गुस्सा, आशिकी और सादगी.....जीवन के हर रंग को जीते थे जवाहरलाल नेहरू

24 सितम्बर 2019   |  स्नेहा दुबे   (478 बार पढ़ा जा चुका है)

गुस्सा, आशिकी और सादगी.....जीवन के हर रंग को जीते थे जवाहरलाल नेहरू

200 साल गुलामी झेलने के बाद जब भारत ने आजादी हासिल की थी। ये पूरे देश के लिए बहुत खुशी का पल था और उन आत्मा को शांति भी प्राप्ति हुई होगी जिन्होंने अपने जन्म से हर सांस आजादी के लिए लगा दी। बहुत से क्रांतिकारियों ने अपने प्राण गवां दिये क्योंकि भारत को आजाद करना था। फिर जब देश आजाद हुआ तो देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बने, और इन्हें सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में गिना जाता है। जवाहरलाल नेहरू को बच्चे बहुत पसंद थे और इस वजह से ही इनके जन्मदिवस के उपलक्ष्य पर Children Day (बाल दिवस) मनाया जाता है। अगर हम नेहरू जी के जीवन को विस्तार से पढ़ते हैं तो आपको उनके बारे में सारी बातें पता चलेंगी। यहां हम आपको Jawaharlal Nehru Biography के बारे में बताएंगे, जिसे आपको जरूर पढ़ना चाहिए।


Jawaharlal Nehru


जवाहरलाल नेहरू का प्रारंभिक जीवन (Early Life of Jawaharlal Nehru)


पं. जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर, 1889 को कश्मीरी पंडित मोतीलाल नेहरू के घर हुआ था जो उस दौर के मशहूर बैरिएस्टर थे। इनकी मां एक साधारण महिला श्रीमति स्वरूप रानी थीं। नेहरू जी की दो बहनें थीं जिनमें से एक विजया लक्ष्मी बड़ी थीं और ये संयुक्त राष्ट्र महासभ की पहली महिला अध्यक्ष थीं जबकि इनकी छोटी बहन कृष्णा हठीसिंग एक प्रभावशाली लेखिका थीं। पंडित नेहरू का दिमाग बहुत ही तेज था और वे जिससे एक बार मिलते थे उन्हें हमेशा के लिए याद रखते थे। बड़े होने पर पं. जवाहरलाल नेहरू एक कुशल राजनेता, आदर्शवादी, विचारक और महान लेखक बने थे। कश्मीरी पंडित समुदाय होने के कारण इन्हें पंडित नेहरू भी कहा जाता था। नेहरू जी की प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई थी जबकि बाद में इनकी शिक्षा दुनिया के मशहूर स्कूल और कॉलेज में हुई थी।


Jawaharlal Nehru


Jawaharlal Nehru Education के मामले में उस दौर में सबसे आगे थे। 15 साल की उम्र में नेहरू जी को इंग्लैंड के हैरो स्कूल में पढ़ाई के लिए भेजा गया था। 2 साल तक हैरो में रहने के बाद नेहरू जी ने लंदन ट्रिनिटी कॉलेज से लॉ किया और इसके बाद कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से कानून में मास्टर्स की डिग्री ली। कैम्ब्रिज छोड़ने के बाद लंदन के इनर टेंपल में 2 साल तक वकालत की पढ़ाई पूरी की और 7 सालों तक इंग्लैंड में रहने के बाद इन्होने फैबियन समाजवाद और आयरिश राष्ट्रवाद की जानकारी भी हासिल की। वहीं साल 1912 में वे भारत लौटे और यहां वकालत शुरु कर दी।



नेहरू जी का वैवाहिक जीवन (Married Life of Jawaharlal Nehru)


Jawaharlal Nehru


भारत लौटने के 4 साल बाद साल 1916 में मोतीलाल नेहरू ने अपने पुत्र Jawaharlal Nehru का विवाह कमला कौर के साथ करवा दिया था। कमला कौर दिल्ली में बसे कश्मीरी परिवार से ताल्लुख रखती थीं। साल 1917 में उन्होंने इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू को जन्म दिया और ये आगे चलकर स्वतंत्र भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी। इन्हें हम इंदिरा गांधी के नाम से जानते हैं और ये भारत की लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में से एक हैं। इंदिरा गांधी अपने पिता को ही गुरु मानती थीं, और राजनीति के सभी गुण उन्होंने अपने पिता से ही सीखा है। बचपन से ही देश की आजादी की लड़ाई के इंदिरा गांधी बहुत से देखी हैं। यही वजह थी कि वे भी देश के प्रति प्रेम रखती थीं और अपनी आखिरी सांस तक देश के लिए ही कुछ ना कुछ करती रहीं। हालांकि कुछ समय में उनकी आलोचनाएं भी बहुत हुईं लेकिन किसी भी नेता के लिए आम बात होती है।


जवाहरलाल नेहरू का राजनैतिक सफर (Jawaharlal Nehru Political Career)


Jawaharlal Nehru


साल 1912 में नेहरू जी भारत वापस आए और इलाहाबाद हाईकोर्ट में बेरिस्टर के रूप में काम करने लगे। साल 1917 में वे होम-रूल-लीग से जुड़े और साल 1919 में नेहरू जी गांधी जी के संपर्क में आए और उनके विचारों, कर्मों से काफी प्रभावित हुए। नेहरू जी ने गांधी जी से राजनैतिक दावपेज सीखे और साल 1919 में ही गांधी जी ने रोलेट-अधिनियम के खिलाफ मोर्चा संभाला था। नेहरू जी महात्मा गांधी के सविनय अविज्ञा आंदोलन से बहुत प्रभावित हुए थे और नेहरू जी के साथ उनके परिवार ने भी गांधी जी को मानने लगे थे। साल 1920-22 में गांधीजी द्वारा चलाए गए असहयोग-आंदोलन में नेहरू जी ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था और इस समय नेहरू जी पहली बार जेल गए थे। साल 1924 में इलाहाबाद नगर-निगम के अध्यक्ष के रूप में दो सालों तक शहर की सेवा की और साल 1926 में इऩ्होने इस्तिफा दे दिया। साल 1926-28 तक नेहरू जी 'अखिल भारतीय कांग्रेस' के महासचिव बन गए थे। गांधी जी ने नेहरू जी में एक उज्जवल भारत का महान नेता नजर आ रहा था। साल 1928-29 में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के वार्षिक-सत्र का आयोजन हुआ और इस सत्र को दो गुटों में बांध दिया गया। पहले गुट में नेहरू और सुभाषचंद्र बोस ने पूर्ण स्वतंत्रता की मांग में समर्थन किया था और दूसरे गुट में मोतीलाल नेहरू और दूसरे नेताओं ने सरकार के आधीन ही प्रभुत्व सम्पन्न होने की मांग की। इन दो प्रस्तावों की लड़ाई में गांधी जी ने बीच का रास्ता निकाला और उन्होने कहा कि ब्रिटेन को दो सालों का समय दिया जाएगा, जिससे वे भारत को राज्य का दर्जा दे नहीं तो कांग्रेस एक राष्ट्रीय लड़ाई को जन्म दे सकती है।


Jawaharlal Nehru


मगर सरकार ने कोई उचित जवाब नहीं दिया और नेहरू जी की अध्यक्षता में दिसंबर, 1929 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन 'लाहौर' में किया और इसमें सभी ने एक मत होकर पूर्ण स्वराज की मांग की। 26 जनवरी, 1930 में लाहौर में नेहरू जी ने स्वतंत्र भारत का ध्वज लहराया और साल 1930 में गांधी जी ने सविय अवज्ञा आंदोलन का जोरों से आव्हाहन किया और ये बहुत सफल रहा, ब्रिटिश सरकार को गांधी जी के आगे झुकना पड़ा।साल 1935 में जब ब्रिटिश सरकार ने भारत अधिनियम का प्रस्ताव पारित किया था तब कांग्रेस ने चुनाव लड़ने का फैसला लिया। Jawaharlal Nehru ने चुनाव के बाहर रहकर ही पार्टी का समर्थन किया और कांग्रेस ने हर प्रदेश में सरकार बना ली, इससे कांग्रेस की हर तरफ जीत हुई थी. साल 1936-37 में नेहरू जी को कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया और साल 1942 में गांधीजी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन के बीच नेहरू जी को भी गिरफ्तार किया गया था, इसके बाद साल 1945 में नेहरू जी जेल से बाहर आए थे। साल 1947 में भारत और पाकिस्तान की आजादी के समय नेहरू जी ने सरकार के साथ बातचीत में एक अहम भूमिका निभाई थी।


आजाद भारत का पहला प्रधानमंत्री चुनाव (First Election of Loksabha)


Jawaharlal Nehru


साल 1947 में भारत को आजादी मिली और देश का टुकड़ा हो गया। आजादी के बाद कांग्रेस में प्रधानमंत्री की दावेदारी के लिए चुनाव किये गए, इसमें सरदार वल्लभ भाई पटेल और आचार्य कृपलानी को सबसे ज्यादा वोट मिले थे। मगर गांधी जी के आग्रह पर जवाहरलाल नेहरू को भारत का पहला प्रधानमंत्री बनाया गया। इसके बाद नेहरू जी लगातार तीन बार पीएम बने। स्वतंत्रता के बाद भारत को सही तरह से गठित करने में नेहरू जी ने हर वो प्रयास किए जिसमें वे सफल भी हुए। अपने नेतृत्व में उन्होंने एक मजबूत राष्ट्र की नीव रखी और भारत को आर्थिक रूप से निर्भीक बनाने के लए भी बहुत योगदान दिया। आधुनिक भारत के स्वप्न की मजबूत नीव का निर्माण किया और इन्होने शांति संगठन के लिए 'गुट-निरपेतक्ष' आंदोलन की रचना की थी लेकिन इनकी इतनी मेहतन के बाद ये पाकिस्तान और चीन से मैत्री पूर्ण संबंध नहीं बना पाए थे। साल 1955 में Jawaharlal Nehru को देश का सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' मिला था।


जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु (Death of Jawaharlal Nehru)


Jawaharlal Nehru


पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन के साथ संबंध सुधारने की बहुत कोशिशें कीं लेकिन वे असफल रहे। नेहरू जी का कहना था कि हमें अपने पड़ोस से बनाकर रखना चाहिए लेकिन साल 1962 में चीन ने भारत पर हमला कर दिया, इससे नेहरू जी को बहुत दुख पहुंचा था। पाकिस्तान से भी कश्मीर मसले के चलते कभी अच्छे संबंध नहीं बन पाए थे। 27 मई, 1964 को दिल का दौरा पड़ने से नेहरू जी का निधन हो गया था और उनकी मौत से भारत में एक दुख की लहर दौड़ पड़ी थी. देश के महान नेता और स्वतंत्रता संग्रामी पंडित जवाहरलाल नेहरू को आज भी लोग याद करते हैं। उनकी याद में बहुत सी योजनाओं को गठित किया गया जिसमें जवाहरलाल नेहरू स्कूल, जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल जैसे कई संगठन हैं। नेहरू जी ने साल 1944 में अहमदनगर में Discovery of India (डिस्कवरी ऑफ इंडिया) नाम की एक किताब लिखी। इस किताब को पंडित नेहरू ने अंग्रेजी भाषा में लिखा था इसके बाद इस पुस्तक को हिंदी सहित कई भाषाओं में लिखा गया। आपको बता दें कि इस किताब में नेहरू जी ने सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर भारत की आजादी और भारत की संस्कृति, धर्म और संघर्ष का वर्णन किया गया है। इसके अलावा पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत और विश्व, सोवियत रूस, विश्व इतिहास की एक झलक भारत की एकता और स्वतंत्रता, दुनिया के इतिहास का ओझरता दर्शन (1939) (Glimpses Of World History) जैसी किताबें भी लिखीं।


नेहरू जी का स्वभाव (Nature of Jawaharlal Nehru)


Jawaharlal Nehru


पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वभाव से बहुत अच्छे व्यक्ति थे लेकिन आम आदमी की तरह उनके अंदर भी गुस्सा, शांति और प्रेम भाव देखने को मिलते थे। कुछ इतिहासकारों का मानना था कि कॉलेज के दिनों में नेहरू जी के ऊपर बहुत सी लड़कियां दिल फेंकती थीं क्योंकि वे ऊंचे कद-काठी के और सभ्य व्यक्ति थे। बीबीसी के मुताबिक, नेहरू के बारे में ऐसी खबरें भी रहीं कि उनके वायसरॉय लॉर्ड माउंडबेटन की पत्नी के साथ 'अंतरंग' थे। नेहरू जी के विकीपीडिया पेज के साथ छेड़छाड़ होने का मामला सामने आया था और इसमें उनके दादा को मुसलमान बताया गया था। हालांकि अब तक इस तरह की जानकारियों को विकीपीडिया ने हटा दिया था। कांग्रेस का आरोप था कि ये छेड़छाड़ कथित तौर पर केंद्र सरकार के एक आईपी एड्रेस से की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विकीपीडिया में जानकारी जोड़ने या उन्हें संपादित करने वाले सॉफ्टवेयर से पता चला है कि नेहरू जी के पेज में छेड़छाड़ 26 जून, 2015 को गई गई थी। इसी में Jawaharlal Nehru के आशिकी वाले अंदाज को बयां किया गया था।


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