरस कहूं ,तुझे ओस कहूं तुझे पारस कहूं, तुझे नूर कहूं तुझे धारा कहूं, तुझे किनारा कहूं तुझे धानी चुनर कहूं , तुझे काली ओढ़नी कहूं तुझे आस कहूं, तुझे विश्वास कहूं तुझे रंग कहूं, तुझे जंग कहूं तुझे पतंग कहूं, तुझे बहता नीर कहूं तुझे उपहार कहूं, तुझे अभिशाप कहूं तुझे कर्म



वीरान हवेली का राज

रात के 10 बजेथे। 18 साल की रज्जो अपनी साइकिल से खेतसे गुजरने वाले रास्ते से तेज-तेज गति में निकल रही थी। तभी धनिया वहां कुछ काम कररहा था, बोला “ अरे इतनी रात को क्या काम है तुझे ? क्या प्रेमी से मिलने जा रही है जो अंधेरे का वक्त चुना है तुने, कुछ डरहै कि नहीं तुझे, औरत ज



हनुमान चालीसा (तात्त्विक अनुशीलन) भाग - ६ :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *छठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*पाँचवें भाग* में आपने पढ़ा :---*श्री गुरु चरण सरोज रज ,**निज मन मुक



हनुमान चालीसा (तात्त्विक अनुशीलन ) भाग - ५ :- आचार्य अर्जुन तिवारी

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *पंचम् - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*चतुर्थ भाग* तक आपने पढ़ा:--*श्री गुरु चरण सरोज रज**निज मन मुकुर सुध



हनुमान चालीसा (तात्त्विक अनुशीलन) भाग - ४ :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *भाग - चतुर्थ* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*तृतीय भाग* तक आपने पढ़ा :---*"श्री गुरु चरण"* की व्याख्या ! अब आगे



श्रीहनुमान चालीसा (तात्त्विक अनुशीलन) भाग - ३ - आचार्य अर्जुन तिवारी

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *भाग - तृतीय* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*द्वितीय भाग में आपने पढ़ा :--**श्री



हनुमान चालीसा (तात्त्विक अनुशीलन) भाग - २ आचार्य अर्जुन तिवारी

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *भाग - द्वितीय* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖गोस्वामी तुलसीदास जी ने *दोहे* का प्रारंभ *"श्री गुरु"* से किया ह



जिन्दा है किम जोंग ?

किम जोंग उन जिन्दा हैं ?पूरी दुनिया जहाँ एक तरफ कोरोना से लड़ने में जुटी है तो वहीं एक तरफ उत्तर कोरिया के तानाशाह के गायब होने को लेकर भी उलझन में हैं। इसी बीच नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के जिंदा होने के कुछ और सबूत सामने आए है



संशयात्मा विनश्यति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार की रचना परमपिता परमात्मा की इच्छा मात्र से हुई है ! ब्रह्मादि देवताओं के आधारभूत पारब्रह्म को जगतनियन्ता , जगत्पिता आदि की उपाधियों से विभूषित किया जाता है | उसी दिव्य शक्ति को विराट पुरुष , श्रीहरि विष्णु ईश्वर , परमेश्वर , भगवान आदि कहा जाता है ! ईश्वर को किसी ने देखा नहीं है वह तो मात्



लक्ष्मण :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

🌺🌲🌺🌲🌺🌲🌺🌲🌺🌲🌺 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🐍🏹 *लक्ष्मण* 🏹🐍 🌹 *भाग - ३* 🌹🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸🍏🩸*➖➖➖ गतांक से आगे ➖➖➖**हम लक्ष्मण जी के जीवन के रहस्यों को उजागर करने का प्रयास करते हुए उनकी विशेषताओं पर चर्चा कर रहे हैं :---**लक्ष्मण जी बचपन



हनुमान जयंती :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में जन्म लेने के बाद मनुष्य का लक्ष्य होता है मोक्ष प्राप्त करना | मोक्ष प्राप्त करने के लिए हमारे महापुरुषों ने कई साधन बताए हैं | कोई भक्ति करके मोक्ष प्राप्त करना चाहता है तो कोई ज्ञानवान बन करके सत्संग के माध्यम से इस मार्ग को चुनता है , और कई मनुष्य बैराग्य धारण करके मोक्ष की कामना कर



जीवन का संयोजन :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन यदि देखा जाय तो बहुत ही सरल एवं कठिन दोनों है | इस जीवन के रहस्य को वही जान पाता है जो जीवन को एक कुशल प्रबंधक की तरह प्रबंधित करता है | मानव जीवन में भूतकाल , वर्तमानकाल एवं भविष्यकाल का बहुत ही महत्व है इन्हीं तीनों कालों पर संपूर्ण मानव जीवन टिका हुआ होता है , जो इनके रहस्यों को जान जा



मंगलाचरण :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*प्राचीन भारतीय संस्कृति में मनुष्य को तो महत्त्व दिया ही है साथ ही उसके आचरण को कहीं अधिक महत्व दिया गया है मनुष्य अपने जीवन में जाने - अनजाने अनेक प्रकार के गलत आचरण किया करता है इसीलिए किसी भी शुभ मंगल कार्य करने से पहले मंगलाचरण करने की व्यवस्था हमारे पूर्वजों ने बनाई थी | इसका प्रारंभ मनुष्य के



जातस्य हि ध्रुवो मृत्यु: :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सकल सृष्टि में समस्त जड़ चेतन के मध्य मनुष्य सिरमौर बना हुआ है | जन्म लेने के बाद मनुष्य को अपने माता - पिता एवं सद्गुरु के द्वारा सत्य की शिक्षा दी जाती है | यह सत्या आखिर है क्या ? तीनो लोक चौदहों भुवन में एक ही सत्य बताया गया है वह है परमात्मा | जिसके लिए लिखा भी गया है :-- "ब्रह्म सत्यं जगत



दोषों का शमन करती है श्रीमद्भागवत :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य येन - केन प्रकारेण ईश्वर प्राप्ति का उपाय किया करता है | ईश्वर का प्रेम पिराप्त करने के लिए मनुष्य पूजा , अनुष्ठान , मन्दिरों में देवदर्शन तथा अनेक तीर्थों का भ्रमण किया करता है जबकि भगवान को कहीं भी ढूंढ़ने की आवश्यकता नहीं है मानव हृदय में तो ईश्वर का वास है ह



अमृततुल्य है श्रीमद्भागवत:--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*देवासुर संग्राम में राक्षसों से परास्त होने के बाद देवताओं को अमर करने के लिए श्री हरि विष्णु ने समुद्र मंथन की योजना बनायी | समुद्र मंथन करके अमृत निकाला गया उस अमृत को टीकर देवता अमर हो गए | ठीक उसी प्रकार इस धराधाम के जीवों को अमर करने के लिए वेदव्यास जी ने वेद पुराणों का मंथन करके श्रीमद्भागवत



भगवान का वांग्मय स्वरूप है श्रीमद्भागवत :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि के आदिकाल में वेद प्रकट हुए , वेदों का विन्यास करके वेदव्यास जी ने अनेकों पुराणों का लेखन किया परंतु उनको संतोष नहीं हुआ तब नारद जी के कहने से उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की | श्रीमद्भागवत के विषय में कहा जाता है यह वेद उपनिषदों के मंथन से निकला हुआ ऐसा नवनीत (मक्खन) है जो कि वेद



षट्कर्म :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में षट्कर्मों का विशेष स्थान है | जिस प्रकार प्रकृति की षडरितुयें , मनुष्यों के षडरिपुओं का वर्णन प्राप्त होता है उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में षट्कर्म भी बताये गये हैं | सर्वप्रथम तो मानवमात्र के जीवन में छह व्यवस्थाओं का वर्णन बाबा जी ने किया है जिससे कोई भी नहीं बच सकता | यथा :- जन्म ,



गुरुकृपा की आवश्यकता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*अपने विगत जन्मों के कर्मानुसार जीव मनुष्य रूप में इस धरती पर विशेषकर भारत देश में जन्म लेता है | आदिकाल से ही हमारे देश के महापुरुषों ने "भगवत्कृपा" "हरिकृपा" प्राप्त करने के लिए अनेकानेक प्रयास किये हैं | कठिन तपस्या , दुष्कर जप एवं और अन्य साधनों के माध्यम से मनुष्य ने "भगवत्कृपा" प्राप्त करने का



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